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Women Reservation Bill: किरेन रिजिजू बोले- महिला आरक्षण पर सभी दल सहमत, अब देरी ठीक नहीं
Tue, 14 Apr 2026 11:37 PM IST
Nirmal Kant
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Tue, 14 Apr 2026 11:37 PM IST
सार
महिला आरक्षण विधेयक पर बहस के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ किया कि इसका कोई राजनीतिक विरोध नहीं है और सभी दल सैद्धांतिक रूप से साथ हैं। उन्होंने कहा कि 40 साल के इंतजार के बाद अब और देरी महिलाओं के साथ अन्याय होगी। रिजिजू ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
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किरेन रिजिजू।
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
महिला आरक्षण विधेयक पर बहस जारी है। इस बीच, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को इस बात पर जोर दिया कि संसद और राज्यों की विधानसभाओं में इस विधेयक का कोई राजनीतिक विरोध नहीं है। हालांकि, कुछ बयान राजनीतिक मकसद से दिए जाते हैं। लेकिन असली मकसद पर सभी दल एक साथ हैं।
पत्रकारों से बात करते हुए रिरिजू ने कहा, मैं इस बात में नहीं जाना जाहता कि कौन पार्टी क्या कर रही है। संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण का कोई विरोध नहीं है। पिछली लोकसभा में जब नारी शक्ति कानून पारित हुआ था, तब भी किसी पार्टी ने विरोध नहीं किया था। इसलिए सिद्धांत और भावना दोनों ही दृष्टि से सभी एक साथ हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में हर पार्टी एक साथ थे।
रिजिजू ने आगे कहा कि अब और देरी करना ठीक नहीं होगा। फोकस महिलाओं को न्याय दिलाने पर केंद्रित होना चाहिए उन्होंने सभी दलों से राजनीति से ऊपर उठने की अपील की।
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'महिलाओं के लिए आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं'
केंद्रीय मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय हित में एकजुट होने के लिए सभी राजनीतिक दलों के प्रति आभार व्यक्त किया है। महिलाओं के लिए आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं हो सकता। हमने 40 साल इंतजार किया है। हम एक और साल या एक और दशक का इंतजार नहीं कर सकते। महिलाओं के लिए आरक्षण प्रक्रिया में और देरी करना बेहद कष्टदायक होगा।
संशोधित और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चर्चा होगी
उनकी यह टिप्पणी संसद के विशेष सत्र से पहले आई है, जिसमें 16-18 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चर्चा होगी। महिलाओं के लिए आरक्षण हेतु दोनों विधेयकों को सांविधानिक संशोधन के रूप में पारित करना आवश्यक है। मौजूदा स्थिति के अनुसार, ओबीसी आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। जबकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आरक्षण जारी रहेगा।
ये भी पढ़ें: महिला आरक्षण और परिसीमन पर सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष, खरगे की अगुवाई में कल होगी बड़ी बैठक
सूत्रो के मुताबिक, सरकार ने 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण अधिनियम लागू करने के अपने इरादे के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें से 815 सीटें राज्यों के लिए और शेष 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित हैं।
विपक्षी दलों ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चिंता जताई है और आरोप लगाया है कि इससे लोकसभा में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व सीमित हो जाएगा। विपक्षी दलों ने आम जनगणना से पहले विधेयक को जल्दबाजी में पेश करने पर भी आपत्ति जताई है।
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पत्रकारों से बात करते हुए रिरिजू ने कहा, मैं इस बात में नहीं जाना जाहता कि कौन पार्टी क्या कर रही है। संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण का कोई विरोध नहीं है। पिछली लोकसभा में जब नारी शक्ति कानून पारित हुआ था, तब भी किसी पार्टी ने विरोध नहीं किया था। इसलिए सिद्धांत और भावना दोनों ही दृष्टि से सभी एक साथ हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में हर पार्टी एक साथ थे।
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रिजिजू ने आगे कहा कि अब और देरी करना ठीक नहीं होगा। फोकस महिलाओं को न्याय दिलाने पर केंद्रित होना चाहिए उन्होंने सभी दलों से राजनीति से ऊपर उठने की अपील की।
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'महिलाओं के लिए आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं'
केंद्रीय मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय हित में एकजुट होने के लिए सभी राजनीतिक दलों के प्रति आभार व्यक्त किया है। महिलाओं के लिए आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं हो सकता। हमने 40 साल इंतजार किया है। हम एक और साल या एक और दशक का इंतजार नहीं कर सकते। महिलाओं के लिए आरक्षण प्रक्रिया में और देरी करना बेहद कष्टदायक होगा।
संशोधित और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चर्चा होगी
उनकी यह टिप्पणी संसद के विशेष सत्र से पहले आई है, जिसमें 16-18 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चर्चा होगी। महिलाओं के लिए आरक्षण हेतु दोनों विधेयकों को सांविधानिक संशोधन के रूप में पारित करना आवश्यक है। मौजूदा स्थिति के अनुसार, ओबीसी आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। जबकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आरक्षण जारी रहेगा।
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सूत्रो के मुताबिक, सरकार ने 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण अधिनियम लागू करने के अपने इरादे के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें से 815 सीटें राज्यों के लिए और शेष 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित हैं।
विपक्षी दलों ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चिंता जताई है और आरोप लगाया है कि इससे लोकसभा में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व सीमित हो जाएगा। विपक्षी दलों ने आम जनगणना से पहले विधेयक को जल्दबाजी में पेश करने पर भी आपत्ति जताई है।
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