मणिपुर हिंसा: छह मामलों में CBI ने अब तक नहीं की कोई गिरफ्तारी, अधिकारी बोले- जातीय आधार पर गवाह ढूंढना कठिन
Manipur Violence: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इन मामलों की जांच की नाजुक परिस्थितियों को देखते हुए इन्हें फिर से दर्ज करने के एक महीने बाद भी इन्हें सार्वजनिक नहीं किया है।
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मणिपुर में हिंसा से जुड़े छह मामलों की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया के अनुसार एजेंसी ने पिछले महीने राज्य पुलिस से प्राथमिकियां अपने हाथ में ले लीं थीं और जांच जारी है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इन मामलों की जांच की नाजुक परिस्थितियों को देखते हुए इन्हें फिर से दर्ज करने के एक महीने बाद भी इन्हें सार्वजनिक नहीं किया है। अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उसे भेजे गए छह मामलों की जांच के लिए जून में डीआईजी रैंक के एक अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।
उन्होंने कहा कि एजेंसी की टीमें कठिन परिस्थितियों में मामलों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें अक्सर शत्रुतापूर्ण भीड़, नाकाबंदी और विरोध का सामना करना पड़ता है और जातीय आधार पर राज्य में गवाहों को ढूंढना मुश्किल है।
उन्होंने कहा, 'सीबीआई ने अब तक मणिपुर हिंसा से संबंधित छह प्राथमिकियों के संबंध में किसी को गिरफ्तार नहीं किया है। जांच जारी है।' मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मैतई समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पूर्वोत्तर राज्य के पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया था, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी थी। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं।
इन झड़पों से पहले आरक्षित वन भूमि से कुकी ग्रामीणों को बेदखल करने को लेकर तनाव पैदा हो गया था, जिसके कारण कई छोटे आंदोलन हुए थे। मणिपुर की आबादी में मैतई समुदाय की हिस्सेदारी करीब 53 फीसदी है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। नगा और कुकी सहित आदिवासी आबादी का 40 फीसदी हिस्सा हैं और पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
निर्वस्त्र परेड की पीड़ित महिलाओं से मिली मणिपुर पुलिस
उधर, अधिकारियों ने बताया कि मणिपुर पुलिस उन दो महिलाओं के संपर्क में है, जिन्हें मई में निर्वस्त्र घुमाया गया था और फिर उनका कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया था। उन्होंने बताया कि राज्य में चार मई को हुई जातीय झड़पों से पैदा हुई स्थिति को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच के लिए महिला अधिकारियों और मणिपुर पुलिस के कर्मियों की एक टीम गठित की गई है।
अधिकारियों ने कहा कि टीम ने परिवार के सदस्यों के साथ-साथ दोनों महिलाओं से मुलाकात की और उनके बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि चश्मदीदों की पहचान करने और उनके बयान दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। नई दिल्ली में शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, यौन उत्पीड़न से संबंधित मामलों को सीबीआई को सौंपे जाने की संभावना है।
वायरल वीडियो मामले में लोगों की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) के प्रवक्ता गिंजा वुआलजोंग ने इसे 'बहुत कम, बहुत देर हो चुकी' करार दिया। उन्होंने कहा, 'अगर वीडियो वायरल होने से पहले दोषियों को गिरफ्तार कर लिया जाता तो मैं इसकी सराहना करता। प्राथमिकी 18 मई को दर्ज की गई थी। ऐसे और भी कई मामले हैं। यह कहने के बाद कि मैं यह भी स्पष्ट करना चाहूंगा कि लोगों को गिरफ्तार करने से राज्य के बड़े मुद्दों का समाधान नहीं होगा, जहां जातीय संघर्ष हो रहे हैं।'
उन्होंने कहा, 'मैं केंद्र से मणिपुर मुद्दे को गंभीरता से लेने और हिंसा को समाप्त करने के लिए कदम उठाने और समाधान के साथ आने का अनुरोध करता हूं।' पुलिस ने इस मामले में अब तक एक किशोर सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
मणिपुर में हालात भड़काने से बाज आए विपक्ष : भाजपा
