{"_id":"6375f767d3cd52571755d598","slug":"now-self-styled-godman-shraddhananda-moves-supreme-court-for-release-seeks-parity-with-rajiv-assassins","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: पत्नी के हत्यारे श्रद्धानंद ने मांगी रिहाई, राजीव हत्याकांड के दोषियों को छोड़ने का दिया हवाला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: पत्नी के हत्यारे श्रद्धानंद ने मांगी रिहाई, राजीव हत्याकांड के दोषियों को छोड़ने का दिया हवाला
Thu, 17 Nov 2022 02:27 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 17 Nov 2022 02:27 PM IST
सार
श्रद्धानंद उर्फ मुरली मनोहर मिश्रा ने 28 अप्रैल 1991 को पत्नी शकीरा नमाजी की नशीला पदार्थ खिला दिया था। इसके बाद उसे बेंगलुरु स्थित अपने विशाल बंगले के अहाते में जिंदा दफना दिया था। पत्नी की हत्या के मामले में वह अभी आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
विस्तार
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई के बाद अब उसी तरह समानता के आधार पर अन्य दोषी भी रिहाई की मांग करने लगे हैं। पत्नी की हत्या के आरोप में जेल में बंद संत श्रद्धानंद ने इसी समानता का हवाला देकर रिहा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की है।
विज्ञापन
श्रद्धानंद उर्फ मुरली मनोहर मिश्रा ने 28 अप्रैल 1991 को पत्नी शकीरा नमाजी की नशीला पदार्थ खिला दिया था। इसके बाद उसे बेंगलुरु स्थित अपने विशाल बंगले के अहाते में जिंदा दफना दिया था। पत्नी की हत्या के मामले में वह अभी आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
विज्ञापन
श्रद्धानंद ने राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की तरह जेल से रिहा होने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। श्रद्धानंद ने रिहाई की अर्जी में कहा कि वह एक भी दिन की पैरोल लिए बगैर 29 साल जेल में बिता चुका है। राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की तरह उसकी रिहाई नहीं होना समानता के अधिकार के उल्लंघन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
विज्ञापन
1986 में श्रद्धानंद ने की थी शकरेह से शादी
मैसूर के पूर्व दीवान सर मिर्जा इस्माइल की पोती शकीरा ने पूर्व राजनयिक अकबर खलीली को तलाक देकर 1986 में श्रद्धानंद से शादी की थी। राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई के आधार पर समानता की मांग करते हुए श्रद्धानंद ने सुप्रीम कोर्ट कहा कि उन्हें किसी छूट या पैरोल के बिना आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
वकील वरुण ठाकुर के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता की उम्र 80 साल से ज्यादा है और वह मार्च 1994 से जेल में बंद है। यह भी कहा गया है कि राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों ने अपनी याचिकाएं लंबित होने के दौरान पैरोल और अन्य छूट का लाभ भी उठाया था।
जमीन खोद कर निकाला था शव
यह अपराध शकीरा की 600 करोड़ रुपये की संपत्ति को हड़पने के लिए किया गया था, जिसे अप्रैल-मई 1991 में किसी समय नशीला पदार्थ देकर जिंदा दफन कर दिया गया था। उसके शरीर को खोद कर निकाला गया था और 30 अप्रैल, 1994 को श्रद्धानंद को गिरफ्तार कर लिया गया था। 2000 में एक निचली अदालत ने उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। 2005 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने इसे कायम रखा था। इसके बाद उसकी अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में मौत की सजा को बिना किसी छूट के उम्र कैद में बदल दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने श्रद्धानंद की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है।