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Bombay HC: बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला, शरद पवार पर टिप्पणी के मामले में छात्र को जमानत देने से इनकार
Mon, 06 Jun 2022 05:29 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 06 Jun 2022 05:29 PM IST
सार
अदालत ने कहा कि मौलिक अधिकार पूर्ण नहीं हैं। किसी को भी किसी और के निजी जीवन पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
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Bombay high court
- फोटो : social media
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विस्तार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने राकांपा प्रमुख शरद पवार के खिलाफ कथित आपत्तिजनक ट्वीट के लिए पिछले महीने गिरफ्तार 22 वर्षीय फार्मेसी छात्र को तत्काल जमानत देने से इनकार करते हुए सोमवार को कहा कि मौलिक अधिकार पूर्ण नहीं हैं। न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति एम एन जाधव की खंडपीठ नासिक निवासी निखिल भामरे द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में उनके खिलाफ दर्ज सभी पांच प्राथमिकी रद्द करने की मांग की गई थी।
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उसने यह भी प्रार्थना की कि उसकी याचिका लंबित रहने के दौरान उसे जेल से रिहा कर दिया जाए। भामरे के वकील अधिवक्ता सुभाष झा ने अदालत से कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि महाराष्ट्र जैसे राज्य में एक युवक के साथ ऐसा हो रहा है और हम लोकतंत्र में रह रहे हैं। पीठ ने कहा कि भामरे 22 साल के हैं और कहा कि इस उम्र में कुछ जिम्मेदारी होनी चाहिए।
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न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा कि हर नागरिक के मौलिक अधिकार हैं। लेकिन ये प्रतिबंधों के अधीन हैं। मौलिक अधिकार पूर्ण नहीं हैं। किसी को भी किसी और के निजी जीवन पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि किसी के पास अधिकार है इसका मतलब यह नहीं है कि वह बिना किसी प्रतिबंध के इस अधिकार का प्रयोग कर सकता है। पीठ ने राज्य सरकार को भामरे के खिलाफ जांच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
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इसके बाद अधिवक्ता झा ने अदालत से अपने मुवक्किल को जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित करने का अनुरोध किया। न्यायाधीशों ने हालांकि कहा कि इस तरह का आदेश सुनवाई की पहली तारीख को पारित नहीं किया जा सकता है। अदालत ने आगे की सुनवाई के लिए 10 जून की तारीख तय की।