फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   No treatment, for four hundred rupees then let go

कटे पैर को तकिया बनाने का मामला- इलाज किया नहीं, चार सौ रुपये लिए तब जाने दिया 

Mon, 12 Mar 2018 03:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी Updated Mon, 12 Mar 2018 03:36 AM IST
विज्ञापन
No treatment, for four hundred rupees then let go
hospital
युवक के कटे पैर को उसका तकिया बनाने के मामले की जांच में जो परतें खुल रही हैं, उसमें मेडिकल कॉलेज का शर्मसार करने वाला चेहरा उभरकर सामने आ रहा है। हादसे में पैर गंवाने वाले घनश्याम के परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में डॉक्टर उसका उपचार नहीं कर रहे थे। जब वह उसे लेकर प्राइवेट अस्पताल जाने लगे तो एक कर्मचारी ने उन्हें तब तक नहीं जाने दिया, जब तक उन्होंने उसे चार सौ रुपये रिश्वत नहीं दे दी। इस दौरान कर्मचारी ने उन्हें करीब एक घंटा रोके रखा।
विज्ञापन


शनिवार को सुबह घटना के बाद क्लीनर घनश्याम का पैर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। मऊरानीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उसका पैर काटकर अलग कर दिया गया था। हालत गंभीर देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। सूचना मिलते ही घायल के चाचा छविलाल व दीपक स्कूल मेमोरियल स्कूल के प्रधानाचार्य सीपी गुप्ता एंबुलेंस से घायल घनश्याम को सुबह करीब साढ़े दस बजे मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। यहां स्ट्रेचर पर उसका उपचार शुरू कर दिया गया था। 
विज्ञापन


बताया गया है कि ड्यूटी पर तैनात डा. प्रवीण सरावगी ने उपचार शुरू किया था और डॉ. आलोक ने खून का बहाव रोकने का इलाज शुरू किया था। घायल का कटा हुआ पैर उसकी पत्नी हेमवती के पास था। उनका आरोप है कि डाक्टरों ने एक पर्चा देकर बाहर से दवा लाने को कहा था। दवा लेने जाते समय हेमवती पैर को घनश्याम के स्ट्रेचर पर रखकर चली गई थी। वापस लौटने पर देखा तो कटा पैर घनश्याम के सिर के नीचे पैर रखा हुआ था। यह देखकर परिजन घबरा गए थे। लेकिन, किसी की हिम्मत नहीं हो सकी कि पैर हटा दें।
विज्ञापन
विज्ञापन


परिजनों का आरोप है कि पैर हटाने के लिए मौके पर मौजूद चिकित्सक व स्टाफ से कहा था, लेकिन किसी ने भी नहीं हटाया। करीब डेढ़ घंटे बाद एक अधिकारी के आने पर चिकित्सकों ने आनन-फानन में पैर को हटाकर हेमवती के सुपुर्द किया। इसके बाद मीडिया का जमावड़ा लगने के बाद चिकित्सकों ने उपचार करना बंद कर दिया। घनश्याम दर्द से तड़पता हुआ इलाज के लिए गुहार लगाने लगा, लेकिन किसी को भी उस पर रहम नहीं आया। 

मात्र दो इंजेक्शन लगाने के बाद ही चिकित्सकों ने इतिश्री कर ली थी। दर्द से तड़पता देख परिजन भी बेहाल हो उठे थे। इसके बाद प्राइवेट में ले जाने का फैसला किया। इसी बीच प्राइवेट में ले जाने के लिए वहां मौजूद एक कर्मचारी ने पांच सौ रुपये की मांग की। रुपये न होने के कारण करीब एक घंटे तक सभी रुके रहे। इसके बाद एक रिश्तेदार से चार सौ रुपये लेने के बाद कर्मचारी को देने के बाद ही चार बजे वह लोग मेडिकल से निकलकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचे।

आरोपी डाक्टरों और पीड़ित, उसके रिश्तेदारों के बयान दर्ज

झांसी। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में मरीज के कटे पैर को उसका तकिया बनाने के मामले में शासन की सख्ती के बाद जांच शुरू हो गई है। डीएम द्वारा गठित दो सदस्यीय और मेडिकल कॉलेज प्राचार्य द्वारा गठित पांच सदस्यीय कमेटी ने आरोपी डाक्टरों, नर्स समेत पीड़ित और उसके रिश्तेदारों से अलग-अलग बात करके रविवार को बयान दर्ज किए। 


सीएम ने की पीड़ित को दो लाख देने की घोषणा

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी मेडिकल कॉलेज में पैर कटने वाली घटना के पीड़ित घनश्याम को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। ये सहायता मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दी जाएगी। उन्होंने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे से 12 मार्च को पूरी घटना में हुई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट तलब की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed