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अब भारत में उड़ेंगे स्वदेशी विमान, 155 एकड़ में बनेगा कारखाना
सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई
Updated Mon, 19 Feb 2018 09:34 PM IST
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अपने घर की छत पर विमान बनाने का कारनामा कर दिखाने वाले कैप्टन अमोल यादव के सपनों को पंख लगने वाले हैं। मुंबई में शुरू तीन दिवसीय मैग्नेटिक महाराष्ट्र में मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थित में अमोल यादव की कंपनी थर्स्ट एयरक्राफ्ट के साथ 35 हजार करोड़ रुपये का सामंजस्य करार किया गया। इससे अब जल्द ही देश में मेक इन इंडिया का विमान उड़ान भरेगा।
महाराष्ट्र के पालघर में पहला स्वदेशी विमान कारखाना बनेगा जिसमें करीब 10 हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा। अमोल यादव ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अब तक विदेश से विमान मंगाए जाते थे, लेकिन अब जल्द ही स्वदेशी विमान तैयार होगा। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने विमान कारखाना के लिए पालघर में 155 एकड़ जमीन देने के लिए सामंजस्य करार किया है।
उन्होंने कहा कि हमने पहला विमान बनाना शुरू कर दिया है। पहले चरण में चार विमान तैयार किए जाएंगे जिसमें 200 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पहला विमान चार से छह महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद उसका ट्रायल होगा और फिर नियमित उड़ान शुरू की जाएगी। सभी विमान 19 सीटर होंगे। छोटा विमान होने से यह हर एयरपोर्ट से उड़ान भर सकेगा। छोटे विमान से जहां देश में रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ेगी वहीं बड़ी मात्रा में रोजगार का सृजन भी होगा। विमान कारखाना के लिए महाराष्ट्र्र सरकार जमीन, पानी और बिजली के अलावा आर्थिक मदद भी मुहैया कराएगी।
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महाराष्ट्र के पालघर में पहला स्वदेशी विमान कारखाना बनेगा जिसमें करीब 10 हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा। अमोल यादव ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अब तक विदेश से विमान मंगाए जाते थे, लेकिन अब जल्द ही स्वदेशी विमान तैयार होगा। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने विमान कारखाना के लिए पालघर में 155 एकड़ जमीन देने के लिए सामंजस्य करार किया है।
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उन्होंने कहा कि हमने पहला विमान बनाना शुरू कर दिया है। पहले चरण में चार विमान तैयार किए जाएंगे जिसमें 200 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पहला विमान चार से छह महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद उसका ट्रायल होगा और फिर नियमित उड़ान शुरू की जाएगी। सभी विमान 19 सीटर होंगे। छोटा विमान होने से यह हर एयरपोर्ट से उड़ान भर सकेगा। छोटे विमान से जहां देश में रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ेगी वहीं बड़ी मात्रा में रोजगार का सृजन भी होगा। विमान कारखाना के लिए महाराष्ट्र्र सरकार जमीन, पानी और बिजली के अलावा आर्थिक मदद भी मुहैया कराएगी।
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20 साल की मेहनत का प्रतिफल
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- फोटो : self
अमोल यादव के 20 साल की मेहनत का प्रतिफल है कि उन्हें स्वदेशी विमान बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने मदद की है। मूलरूप से सातारा जिले के और अब मुंबई में रहने वाले अमोल यादव पेशे से पायलट हैं। अमेरिका से लौटकर साल 1998 में उन्होंने पहली बार स्वदेशी विमान उड़ाने की कल्पना की थी। पहले 1998 में और 2003 में टू सीटर एयरक्राफ्ट बनाया जो टेस्ट में नाकाम रहा। इसके बाद अमोल ने थर्स्ट एयरक्राफ्ट नामक कंपनी बनाई और फिर आठ सिलेंडर वाले ऑटोमोबाइल वाले इंजन के जरिए विमान बनाने की कोशिश शुरू की।
साल 2011 में कोशिश सफल हुई। लेकिन, नियम-कानून की अड़चन के कारण उड़ान भरने की इजाजत नहीं मिली। इस बीच 2016 में मुंबई के बीकेसी में मेक इन इंडिया प्रदर्शनी में उनके बनाए छह सीटर टीएसी-003 विमान को लोगों ने देखा। मुख्यमंत्री फडणवीस ने अमोल का साथ दिया। पीएम नरेंद्र मोदी से चार दौर की बात की। अंतत: पीएम के हस्तक्षेप के बाद 20 नवंबर 2017 को डॉयरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन की ओर से विमान बनाने का सर्टिफिकेट मिला।
साल 2011 में कोशिश सफल हुई। लेकिन, नियम-कानून की अड़चन के कारण उड़ान भरने की इजाजत नहीं मिली। इस बीच 2016 में मुंबई के बीकेसी में मेक इन इंडिया प्रदर्शनी में उनके बनाए छह सीटर टीएसी-003 विमान को लोगों ने देखा। मुख्यमंत्री फडणवीस ने अमोल का साथ दिया। पीएम नरेंद्र मोदी से चार दौर की बात की। अंतत: पीएम के हस्तक्षेप के बाद 20 नवंबर 2017 को डॉयरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन की ओर से विमान बनाने का सर्टिफिकेट मिला।