अब सरकारी बाबू करेंगे ओला-उबर की सवारी
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सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने भारी-भरकम टैक्सी बिल में कटौती के लिए ऐप आधारित टैक्सी सेवा ओला और उबर की सेवा लेने की योजना बनाई है। ओला और उबर दोनों कंपनियां सरकार की ओर से विशेष दर पर सेवा मुहैया कराने के आए इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।
ये दोनों कंपनियां गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं। ओला अपने विशेष कॉरपोरेट आफरिंग के लिए विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से भी बात कर रही है। सरकारी खरीद में ज्यादा पारदर्शिता बरतने ने लिए पिछले माह जीईएम पोर्टल की शुरुआत की गई थी।
इसके जरिए विभिन्न मंत्रालय और विभाग अपनी जरूरत की चीजों को खरीदते हैं। एक अधिकारी के मुताबिक सरकार विभिन्न विभागों में वर्तमान खर्च में बचत की कोशिश कर रही है। कुछ विभागों में मासिक टैक्सी खर्च 40 हजार रुपये से अधिक है।
रास्ते की पूरी दूरी और स्पष्ट बिल मिल सकेगा
अधिकारी के मुताबिक इस बात पर सहमति बनी है कि ओला-उबर सरकार को मासिक बिल सौंपेंगे और साथ में सरकार के लिए किराये की दर में कोई बढ़ोतरी नहीं करेंगे। अधिकारी ने बताया कि विभिन्न विभागों को हर रोज टैक्सी की जरूरत होती है और अगर आप ओला-उबर की सेवा लेते हैं तो यह सस्ता पड़ेगा।
इससे रास्ते की पूरी दूरी और स्पष्ट बिल मिल सकेगा। सरकार क्षेत्र में टैक्सी सेवा की मांग तेजी से बढ़ रही है और ओला-उबर इस मौके को हाथ से निकलने देना नहीं चाहती।