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IB Chief: 'सूचना युद्ध' के बीच खुफिया ऑपरेशन चलाने के विशेषज्ञ हैं नए आईबी चीफ, ISI के हर पैंतरे से हैं वाकिफ
सार
भारत के नए आईबी चीफ महेश दीक्षित आज के डिजिटल समय में चल रहे संचार युद्ध से अच्छी तरह वाकिफ हैं और इससे निपटने के विशेषज्ञ माने जाते हैं। नए आईबी चीफ को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के दांवपेचों का भी जानकार माना जाता है।
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नए आईबी चीफ महेश दीक्षित
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी महेश दीक्षित को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) का अगला निदेशक नियुक्त किया है। आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आईपीएस दीक्षित फिलहाल आईबी में ही बतौर स्पेशल डायरेक्टर काम कर रहे हैं। 2019 में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने से पहले की तैयारी और उसके बाद राज्य के माहौल को शांत रखने में दीक्षित की विशेष भूमिका रही है। डिजिटल दुनिया में 'सूचना युद्ध' के बीच 'खुफिया ऑपरेशन' को किस तरह से आगे बढ़ाना है, इसमें वे पारंगत माने जाते हैं। सोशल मीडिया में फर्जी संदेशों के द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा या कानून व्यवस्था को जोखिम में डालना, इस तरह की घटनाओं से निपटना उन्हें अच्छे से आता है।
घाटी में पत्थरबाजी पर लगाम कसने में निभाई भूमिका
महेश दीक्षित के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में खासतौर पर राह भटके युवाओं को मुख्य धारा में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार और जेएंडके प्रशासन के बीच एक कड़ी के तौर पर काम किया था। घाटी में पत्थरबाजों को समझाकर उन्हें आतंकी एवं कट्टरपंथी संगठनों से दूर करने में दीक्षित को पूरी सफलता मिली। यही वजह रही है कि अब घाटी में पत्थरबाजी की कोई घटना नहीं होती। दूसरा, ऐसे युवक जो भटक कर पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों में भर्ती हो जाते थे, वे अब कानूनी दायरे में रह रहे हैं। जेएंडके में मौजूदा समय की बात करें तो वहां लोकल आतंकियों की संख्या अब दस से कम रह गई है। लगभग चार दर्जन आतंकी जो विभिन्न हिस्सों में छिपे हैं, वे सीमा पार से आए हुए हैं।
आईएसआई के दुष्प्रचार फैलाने के तरीकों से वाकिफ
विदेश या फिर देश के भीतर से गलत सूचनाएं फैलाने वालों से निपटना नए आईबी चीफ बखूबी जानते हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' के उन तौर तरीकों से वे अच्छी तरह वाकिफ हैं, जिनके द्वारा पड़ोसी मुल्क, भारत में दुष्प्रचार कर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाता है। सूचना युद्ध और इसकी चुनौतियां कौन सी हैं, दीक्षित इसे अच्छे से समझते हैं। पाकिस्तानी एजेंसी 'आईएसआई' किसी भी बड़ी घटना में अप्रत्यक्ष तौर पर किस तरह शामिल होती है, लोगों को कैसे गुमराह कर भड़काया जाता है, सीमा पार के संचार तंत्र की मदद से देश में अशांति फैलाने का प्रयास होता है, इनसे निपटने में दीक्षित मास्टर कहे जाते हैं। 2023 में जी20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक जब श्रीनगर में आयोजित करने की बात सामने आई तो कई तरह की शंकाएं देखने को मिली थी। दीक्षित की प्लानिंग के तहत वह आयोजन भी सफलतापूर्वक संपन्न हो गया था।
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दुनिया की टॉप 'सीक्रेट' एजेंसियों में 'इंटेलिजेंस ब्यूरो' को शामिल कराना, इसे दीक्षित के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी माना जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि 'आईबी' की कार्यपद्धति, सतर्कता, सक्रियता, निर्णायक भूमिका निभाना और यश लेने के समय किसी और को आगे करने की त्याग व समर्पण की एक परंपरा ने अभी तक देश को सुरक्षित रखा हुआ है।10 साल में आसूचना ब्यूरो की तत्परता, तीक्षणा और परिणाम लाने की क्षमता में काफी सुधार हुआ है। आधुनिक चुनौतियों के सामने कठिन परिस्थितियों में विगत छह साल में आसूचना ब्यूरो ने देश को सुरक्षित रखा है।
सरकार ने बढ़ाया है आईबी का बजट
इस बार के केंद्रीय बजट में आईबी के लिए आवंटित धनराशि में 2889 करोड़ रुपये का इजाफा किया गया है। 2023-24 में आईबी का बजट 3,268.94 करोड़ रुपये था तो वहीं 2024-25 में यह बजट 3,823.83 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह बजट 3893.35 करोड़ रुपये था। इस बार के बजट में आईबी के लिए 6782.43 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। हाईब्रिड आतंकवाद, मल्टी एजेंसी सेंटर 'मैक' को जिला स्तर तक ले जाना, सभी एजेंसियों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान प्रदान, एआई का इस्तेमाल और नई तकनीक, इन पर महेश दीक्षित का फोकस रहेगा। मैक के जरिए आतंकवाद, संगठित अपराध और साइबर हमलों जैसे गंभीर खतरों से निपटने के लिए डेटा एनालिटिक्स की गुणवत्ता में सुधार और ट्रेंड एनालिसिस को सटीक बनाया जाएगा।
