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अगले माह होगी एनएसजी की बैठक, एंट्री के लिए भारत ने एक बार फिर कसी कमर
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
Updated Sun, 21 May 2017 04:03 PM IST
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एनएसजी की बैठक अगले माह, भारत की एंट्री पर अब भी सस्पेंस
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न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) की बैठक संभवत: अगले माह स्विट्जरलैंड में होनी है। ये बैठक स्विस राजधानी बर्न में होगी, जिसमें भारत की एंट्री से जुड़ी चर्चा भी शामिल है। दरअसल, भारत ने एनएसजी की सदस्यता के लिए पिछले साल मई में ही अप्लाई किया था, पर चीन के अडंगे के चलते भारत को एनएसजी की सदस्यता नहीं मिल पाई है। इस बार की बैठक में भी चीन अडंगा लगाने को तैयार है, ऐसे में भारत अभी एनएसजी में एंट्री पा जाएगा, इसमें सस्पेंस बना हुआ है।
एनएसजी में शामिल देश न्यूक्लियर मटैरियल के एक्सपोर्ट, कलपुर्जे बनाने और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसी चीजों पर कंट्रोल रखते हैं। इसमें कुल 48 सदस्य हैं। चीन का कहना है कि भारत ने अभी परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किया है। इसलिए उसे एनएसजी में शामिल नहीं किया जा सकता। यही नहीं, चीन का कहना है कि अगर भारत को एनएसजी में शामिल करना है, तो पाकिस्तान को भी करना चाहिए। पाकिस्तान भी एनएसजी की मेंबरशिप के लिए अप्लाई कर चुका है।
एनएसजी की इस बैठक से इतर भारत ने इसमें शामिल होने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। भारत को अधिकतर देशों का समर्थन भी हासिल है पर न्यूजीलैंड, तुर्की और चीन इसमें अडंगा लगा देते हैं। चीन की तरह तुर्की भी भारत के साथ पाकिस्तान को भी शामिल करने की बात करता है। वहीं, न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने पिछले साल भारत को लेकर सकारात्मक संदेश दिया था।
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दरअसल, भारत की एनएसजी मेंबरशिप में चीन ही सबसे बड़ा रोड़ा है। वो भारत की एंट्री दो चरणों में चाहता है। पहला एंटी के लिए सभी जरूरी बाध्यताओं को भारत पूरा करे, जिसमें एनपीटी भी शामिल है। दूसरा वो भारत के साथ ही पाकिस्तान को भी एनएसजी में लाना चाहता है।
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एनएसजी में शामिल देश न्यूक्लियर मटैरियल के एक्सपोर्ट, कलपुर्जे बनाने और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसी चीजों पर कंट्रोल रखते हैं। इसमें कुल 48 सदस्य हैं। चीन का कहना है कि भारत ने अभी परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किया है। इसलिए उसे एनएसजी में शामिल नहीं किया जा सकता। यही नहीं, चीन का कहना है कि अगर भारत को एनएसजी में शामिल करना है, तो पाकिस्तान को भी करना चाहिए। पाकिस्तान भी एनएसजी की मेंबरशिप के लिए अप्लाई कर चुका है।
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एनएसजी की इस बैठक से इतर भारत ने इसमें शामिल होने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। भारत को अधिकतर देशों का समर्थन भी हासिल है पर न्यूजीलैंड, तुर्की और चीन इसमें अडंगा लगा देते हैं। चीन की तरह तुर्की भी भारत के साथ पाकिस्तान को भी शामिल करने की बात करता है। वहीं, न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने पिछले साल भारत को लेकर सकारात्मक संदेश दिया था।
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दरअसल, भारत की एनएसजी मेंबरशिप में चीन ही सबसे बड़ा रोड़ा है। वो भारत की एंट्री दो चरणों में चाहता है। पहला एंटी के लिए सभी जरूरी बाध्यताओं को भारत पूरा करे, जिसमें एनपीटी भी शामिल है। दूसरा वो भारत के साथ ही पाकिस्तान को भी एनएसजी में लाना चाहता है।