मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की हवा तेज, TDP के बाद शिवसेना कर रही तैयारी
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मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश तेज हो गई है। संसद में विरोधियों के पास चुनौती ये है कि यह प्रस्ताव तब रखा जा सकता है जब इसके पक्ष में कम से कम 50 सांसद हों। ऐसे में वाईएसआर कांग्रेस की पहल पर टीडीपी ने भी एनडीए का साथ छोड़ दिया है तो अब खबर ये सामने आ रही है कि शिवसेना भी अपने सांसदों और पार्टी आलाकमान के साथ इस पर चर्चा करने के लिए बैठने वाली है। बता दें कि शिवसेना के पास 18 सांसद हैं।
Shiv Sena chief Uddhav Thackeray expected to hold a meeting with party MPs and senior leaders soon to decide stand on no confidence motion moved by TDP and YSRCP against Central Government pic.twitter.com/JZzJ9mKhTk
— ANI (@ANI) March 16, 2018विज्ञापन
मोदी सरकार के चार साल के कार्यकाल में पहली बार लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है। वाईएसआर कांग्रेस के 6 सांसदों की ओर से आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के सवाल पर गुरूवार को लोकसभा महासचिव को नोटिस दिया था। जिसके तुरंत बाद टीडीपी ने वाईएसआर के इस फैसला का स्वागत किया और आज सुबह एनडीए से अपना पूरी तरह नाता तोड़ लिया।
सबकी निगाहें कांग्रेस, टीएमसी समेत अन्य दलों के रुख पर है। वहीं शिवसेना भी अपने सांसदों के साथ बैठक में कोई बड़ा फैसला ले सकती है। अगर इस प्रस्ताव को जरूरी 50 सांसदों का साथ मिला तो अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो सकेगी।
अविश्वास प्रस्ताव पर समर्थन जुटाने के लिए वाईएसआर कांग्रेस ने कोशिश शुरू कर दी है। इस क्रम में पार्टी सांसदों ने बृहस्पतिवार को अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के साथ अपने पार्टी अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी का पत्र सौंपा। इस पत्र में आंध्रप्रदेश के खिलाफ कथित अन्याय पर साथ देने की अपील करते हुए कहा गया कि अगर विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिला तो पार्टी के सांसद सत्र के अंतिम दिन संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे।
मामला सीधे सीधे आंध्रप्रदेश की राजनीति से जुड़ा होने के कारण जहां टीडीपी प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए तैयार हो गई है, मगर कांग्रेस, टीएमसी सहित अन्य विपक्षी दल ऊहापोह में हैं। वहीं शिवसेना क्या फैसला लेती है ये बैठक के बाद ही पता चलेगा। कई दल ये तय नहीं कर पा रहे हैं कि एक क्षेत्रीय मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया जाए या नहीं। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल भी इस प्रस्ताव पर आज अंतिम निर्णय लेंगे।
कांग्रेस की दुविधा का कारण
वाईएसआर कांग्रेस के इस प्रस्ताव ने कांग्रेस की दुविधा बढ़ा दी है। उसे पता है कि इस प्रस्ताव का समर्थन करने के बाद पीएनबी घोटाले का मुद्दा दब जाएगा। इसके अलावा समय से पहले भाजपा को पता चल जाएगा कि किस दल का भविष्य में रुख किस प्रकार का हो सकता है। मगर चिंता का दूसरा पहलू विपक्षी एकता से जुड़ा है।
कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की मुहिम में जुटी है। ऐसे में इस प्रस्ताव से किनारा करने का भी उसे नुकसान उठाना होगा। ऐसे में अगर वाईएसआर कांग्रेस, टीडीपी के साथ कुछ और दल आए तो कांग्रेस प्रस्ताव का समर्थन करने पर मजबूर हो जाएगी।