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Tribute: नोबेल सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक को दी श्रद्धांजलि, इस तरह किया याद
Tue, 14 Mar 2023 03:24 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 14 Mar 2023 03:24 PM IST
सार
डॉ. वैदिक को याद करते हुए कैलाश सत्यार्थी ने कहा, "हम पिछले 50 सालों से आर्य समाज, लेखन,पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के आंदोलनों में किसी न किसी रूप में जुड़े रहे हैं। वे मेरे लिए हमेशा एक बड़े भाई और मित्र की तरह रहे।"
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कैलाश सत्यार्थी
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विस्तार
देश के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक के निधन पर नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। डॉ. वैदिक का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वह 78 साल के थे। उनके निधन को लेकर कैलाश सत्यार्थी ने कहा, "भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा के लिए जीवन भर संघर्ष करने वाले सबसे बड़े पुरोधा डॉक्टर वेद प्रताप वैदिक जी के देहावसान की खबर से स्तब्ध और अत्यंत दुखी हूं। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है कि हमेशा इतनी ऊर्जा,उत्साह और उमंग से भरे रहने वाले भाई वैदिक जी हमारे बीच में नहीं रहे।"
उन्होंने कहा, "हम पिछले 50 सालों से आर्य समाज, लेखन,पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के आंदोलनों में किसी न किसी रूप में जुड़े रहे हैं। वे मेरे लिए हमेशा एक बड़े भाई और मित्र की तरह रहे। वैदिक जी इंदौर के थे और मैं विदिशा का। मध्यभारत में आर्य समाज में सक्रिय होने के नाते उनके परिवार से मेरा बड़ा अच्छा संबंध था। दिल्ली में आकर बस जाने के बाद मुझे पता चला मेरी ससुराल से भी उनके उतने ही गहरे रिश्ते थे। उनका चले जाना हमारे लिए निजी क्षति है। मेरी पत्नी सुमेधा जी और मुझे उनका स्नेह और अपनापन हमेशा याद रहेंगे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
दिल का दौरा पड़ने से हुई मृत्यु
वैदिक सुबह गुड़गांव स्थित अपने घर में करीब साढ़े नौ बजे के आसपास शौचालय गए थे और वह वहीं बेहोश हो गए। शौचालय का दरवाजा तोड़ कर उन्हें बाहर निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व वैदिक पूरी तरह स्वस्थ थे और कल भी वह दिल्ली गए थे । डाक्टरों ने दिल का दौरा पड़ने को मृत्यु का संभावित कारण बताया है।
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उन्होंने कहा, "हम पिछले 50 सालों से आर्य समाज, लेखन,पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के आंदोलनों में किसी न किसी रूप में जुड़े रहे हैं। वे मेरे लिए हमेशा एक बड़े भाई और मित्र की तरह रहे। वैदिक जी इंदौर के थे और मैं विदिशा का। मध्यभारत में आर्य समाज में सक्रिय होने के नाते उनके परिवार से मेरा बड़ा अच्छा संबंध था। दिल्ली में आकर बस जाने के बाद मुझे पता चला मेरी ससुराल से भी उनके उतने ही गहरे रिश्ते थे। उनका चले जाना हमारे लिए निजी क्षति है। मेरी पत्नी सुमेधा जी और मुझे उनका स्नेह और अपनापन हमेशा याद रहेंगे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
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दिल का दौरा पड़ने से हुई मृत्यु
वैदिक सुबह गुड़गांव स्थित अपने घर में करीब साढ़े नौ बजे के आसपास शौचालय गए थे और वह वहीं बेहोश हो गए। शौचालय का दरवाजा तोड़ कर उन्हें बाहर निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व वैदिक पूरी तरह स्वस्थ थे और कल भी वह दिल्ली गए थे । डाक्टरों ने दिल का दौरा पड़ने को मृत्यु का संभावित कारण बताया है।
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