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मोदी जैसी रणनीति बनाएंगी माया, भाजपा को हराने के लिए नई तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो /नई दिल्ली
Updated Sat, 20 Aug 2016 01:28 AM IST
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मायावती
- फोटो : amar ujala
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रविवार 21 अगस्त को ताज नगरी आगरा में होने वाली बसपा प्रमुख मायावती की रैली पर भाजपा की पैनी नजर गड़ी हुई है। भाजपा की रणनीति माया की रैली का आंकलन कर उसका माकूल जवाब देने की है। क्योंकि बीते लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से मात खाने वाली मायावती ने भाजपा से मुकाबला करने के लिए पीएम मोदी के नक्शेकदम को ही अपना राजनीतिक औजार बनाया है। अक्सर चुनाव प्रचार देर से शुरू करने वाली मायावती भाजपा की राह रोकने के लिए अपना चुनावी अभियान इस दफे जल्दी शुरू कर रही हैं।
यही नहीं बीते लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी ने जिस तरह से बड़ी-बड़ी रैलियों के जरिए देश के राजनीतिक माहौल को अपने पक्ष में भूनाया था। ठीक उसी तरह बड़ी रैलियों के जरिए मायावती यूपी के राजनीतिक जमीन पर दोबरा से अपना कब्जा जमाने में जुटी हैं। बसपा प्रमुख अपनी मेगा रैलियों का सिलसिला रविवार को आगरा से शुरू कर रही हैं।
पीएम मोदी ने भी लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान यूपी में अपने प्रचार का अभियान आगरा की रैली से शुरू किया था। माया ने नारे भी मोदी सरीखे दिए हैं। मोदी के सबका साथ सबका विकास पर मायावती सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय को असरदार बनाना चाहती हैं।
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भीड़ के मामले में भी माया की तैयारी भाजपा पर भारी पडने की है। ताकि जनमानस में वह संदेश दे सकें की यूपी में अब भी उनका जलवा कायम है। लेकिन माया का अंदाज बेशक मोदी सरीखा है। मगर सोशल इंजिनियरिंग के मामले में वह मोदी से अलग हैं। भाजपा ने हिंदूत्व और विकास के मुद्दे के जरिए सारे चुनावी गणीत को फेल करते हुए यूपी में सभी वर्गों का समर्थन पाया था। किंतु माया की सोशल इंजिनियरिंग में दलित और मुस्लिम (डीएम ) फैक्टर हावी है।
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यही नहीं बीते लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी ने जिस तरह से बड़ी-बड़ी रैलियों के जरिए देश के राजनीतिक माहौल को अपने पक्ष में भूनाया था। ठीक उसी तरह बड़ी रैलियों के जरिए मायावती यूपी के राजनीतिक जमीन पर दोबरा से अपना कब्जा जमाने में जुटी हैं। बसपा प्रमुख अपनी मेगा रैलियों का सिलसिला रविवार को आगरा से शुरू कर रही हैं।
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पीएम मोदी ने भी लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान यूपी में अपने प्रचार का अभियान आगरा की रैली से शुरू किया था। माया ने नारे भी मोदी सरीखे दिए हैं। मोदी के सबका साथ सबका विकास पर मायावती सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय को असरदार बनाना चाहती हैं।
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भीड़ के मामले में भी माया की तैयारी भाजपा पर भारी पडने की है। ताकि जनमानस में वह संदेश दे सकें की यूपी में अब भी उनका जलवा कायम है। लेकिन माया का अंदाज बेशक मोदी सरीखा है। मगर सोशल इंजिनियरिंग के मामले में वह मोदी से अलग हैं। भाजपा ने हिंदूत्व और विकास के मुद्दे के जरिए सारे चुनावी गणीत को फेल करते हुए यूपी में सभी वर्गों का समर्थन पाया था। किंतु माया की सोशल इंजिनियरिंग में दलित और मुस्लिम (डीएम ) फैक्टर हावी है।
डीएम फैक्टर का रखा ध्यान
मायावती
- फोटो : amar ujala
मायावती ने अपनी मेगा रैलियों के आयोजन स्थल के चयन में डीएम फैक्टर का विशेष ख्याल रखा है। आगरा के बाद मायावती की अगले महीने आजमगढ़, इलाहाबाद और सहारनपुर में रैलियां प्रस्तावित हैं। ये चारों क्षेत्र ऐसे हैं जहां दलित और मुस्लिम गठजोर सियासी रूप से सभी दलों पर भारी है। माया ने इन रैलियों की कमान अपने विश्वसनिय नसीमुद्दीन सिद्दकी को दी है। बताया जा रहा है कि डीएम फैक्टर को परवान पर चढ़ाने के लिए मायावती हर चार प्रत्याशी के बाद एक प्रत्याशी मुस्लिम वर्ग के व्यक्ति को बनाएगी।
उधर गौरक्षा बनाम दलित मामले का विवाद बढने के बाद भाजपा भी बैकफूट पर है। दलितों की नाराजगी को देखते हुए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को बीते दिनों अपना आगरा का कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था। यही वजह है कि भाजपा की नजर अब माया की आगरा रैली पर टिक गई है। यदि माया भीड़ के मामले में जलवा बिखेरने में सफल रहती हैं। तो भाजपा को नए सिरे से अपनी रणनीति तय करनी पडेगी और यदि माया का जलवा फेल रहा तो उनपर भाजपा की ओर से सियासी हमले तेज होंगे।
उधर गौरक्षा बनाम दलित मामले का विवाद बढने के बाद भाजपा भी बैकफूट पर है। दलितों की नाराजगी को देखते हुए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को बीते दिनों अपना आगरा का कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था। यही वजह है कि भाजपा की नजर अब माया की आगरा रैली पर टिक गई है। यदि माया भीड़ के मामले में जलवा बिखेरने में सफल रहती हैं। तो भाजपा को नए सिरे से अपनी रणनीति तय करनी पडेगी और यदि माया का जलवा फेल रहा तो उनपर भाजपा की ओर से सियासी हमले तेज होंगे।