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Hindi News ›   India News ›   New Future of Indo-China Relationship, Border dispute will not come to war

भारत-चीन रिश्ते का नया भविष्य, सीमा विवाद पर नहीं आएगी युद्ध की नौबत

Sat, 28 Apr 2018 10:30 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 28 Apr 2018 10:30 PM IST
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New Future of Indo-China Relationship, Border dispute will not come to war

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच यहां दो दिवसीय अनौपचारिक शिखर वार्ता में दोकलम जैसी स्थिति से बचने के लिए सीमा पर तनाव घटाने पर सहमति बनी है। इसके तहत दोनों देशों के बीच संवाद और भरोसा बढ़ाने के लिए सेनाओं को रणनीतिक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा दोनों में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर सहमति बनी और अफगानिस्तान में संयुक्त आर्थिक परियोजना शुरू करने का भी फैसला किया गया। इससे पहले दोनों शीर्ष नेताओं ने ईस्ट लेक के किनारे टहलने और नौकायन के दौरान विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। इसके बाद पीएम मोदी के सम्मान में लंच का आयोजन भी किया गया। मोदी शनिवार को स्वदेश लौट आए हैं। 

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इस बार नया क्या

- पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग किसी राष्ट्राध्यक्ष के स्वागत के लिए बीजिंग से बाहर निकले।
- अफगानिस्तान में संयुक्त आर्थिक परियोजना पर बनी सहमति। दोनों देशों की साथ में पहली परियोजना।

अब आगे क्या होगा

- संवाद और भरोसा बढ़ाने के लिए सेना को सामरिक दिशा-निर्देशों से सीमा पर घटेगा तनाव। 
- चीन ओबीओआर पर भारत के नरम रुख के बदले संयुक्त राष्ट्र में जैश सरगना मसूद अजहर पर बदल सकता है अपना रुख।
- सीमा विवाद निपटाने में विशेष प्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ाने पर दोनों के बीच सहमति से बढ़ेगा अधिकारी स्तर का संवाद।
- मोदी ने कारोबार संतुलन पर दिया जोर। भारत से चीन को कृषि उत्पादों और दवाइयों का निर्यात बढ़ सकता है। 
- बढ़ सकती हैं अनौपचारिक वार्ता। ऐसी ही वार्ता के लिए मोदी के निमंत्रण पर जिनपिंग ने दिया सकारात्मक जवाब। 

सूचनाएं साझा करने का तंत्र मजबूत करने के दिए निर्देश 

New Future of Indo-China Relationship, Border dispute will not come to war

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत आर्थिक वैश्वीकरण की रीढ़ हैं। लिहाजा, दोनों को वैश्विक शांति और विकास में सहयोग करना चाहिए। उन्हें अच्छे पड़ोसी और दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए। मोदी ने कहा कि भारत-चीन सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर जिनपिंग से बातचीत हुई। हमने आर्थिक संबंधों को गति देने के साथ ही दोनों देशों के व्यक्ति से व्यक्ति संबंधों पर चर्चा की। विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि दोनों शीर्ष नेताओं ने भारत-चीन सीमा के सभी क्षेत्रों में शांति और सद्भाव बरकरार रखने पर जोर दिया। दोनों के बीच अफगानिस्तान में संयुक्त आर्थिक परियोजना शुरू करने पर सहमति बन गई है। अब दोनों पक्षों के अधिकारी अगले दौर की बातचीत में तय करेंगे कि यह परियोजना अफगानिस्तान में किस जगह और कैसी होगी।  

गोखले ने बताया, ‘मोदी-जिनपिंग ने सीमा विवाद प्रबंधन को प्रभावी बनाने और सीमा क्षेत्रों में अप्रिय हालात से बचने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए।’ दोनों शीर्ष नेताओं ने विश्वास बहाली के लिए अपनी सेनाओं को साझा व बराबरी की सुरक्षा का सिद्घांत, सीमा क्षेत्रों में टकराव टालने के लिए मौजूदा संस्थागत तंत्र व सूचनाएं साझा करने के तंत्र को मजबूत करने जैसे मानकों को लागू करने के निर्देश दिए। 

सीमा विवाद निपटाने वाले प्रतिनिधियों के काम की सराहना

अनौपचारिक बातचीत में मोदी-जिनपिंग ने सीमा विवाद से निपटने के लिए न्यायपूर्ण, तर्कसंगत और स्वीकार्य समाधान खोजने वाले विशेष प्रतिनिधियों के अब तक के काम की तारीफ की। अब तक भारत-चीन के बीच सीमा विवादों को निपटाने के लिए 20 दौर की बातचीत हो चुकी है। गोखले ने बताया, ‘शीर्ष नेताओं का मानना है कि दोनों देश बातचीत के जरिये अपने मतभेद सुलझाने में सक्षम हैं। साथ ही दोनों देश एक-दूसरे की संवेदनाओं, चिंताओं और महत्वाकांक्षाओं का सम्मान करेंगे।’

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आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग को लेकर बनी सहमति 

New Future of Indo-China Relationship, Border dispute will not come to war

गोखले के मुताबिक, मोदी-जिनपिंग ने माना कि दोनों देशों के क्षेत्रीय व वैश्विक हित एक-दूसरे से जुड़े हैं। मजबूत रणनीतिक संवाद से संबंध मजबूत होंगे और दोनों देश क्षेत्रीय व वैश्विक स्थायित्व में सहयोग कर पाएंगे। दोनों पक्षों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्घता जताई। हालांकि, दोनों ओर से जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर सीधे कोई बात नहीं हुई। गौरतलब है कि चीन संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किए जाने पर बार-बार अड़ंगा डाल रहा है। 

कारोबार संतुलन पर रहा मोदी का जोर

मोदी-जिनपिंग ने अनौपचारिक बातचीत में माना कि दोनों देशों के बीच संतुलित और दीर्घकालिक कारोबार होना चाहिए। इस दौरान मोदी ने कारोबार में संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने जिनपिंग को भारत से चीन को कृषि उत्पादों व दवाइयों के निर्यात की संभावनाओं के बारे में बताया। दोनों के बीच पर्यावरणीय बदलावों, दीर्घकालिक विकास और खाद्य सुरक्षा पर भी बात हुई।

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