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योजना: गोशाला अर्थव्यवस्था पर काम कर रहा नीति आयोग, छुट्टा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए हो रही तैयारी

Thu, 14 Apr 2022 09:59 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 14 Apr 2022 09:59 PM IST
सार

रमेश चंद ने कहा कि गोशाला अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावना पर हम गौर कर रहे हैं...हम गाय के गोबर से बनने उत्पादों में कुछ वैल्यू एडिशन करने या वैल्यू बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।

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Niti working on gaushala economy to address stray cattle issue says its member
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : istock

विस्तार

गोशाला अर्थव्यवस्था के सुधार का इच्छुक सरकारी थिंक-टैंक नीति आयोग गाय के गोबर को वाणिज्यिक इस्तेमाल में सक्षम बनाने के लिए एक रोडमैप पर काम कर रहा। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद का कहना है कि इससे छुट्टा पशुओं की समस्या से निपटा जा सकेगा। आयोग ने आर्थिक थिंक-टैंक एनसीएईआर को गोशाला की अर्थव्यवस्था पर एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा है।  

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रमेश चंद ने कहा कि गोशाला अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावना पर हम गौर कर रहे हैं...हम गाय के गोबर से बनने उत्पादों में कुछ वैल्यू एडिशन करने या वैल्यू बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं। चंद के नेतृत्व में सरकारी अधिकारियों की एक टीम ने उत्तर प्रदेश में वृंदावन, राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों में बड़ी गौशालाओं का दौरा किया और उनकी स्थिति का पता लगाया। 
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उन्होंने कहा कि 10 या 15 फीसदी गाएं बहुत कम दूध देती हैं, जिससे श्रम, चारा और इलाज आदि का खर्च भी नहीं निकलता है। गाय के गोबर का इस्तेमाल बायो-सीएनजी बनाने में किया जा सकता है...इसलिए हम इस तरह की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। मालिकों द्वारा छुट्टा कर दिए गए पशुओं का मुद्दा हाल ही में संपन्न उत्तर प्रदेश चुनाव में गूंजा था। उन्होंने गाय के गोबर से बायो-सीएनजी बनाने के फायदे भी गिनाएं। 
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उन्होंने कहा कि इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा और हम इसका इस्तेमाल ऊर्जा के तौर पर करेंगे जोकि हमें रिटर्न भी देगा। प्रमुख कृषि अर्थशास्त्री का कहना है कि छुट्टा पशु फसलों के लिए भी नुकसानदेह है, इसलिए हम गोशाला अर्थव्यवस्था पर काम कर रहे हैं। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के अनुसार, भारत में 19.25 करोड़ पशु और 10.99 करोड़ भैंस थी जोकि गोजातीय जनसंख्या को 30.23 करोड़ तक ले गए।  

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