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NIA: दाऊद-छोटा शकील सहित तीन अन्य आतंकियों के खिलाफ टेरर फंडिंग मामले में चार्जशीट पेश, एनआईए की कार्रवाई
Sat, 05 Nov 2022 09:14 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 05 Nov 2022 09:14 PM IST
सार
एनआईए ने बताया कि जांच के दौरान पाया गया है कि एक आतंकवादी गिरोह और एक संगठित अपराध सिंडिकेट डी-कंपनी के सदस्यों ने विभिन्न प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देकर गिरोह की आपराधिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की साजिश रची थी। इन आरोपियों ने लोगों को धमकाकर भारी मात्रा में धन उगाही, वसूली और उगाही की थी।
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दाऊद इब्राहिम
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
डी-कंपनी और डॉन दाऊद इब्राहिम के टेरर फंडिंग मामले से संबंधित मामले में एनआईए ने 3 गिरफ्तार आतंकियों आरिफ अबुबकर शेख, शब्बीर अबुबकर शेख और मोहम्मद सलीम कुरैशी उर्फ सलीम फ्रूट और 2 वांछित आरोपियों दाऊद इब्राहिम कास्कर और शकील शेख उर्फ छोटा शकील के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। एनआईए ने शनिवार को इस बारे में जानकारी दी।
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एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, ये सभी आतंकी गतिविधियों के लिए धन की व्यवस्था करने का आरोपी हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि इन सभी आरोपियों के खिलाफ मामला गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।
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एनआईए ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों अबुबकर शेख, शब्बीर अबुबकर शेख और मोहम्मद सलीम कुरैशी उर्फ सलीम फ्रूट को मुंबई और भारत के अन्य हिस्सों में आतंक पैदा करने के लिए हवाला चैनलों के माध्यम से, विदेश में स्थित फरार/वांछित अभियुक्तों से सनसनीखेज आतंकवादी कारनामों को ट्रिगर करने के लिए भारी मात्रा में धन प्राप्त हुआ। एनआईए ने बताया कि ये सभी आतंक फैलाने के लिए विभिन्न माध्यमों से वसूली करते थे। जांच एजेंसी ने बताया है कि मामले में अभी जांच जारी है।
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एनआईए ने बताया कि जांच के दौरान पाया गया है कि एक आतंकवादी गिरोह और एक संगठित अपराध सिंडिकेट डी-कंपनी के सदस्यों ने विभिन्न प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देकर गिरोह की आपराधिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की साजिश रची थी। इन आरोपियों ने लोगों को धमकाकर भारी मात्रा में धन उगाही, वसूली और उगाही की थी। जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि वसूली गई रकम का प्रयोग अपने आतंकी उद्देश्यों और भारत की सुरक्षा को खतरे में डालने और आम जनता के मन में आतंक पैदा करने के कामों में किया गया था।