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अदानी की कंपनी पर एनजीटी ने लगाया 5 करोड़ रुपये का जुर्माना

Tue, 23 Aug 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली,
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली, Updated Tue, 23 Aug 2016 11:37 PM IST
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NGT imposed a fine of Rs 5 crore on Adani's company
तट पर प्रदूषण के लिए एनजीटी ने लगाया 100 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना
समुद्री तटीय इलाकों में जहाजों से माल ढोने के दौरान प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल  (एनजीटी) ने कड़ा फैसला सुनाया है। एनजीटी ने पनामा स्थित डेल्टा शिपिंग मरीन सर्विसेज और उसकी कतर स्थित दो सहयोगी कंपनी डेल्टा नेविगेशन डब्ल्यूएलएल और डेल्टा ग्रुप इंटरनेशनल पर 100 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाया है। इन कंपनियों के जरिए 2011 में माल ढ़ोने के दौरान मुंबई तट पर प्रदूषण फैलाया गया। इससे समुद्र का पारिस्थितिकी तंत्र को क्षति पहुंची। 
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वहीं एनजीटी ने अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड को समुद्री तट पर 60054 टन कोल डंप करने के लिए 5 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाया है। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को याची समीर मेहता के मामले में 223 पृष्ठों का विस्तृत फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि सभी कंपनियां पर्यावरण क्षतिपूर्ति की  राशि केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय को देंगीं। 
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एनजीटी ने यह फैसला कई सुनवाई व पेश की गई रिपोर्ट पर गौर करने के बाद दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक इन जहाजों से जो ईंधन ढ़ोया जा रहा था उसका रिसाव समुद्र में हुआ। इससे समुद्र की पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हुई। पीठ ने यह भी गौर किया कि यह कंपनियां समुद्री क्षेत्र के पर्यावरण और पारिस्थितिकी को लेकर बिल्कुल ही लापरवाह हैं। पीठ ने कहा कि मरीन पर रहने वाली आबादी के लिए यह बेहद ही चिंता का विषय हैं। 
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एनजीटी ने तटों पर पड़े जहाजों के माल और मलबे को हटाने के लिए विभिन्न आयामों से जांच-परख करने को एक समिति का भी गठन किया है। पीठ ने कहा कि समिति एक महीने के भीतर इस संबंध में रिपोर्ट भी तैयार करे कि इन मलबे को हटाकर कहां ले जाया जा सकता है। रिपोर्ट आने के बाद छह महीने के भीतर सभी चार फर्मों को अपना मलबा हटाना होगा। 


मुंबई स्थित याची व पर्यावरणविद् समीर मेहता का आरोप था कि डेल्टा समूह के जरिए 4 अगस्त 2011 को मुंबई तट पर यह प्रदूषण फैलाया गया। वहीं पीठ ने भी अपनी टिप्पणी में कहा है कि यह चार फर्मों के जरिए नजरअंदाजी का एक स्पष्ट और सीधा मामला है। यह दुर्घटनावश किया गया काम नहीं है। मालूम हो कि वर्ष भर पहले मुंबई तट पर जहाज के जरिए तेल का रिसाव समुद्र में होने पर एक बड़ी घटना हुई थी। 
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