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10वीं और 12वीं कक्षा के सभी बोर्ड्स के प्रश्न पत्र होंगे समान

Fri, 05 Aug 2016 08:11 AM IST
सीमा शर्मा/ अमर उजाला, दिल्ली
सीमा शर्मा/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 05 Aug 2016 08:11 AM IST
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Next year onward 10 and 12th board papers will similar
यूपी बोर्ड परीक्षा
अगले वर्ष से सीबीएसई और प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं और 12वीं कक्षा का प्रश्न पत्र एक समान होगा। इसपर केंद्र सरकार को राज्यों को साथ मिल गया है। देशभर की स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए सीबीएसई और प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड मिलकर दसवीं और 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम समेत प्रश्न पत्र का खाका तैयार करेंगे। स्कूली शिक्षा और साक्षरता के विभिन्न विषयों पर अमर उजाला संवाददाता सीमा शर्मा से मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूली शिक्षा व साक्षरता सचिव डॉ. सुभाष चंद्र खुंटिया से बातचीत की। पेश है उनसे की गई बातचीत के अंश:
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प्रश्न : बोर्ड परीक्षा में रिजल्ट व कटऑफ सुधारने के लिए किस प्रकार से काम हो रहा है ? 
उत्तर: बोर्ड परीक्षा में रिजल्ट सुधारने के लिए पहली बार सीबीएसई और प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड मिलकर काम करेंगे। देशभर के राज्यों के बोर्ड के साथ केंद्र सरकार की एक बैठक हो चुकी है और  दूसरी सितंबर या अक्तूबर में आयोजित होगी, जिसमें खाका तैयार किया जाएगा। केंद्र और राज्यों की सांझा कमेटी पाठ्यक्रम एक समान करने के साथ समान प्रश्न पत्र का खाका तैयार करेगी। इसमें प्रश्न पत्र एक ही होगा लेकिन उसके सैट अलग-अलग तैयार किए जाएंगे। इससे न तो किसी बोर्ड में अधिक नंबर आ सकेंगे और न ही किसी बोर्ड का रिजल्ट खराब होगा। साथ ही बिहार में नकल जैसी जैसी समस्या से भी छुटकारा
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मिल जाएगा। 

प्रश्न : नो डिटेंशन पॉलिसी पर राज्यों का सऋाथ मिलने पर सरकार इस योजना को खत्म करने पर विचार कर रही है या नहीं ? 
उत्तर : बेशक 22 से अधिक राज्यों ने आरटीई के तहत नो डिटेंशन पॉलिसी को खत्म करने की मांग रखी है। नो डिटेंशन पर दो प्रकार से कानूनी राय ली जा रही है। पहला आरटीई एक्ट में बदलाव या फिर उसके बगैर नो डिटेंशन पॉलिसी को हटाना। नो डिटेंशन पॉलिसी के चलते पांच साल पहले आठवीं कक्षा तक ड्रॉप आउट छात्रों की संख्या तीन करोड़ थी, वह अब 60.64 लाख रह गयी है। हालांकि ड्राप आउट का आंकड़ा जीरो तो नहीं हो सकता है, लेकिन फिर भी बहुत ज्यादा है। इसलिए राज्यों को तारगेट दिया गया है कि यह आंकड़ा आधा किया जाए। 
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एनसीटीई की भी इस साल से रैटिंग होगी

Next year onward 10 and 12th board papers will similar
यूपी बोर्ड की परीक्षा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
प्रश्न: स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने और शिक्षकों में सुधार के लिए कोई खास योजना तैयार की गयी है? 
उत्तर: उच्च शिक्षण संस्थानों (विश्वविद्यालयों और आईआईटी) में नेक एक्रीडेशन के साथ नेशनल रेटिंग की तर्ज पर अब एनसीटीई (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) की भी इस साल से रैटिंग होगी। देशभर में बीएड के जो कॉलेज गली-मौहल्लों में खुल गए हैं, उन पर लगाम लग जाएगी। क्योंकि नैक की टीम जब देशभर के बीएड कॉलेजों में जांच करेगी तो कमियां सामने आ जाएंगी। जो बीएड कॉलेज नेशनल रैकिंग में शामिल नहीं होंगे, वहां से निकले छात्रों को आगे उक्त बीएड और एमएड की डिग्री के आधार पर नौकरी नहीं मिलेगी। जब छात्रों को डिग्री मिलने के बाद भी नौकरी नहीं मिलेगी तो वे ऐसे बीएड कॉलेज में दाखिला लेना ही बंद कर देंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि अब वहीं बीएड कॉलेज छात्रों को शिक्षक बनाने की डिग्री दे सकेंगे, जो खुद अपनी रैंकिंग रखते होंगे। 

प्रश्न : बच्चों को कुपोषण से बचाने और स्कूलों से जोड़ने के लिए मिड डे मील में किस प्रकार से सुधार किया जा रहा है? 
उत्तर :
यूनीसेफ की रिपोर्ट में भी कई राज्यों में कुपोषण की रिपोर्ट दर्ज हुई है। इसके लिए राज्यों से बात की जा रही है कि वे मिड-डे-मील में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाए। एम्स के डॉक्टरों की टीम ने मिड-डे-मील के मैन्यू में सुधार के लिए जो रिपोर्ट दी है, उस पर विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं। अंडा शामिल होगा या नहीं, इस पर अभी कोई राय नहीं बनी है। हालांकि ऐसा मैन्यू तैयार होगा, ताकि कुपोषण की समस्या खत्म हो सके। 
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