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मानसून सत्र में नई नवेली दिखेगी 88 वर्ष पुरानी संसद, आधुनिक तकनीकों से तीन महीनों में हुई सफाई

Sat, 14 Jul 2018 06:03 AM IST
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 14 Jul 2018 06:03 AM IST
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Newly seen in the monsoon session 88 years old Parliament

संसद का मानसून सत्र जब 18 जुलाई से शुरू होगा तो सांसदों को संसद भवन की इमारत नई-नई सी लगेगी। 88 साल पुराने लाल पत्थरों से बने संसद भवन की पहली बार आमूल चूल सफाई जो हुई है। केंद्रीय सार्वजनिक निर्माण विभाग (सीपीडब्लूडी) ने तीन महीने के अथक प्रयासों और नवीनतम तकनीक के इस्तेमाल से संसद भवन की सफाई की है। इसमें वाटर जेट, स्टीम जेट और माइक्रो सैंड ब्लास्टिंग जैसी तकनीकों का प्रयोग किया गया। टूटे हुए पत्थरों और टाइलों को बदल दिया गया है।

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दरअसल, धूल, मिट्टी, धुआं और खाने-पीने की सामग्री से पत्थर इतने गंदे हो गए थे कि कई स्थानों पर लाल की जगह कत्थई या भूरे दिखने लगे थे। इंजीनियरों ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को बताया कि गंदगी से पत्थरों में मौजूद छोटे-छोटे छेद बंद हो गए हैं और वे सांस नहीं ले पा रहे हैं। प्रदूषित हवा में मौजूद सल्फर डाइ आक्साइड इससे उनका क्षरण हो रहा है। महाजन ने इमारत की सफाई करने के आदेश दिए। उनका कहना था देश में एक ही संसद भवन है और वह भव्यतम दिखना चाहिए।
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सीपीडब्लूडी ने इन्हें साफ करने के तरीके, तकनीक और खर्च का पता लगाया। संसद भवन एक संरक्षित इमारत होने की वजह से इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इनटैक) के एक्सपर्ट्स की सलाह ली। सफाई करने में किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया। बस साबुन बनाने में लगने वाले लिक्विड अमोनिया और टीपोल का उपयोग हुआ है। पहले पानी के तेज जेट से पत्थरों को साफ किया गया। जो पत्थर साफ नहीं हो पाए उन्हें अमोनिया और चीपोल के घोल से धोने के बाद स्टीम जेट से साफ किया गया।
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जिद्दी दागों पर सैंड माइक्रो ब्लास्टिंग तकनीक का उपयोग किया गया। इसमें पत्थरों पर मशीन द्वारा जेट से मोटी रेत का प्रहार किया जाता है। सेंट्रल हॉल और लोकसभा हॉल का भी नवीनीकरण हुआ। 1975 में बने मुख्य स्वागत कक्ष को दिव्यांगों के लिए सुगम बनाया गया। साथ ही महिला कर्मियों की सुविधा के लिए नए पुस्तकालय भवन में एक आधुनिक शिशुगृह (क्रेच) बनाया गया है।

Newly seen in the monsoon session 88 years old Parliament

स्थापत्यकला का नमूना
कोलकाता से देश की राजधानी दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद कुछ समय विधायक पुराने सचिवालय में बैठते थे। संसद भवन की नींव 12 फरवरी 1921 को ड्यूक ऑफ कनाट ने रखी थी। इसे बनने में 83 लाख रुपये लगे थे और यह 6 वर्ष में तैयार हो पाई थी। इसे मशहूर वास्तुविद लुटियन ने डिजाइन किया था और सर हर्बर्ट बेकर की देखरेख में तैयार हुआ।

अपने अद्भुत खंभों और गोलाकार बरामदों के कारण ही यह पुर्तगाली स्थापत्यकला का अद्भुत नमूना भी कहलाता है। इस भवन का विधिवत उद्घाटन 18 जनवरी 1927 को भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन ने किया था।

गोलाकार आकार में निर्मित संसद भवन का व्यास 170.69 मीटर है। इसकी परिधि आधा किमी से अधिक है जो 536.33 मीटर है और करीब 6 एकड़ में फैला हुआ है। संसद भवन के पहले तल का गलियारा 144 खंभों पर टिका हुआ है जिसके हर खंभे की लंबाई 27 फीट है। पूरे भवन में 12 दरवाजे हैं और एक मुख्य द्वार है।

लोकसभा का कक्ष 4800 वर्ग फीट में बना है। संसद के केंद्रीय कक्ष के गुंबद का व्यास 98 फीट है। इसे विश्व के महत्वपूर्ण गुंबदों में एक का दर्जा भी हासिल है। इसी हाल में 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों ने भारतीयों को सत्ता सौंपी थी। 

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