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सीतारमण का निर्देश, निजी कंपनियों की लाइसेंस-टैक्स चिंताएं दूर करें अधिकारी

Sun, 29 Oct 2017 07:36 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
टीम डिजिटल/अमर उजाला Updated Sun, 29 Oct 2017 07:36 AM IST
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Nirmala Sitharaman assures defence firms over licensing, tax concerns

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सैन्य साजो सामान बनाने वाली शीर्ष कंपनियों की लाइसेंस और टैक्स से जुड़ी चिंताएं दूर करें। निर्मला ने दोहराया कि सरकार रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 

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सीतारमण ने सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के क्रियान्वयन से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के प्रतिनिधियों से चर्चा की। इसमें सैन्य साजो सामान बनाने वाली शीर्ष भारतीय और विदेशी कंपनियों के अधिकारी भी शामिल थे।

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रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, रक्षा मंत्री ने रक्षा सचिव की अध्यक्षता वाली अधिकारियों की टीम को निर्देश दिया कि वे इस चर्चा के दौरान उठे प्रमुख मुद्दों पर समयबद्ध कार्रवाई करें। इनमें गृह मंत्रालय के साथ लाइसेंस के प्रस्ताव, वित्त मंत्रालय के साथ टैक्स संबंधी मामले और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे।

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बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें लाइसेंस से संबंधित मामले, कर एवं शुल्क और खरीददारी प्रक्रिया तेज करने के रास्तों पर चर्चा हुई। अधिकारियों के अनुसार, रक्षा क्षेत्र से संबंधित निजी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से सीतारमण ने कहा कि सरकार उनके मार्ग की सभी बाधाओं को दूर करने और रक्षा निर्माण में निजी भागीदारी की सुविधा देने के लिए ‘पूरी तरह प्रतिबद्ध’ है। 

 

रक्षा क्षेत्र में बड़ा विदेशी निवेश  लाना चाहती है सरकार...
सरकार का उद्देश्य इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विदेश निवेश लाना है। निर्मला ने कहा कि सरकार की यह पहल देश की रक्षा जरूरतें पूरी करने के लिए आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने की खातिर है।

 

इसके लिए सरकार निजी कंपनियों को समान अवसर उपलब्ध कराएगी। सीतारमण ने अधिकारियों को खरीद प्रस्तावों को समय से निपटाने को कहा। इस साल मई में सरकार ने अपना सामरिक साझेदारी मॉडल पेश किया था।


 

इसमें चुनी हुई निजी कंपनियों को विदेशी साझेदारों के साथ मिलकर भारत में सैन्य साजो सामान बनाने की इजाजत देना शामिल था। ये कंपनियां पनडुब्बी और फाइटर जेट का निर्माण भी कर सकती हैं। 

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