हॉट स्पॉट की मैपिंग, टाइम लाइन एनालिसिस, प्रेडिक्टिव और ऑपरेशन आउटकम का दायरा बढ़ाने की योजना, दीक्षित के कार्यकाल में गति पकड़ सकती है। इंटेलिजेंस फ्यूजन सेंटर (आईएफसी) में गुणात्मक और संख्यात्मक, दोनों तरह के बदलाव किए गए हैं। इस पर 500 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। द्वीपीय हिस्से, उग्रवाद प्रभावित और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में स्टैंडअलोन सुरक्षित नेटवर्क बढ़ाने का काम, आतंकवाद के वित्तपोषण और क्रिप्टो जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए नई तकनीक और समन्वित अप्रोच पर काम, इन पर तेजी से काम होने की उम्मीद है।
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घाटी में पत्थरबाजी पर लगाम कसने में निभाई भूमिका
महेश दीक्षित के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में खासतौर पर राह भटके युवाओं को मुख्य धारा में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार और जेएंडके प्रशासन के बीच एक कड़ी के तौर पर काम किया था। घाटी में पत्थरबाजों को समझाकर उन्हें आतंकी एवं कट्टरपंथी संगठनों से दूर करने में दीक्षित को पूरी सफलता मिली। यही वजह रही है कि अब घाटी में पत्थरबाजी की कोई घटना नहीं होती। दूसरा, ऐसे युवक जो भटक कर पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों में भर्ती हो जाते थे, वे अब कानूनी दायरे में रह रहे हैं। जेएंडके में मौजूदा समय की बात करें तो वहां लोकल आतंकियों की संख्या अब दस से कम रह गई है। लगभग चार दर्जन आतंकी जो विभिन्न हिस्सों में छिपे हैं, वे सीमा पार से आए हुए हैं।
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आईएसआई के दुष्प्रचार फैलाने के तरीकों से वाकिफ
विदेश या फिर देश के भीतर से गलत सूचनाएं फैलाने वालों से निपटना नए आईबी चीफ बखूबी जानते हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' के उन तौर तरीकों से वे अच्छी तरह वाकिफ हैं, जिनके द्वारा पड़ोसी मुल्क, भारत में दुष्प्रचार कर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाता है। सूचना युद्ध और इसकी चुनौतियां कौन सी हैं, दीक्षित इसे अच्छे से समझते हैं। पाकिस्तानी एजेंसी 'आईएसआई' किसी भी बड़ी घटना में अप्रत्यक्ष तौर पर किस तरह शामिल होती है, लोगों को कैसे गुमराह कर भड़काया जाता है, सीमा पार के संचार तंत्र की मदद से देश में अशांति फैलाने का प्रयास होता है, इनसे निपटने में दीक्षित मास्टर कहे जाते हैं। 2023 में जी20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक जब श्रीनगर में आयोजित करने की बात सामने आई तो कई तरह की शंकाएं देखने को मिली थी। दीक्षित की प्लानिंग के तहत वह आयोजन भी सफलतापूर्वक संपन्न हो गया था।
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दुनिया की टॉप 'सीक्रेट' एजेंसियों में 'इंटेलिजेंस ब्यूरो' को शामिल कराना, इसे दीक्षित के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी माना जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि 'आईबी' की कार्यपद्धति, सतर्कता, सक्रियता, निर्णायक भूमिका निभाना और यश लेने के समय किसी और को आगे करने की त्याग व समर्पण की एक परंपरा ने अभी तक देश को सुरक्षित रखा हुआ है।10 साल में आसूचना ब्यूरो की तत्परता, तीक्षणा और परिणाम लाने की क्षमता में काफी सुधार हुआ है। आधुनिक चुनौतियों के सामने कठिन परिस्थितियों में विगत छह साल में आसूचना ब्यूरो ने देश को सुरक्षित रखा है।
सरकार ने बढ़ाया है आईबी का बजट
इस बार के केंद्रीय बजट में आईबी के लिए आवंटित धनराशि में 2889 करोड़ रुपये का इजाफा किया गया है। 2023-24 में आईबी का बजट 3,268.94 करोड़ रुपये था तो वहीं 2024-25 में यह बजट 3,823.83 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह बजट 3893.35 करोड़ रुपये था। इस बार के बजट में आईबी के लिए 6782.43 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। हाईब्रिड आतंकवाद, मल्टी एजेंसी सेंटर 'मैक' को जिला स्तर तक ले जाना, सभी एजेंसियों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान प्रदान, एआई का इस्तेमाल और नई तकनीक, इन पर महेश दीक्षित का फोकस रहेगा। मैक के जरिए आतंकवाद, संगठित अपराध और साइबर हमलों जैसे गंभीर खतरों से निपटने के लिए डेटा एनालिटिक्स की गुणवत्ता में सुधार और ट्रेंड एनालिसिस को सटीक बनाया जाएगा।
हॉट स्पॉट की मैपिंग, टाइम लाइन एनालिसिस, प्रेडिक्टिव और ऑपरेशन आउटकम का दायरा बढ़ाने की योजना, दीक्षित के कार्यकाल में गति पकड़ सकती है। इंटेलिजेंस फ्यूजन सेंटर (आईएफसी) में गुणात्मक और संख्यात्मक, दोनों तरह के बदलाव किए गए हैं। इस पर 500 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। द्वीपीय हिस्से, उग्रवाद प्रभावित और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में स्टैंडअलोन सुरक्षित नेटवर्क बढ़ाने का काम, आतंकवाद के वित्तपोषण और क्रिप्टो जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए नई तकनीक और समन्वित अप्रोच पर काम, इन पर तेजी से काम होने की उम्मीद है।