बिड़ला-सहारा द्वारा मोदी को चंदा देने के आरोप पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
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बिना पुख्ता सबूत पेश किए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाने वाले एक गैर सरकारी संगठन की सुप्रीम कोर्ट ने जमकर खिंचाई की है।
न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ और न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन कॉमन काउज की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण से कहा हमारे लिए बहुत असहज सी स्थिति हो जाती है। हमने कहा था कि कोई पुख्ता प्रमाण पेश किया जाए, हम जरूर कार्रवाई करेंगे।
पीठ ने कहा कि अगर इस तरह का आरोप लगाएंगे तो उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन लोग कैसे काम करेंगे। वहीं प्रशांत भूषण ने बिरला और सहारा समूह के अधिकारियों के ईमेल का हवाला देते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उन्हें रिश्वत दी गई थी। इसके अलावा अन्य लोगों को भी रिश्वत दी गई थी।
शांति भूषण और राम जेठमलानी से पुख्ता सबूत लाने के लिए कहा गया था
भूषण ने कहा कि आयकर विभाग के अप्रैजल रिपोर्ट का चार भाग उन्हें मिला है जो दर्शाता है कि किस तरह हवाला के जरिए मोदी और अन्य मुख्यमंत्रियों तक पैसे पहुंचाए गए। इस पर पीठ ने कहा कि आप क्या कह रहे हैं, हमारी समझ से बाहर है।
पिछली सुनवाई में हमने शांति भूषण और राम जेठमलानी से पुख्ता सबूत लाने के लिए कहा था। जवाब में भूषण ने कहा कि उन्हें यह जानकारी थी कि सुनवाई 11 जनवरी को होनी है इसलिए वह अतिरिक्त हलफनामा दाखिल न कर सके।
इस पर पीठ ने कहा कि हमने 14 दिसंबर की तारीख निर्धारित कर दी थी। ऐसे में तारीख 11 जनवरी कैसे हो सकती है। पीठ ने कहा कि अगर एक बार तारीख तय हो गई तो भारत के प्रधान न्यायाधीश भी उसे नहीं बदल सकते। हालांकि पीठ ने भूषण को गुरुवार तक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।
याचिकाकर्ता संगठन ने कॉरपोरेट घरानों द्वारा मोदी समेत कुछ राजनेताओं को रिश्वत देने संबंधी आरोपों की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने से गुहार की है।