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फांसी के खिलाफ अपील पर सुनवाई अब छह माह में ही, सुप्रीम कोर्ट ने तय की नई गाइडलाइन

Sat, 15 Feb 2020 05:34 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Sat, 15 Feb 2020 05:34 AM IST
सार

कानूनी दांव पेचों के इस्तेमाल से निर्भया के गुनहगारों की फांसी में हो रही देरी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में मौत की सजा के खिलाफ अपीलों की जल्द सुनवाई के लिए दिशानिर्देश तय कर दिए हैं।

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Nirbhaya Case : Hearing on appeal against hanging in six months, Supreme Court sets new guidelines
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

कानूनी दांव पेचों के इस्तेमाल से निर्भया के गुनहगारों की फांसी में हो रही देरी के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में मौत की सजा के खिलाफ अपीलों की जल्द सुनवाई के लिए दिशानिर्देश तय कर दिए हैं। शीर्ष अदालत ने मौत की सजा के मामले में हाईकोर्ट के फैसले के छह माह के भीतर अपील पर सुनवाई तय कर दी है।

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शुक्रवार को सामने आए सुप्रीम कोर्ट के एक सर्कुलर में कहा गया है कि किसी मामले में जब हाईकोर्ट मौत की सजा की पुष्टि करता है या उसे बरकरार रखता है और सुप्रीम कोर्ट उस पर सुनवाई की अपनी सहमति जताता है तो इस आपराधिक अपील पर सहमति की तारीख से छह माह के भीतर मामले को शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा, भले ही यह अपील तैयार हो पाई हो या नहीं।
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गाइडलाइन के मुताबिक, मौत की सजा के मामले में जैसे ही सुप्रीम कोर्ट विशेष अनुमति याचिका दाखिल की जाती है, तो सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री मामले के सूचीबद्ध होने की सूचना मौत की सजा सुनाने वाली अदालत को देगी। इसके 60 दिनों के भीतर केस संबंधी सारा मूल रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट भेजा जाएगा या जो समय अदालत तय करे उस अवधि में ये रिकॉर्ड देने हाेंगे। अगर इस संबंध में कोई अतिरिक्त दस्तावेज या स्थानीय भाषा के दस्तावेजों का अनुवाद देना है तो वह भी देना होगा।
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पक्षकारों को 30 दिन की और मिल सकती है मोहलत
सर्कुलर में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने की सूचना के बाद रजिस्ट्री पक्षकारों को अतिरिक्त दस्तावेज कोर्ट में देने के लिए 30 दिन का और समय दे सकती है। अगर तय समय में अतिरिक्त दस्तावेज देने की यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो मामले को रजिस्ट्रार के पास जाने से पहले जज के चैंबर में सूचीबद्ध किया जाएगा और फिर जज इस संबंध में आदेश जारी करेंगे। सर्कुलर 12 फरवरी को ही जारी हुआ था, जो अब सामने आया है।


केंद्र सरकार ने की थी गाइडलाइन तय करने की मांग
निर्भया के गुनहगारों की फांसी में हो रही देरी को देखते हुए इस साल 22 जनवरी को केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। गृह मंत्रालय ने अपनी याचिका में यह मांग की थी कि मौत की सजा पर सुधारात्मक याचिका दाखिल करने के लिए समयसीमा तय की जाए। मौजूदा नियमों के मुताबिक, किसी भी दोषी की कोई भी याचिका लंबित होने पर उस केस से जुड़े बाकी दोषियों को भी फांसी नहीं दी जा सकती।  

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