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एनजीटी ने राज्य सरकारों से पूछा, डीजल बसें कब तक सीएनजी में होंगी तब्दील?

Thu, 15 Dec 2016 10:32 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 15 Dec 2016 10:32 PM IST
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NGT asked the state governments, how long will convert diesel buses to CNG ?

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली, यूपी, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और राजस्थान सरकार से पूछा है कि दिल्ली के आनंद विहार और गाजियाबाद (यूपी) के कौशांबी बस अड्डे पर खड़ी होने वाली सरकारी डीजल बसों को सीएनजी में क्यों तब्दील नहीं किया जा रहा। 

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प्रधान पीठ ने सभी राज्यों से तीन दिनों में अगले छह महीने और एक साल के भीतर सीएनजी बसों के लिए कार्ययोजना के संबंध में जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले पर अगली सुनवाई 23 दिसंबर को होगी।        
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहस्पतिवार को कौशांबी रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (कारवा) के मामले पर यह आदेश दिया। पीठ का यह आदेश तब आया जब संबंधित मामले में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि संबंधित बस अड्डों पर मानक से अधिक वायु प्रदूषण है।

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पर्टिकुलेट मैटर 10 का स्तर तय मानक से करीब दो गुना ज्यादा है

NGT asked the state governments, how long will convert diesel buses to CNG ?

मसलन पर्टिकुलेट मैटर 10 का स्तर तय मानक से करीब दो गुना ज्यादा है। वहीं यूपीपीसीबी ने बताया कि विभिन्न राज्यों की आने वाली डीजल बसें और वातावरण में घुली धूल के कारण यह प्रदूषण है। साथ ही हलफनामे के मुताबिक आनंद विहार और कौशांबी बस अड्डे के इर्दगिर्द रिहायशी इलाकों में वायु प्रदूषण तय मानकों से कहीं अधिक है। 

इसके बाद पीठ ने विभिन्न राज्यों की ओर से बस अड्डे पर सेवाएं देने वाली सरकारी डीजल बसों का ब्यौरा मांगा। साथ ही कहा कि संबंधित राज्य डीजल बसों को सीएनजी में तब्दील करने संबंधी कार्ययोजना के बारे में ट्रिब्यूनल को बताएं। पीठ ने इस संबंध में वायु प्रदूषण के मुख्य मामले वर्धमान कौशिक में सभी राज्यों से सीएनजी बसों के लिए कार्ययोजना पेश करने को कहा था।      

कारवा के अध्यक्ष विनय मित्तल ने बताया कि कारवा की ओर से पीआईएल एनजीटी में डाली गई थी। याची ने आरोप लगाया है कि आदेश के बावजूद अभी तक कौशांबी बस अड्डे के पास अवैध तरीके से अतिक्रमण मौजूद है। साथ ही प्राधिकरणों की ओर से अभी तक ध्वनि नियंत्रण के लिए बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं।

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