इस बीच, भाजपा ने विपक्षी दलों के मणिपुर दौरे की आलोचना करते हुए कहा कि मणिपुर की स्थिति खराब करने से बाज आएं। पार्टी ने आरोप लगाया कि संसद में हंगामा के बाद अब राज्य में विपक्ष हंगामा कराने की ताक में है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर ने प्रसाद ने कहा कि उन्हें विपक्षी नेताओं के हिंसाग्रस्त मणिपुर जाने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें वहां स्थिति को भड़काना नहीं चाहिए। भाजपा के सांसद रवि किशन ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें पाकिस्तान और चीन भी जाना चाहिए, जहां उनकी बहुत मांग है। उन्होंने कहा कि संसद वाला तनाव वे वहां भी पैदा करना चाहते हैं। लेकिन मुद्दे की संवेदनशीलता को उन्हें समझना चाहिए। सांसद रामकृपाल यादव ने विपक्षी सांसदों के दौरे को नाटक बताया। उन्होंने कहा कि सदन में चर्चा से भागते रहे और अब स्थिति से लाभ उठाने की फिराक में हैं।
विपक्षी गठबंधन के बीस सांसदों का प्रतिनिधिमंडल करेगा राज्य का दौरा
वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया के बीस सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए इस सप्ताहांत में मणिपुर का दौरा करेगा और फिर हिंसा प्रभावित राज्य में समस्याओं के समाधान के लिए सरकार और संसद को सिफारिशें देगा। दौरे से पहले लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने मणिपुर में हिंसा की उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में जांच कराने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी और गौरव गोगोई, तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव, झामुमो की महुआ माजी, द्रमुक की कनिमोई, राकांपा के मोहम्मद फैजल, रालोद के जयंत चौधरी, राजद के मनोज कुमार झा, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन और वीसीके के टी थिरुमावलवन शामिल होंगे। जदयू प्रमुख राजीव रंजन (ललन) सिंह, अनील प्रसाद हेगड़े (जदयू), भाकपा के संतोष कुमार, माकपा के एए रहीम, समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान, आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर, आप के सुशील गुप्ता, अरविंद सावंत (शिवसेना-उद्धव ठाकरे), डी रविकुमार (द्रमुक) और फूलो देवी नेताम (कांग्रेस) भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे।
मणिपुर हिंसा में विदेशी एजेंसियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे
पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एम एम नरवणे ने शुक्रवार को कहा कि मणिपुर हिंसा में विदेशी एजेंसियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्यों में अस्थिरता देश की समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खराब है। वह 'राष्ट्रीय सुरक्षा परिप्रेक्ष्य' विषय पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा पर सवालों का जवाब दे रहे थे।
जनरल (सेवानिवृत्त) नरवणे ने कहा, 'मुझे यकीन है कि जो लोग कुर्सी पर हैं और जो भी कार्रवाई की जानी है, उसे करने के लिए जिम्मेदार हैं, वे अपना सर्वश्रेष्ठ कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'न केवल मैं कहता हूं कि इसमें विदेशी एजेंसियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है, बल्कि मैं कहूंगा कि वे निश्चित रूप से वहां हैं, विशेष रूप से विभिन्न विद्रोही समूहों को चीनी सहायता मिल रही।' पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि चीनी सहायता वर्षों से इन समूहों की मदद कर रही है और अब भी करती रहेगी।
कहीं भी महिलाओं के खिलाफ अपराध शर्मनाक: केरल के राज्यपाल
मणिपुर में दो महिलाओं के साथ अमानवीय घटना पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शुक्रवार को कहा कि सिर्फ मणिपुर ही नहीं बल्कि कहीं भी महिलाओं के खिलाफ अपराध शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि असली चुनौती यह है कि इसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा रही है या नहीं... लोगों को तभी भरोसा होगा जब एजेंसियां उचित कार्रवाई करें और मुझे लगता है कि मणिपुर में जांच एजेंसियां कार्रवाई करही हैं।