NEW CJI: चंद्रचूड़ होंगे देश के 50 वें CJI, पिता के बाद बेटे का भी सीजेआई बनना बिरला उदाहरण, जानें सब कुछ
सीजेआई ललित का कार्यकाल 8 नवंबर 2022 को समाप्त हो रहा है। वे मात्र 74 दिन इस पर पद रहेंगे। जस्टिस ललित 26 अगस्त 2022 को सीजेआई एनवी रमण का कार्यकाल पूरा होने के बाद देश के 49वें प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे।
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जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ देश के 50 वें प्रधान न्यायाधीश CJI होंगे। निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने आज सरकार को चंद्रचूड़ का नाम अपने उत्तराधिकारी के रूप में भेज दिया। सीजेआई ललित अगले माह सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
सीजेआई यूयू ललित ने आज सुबह 10.15 बजे सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को जजेस लाउंज में आमंत्रित किया और अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस चंद्रचूड़ के नाम की सिफारिश की जानकारी दी। उन्होंने सरकार को भेजे पत्र की प्रतिलिपि जस्टिस चंद्रचूड़ को सौंपी।
सरकार ने 7 अक्तूबर को सीजेआई ललित को पत्र लिखकर अपने उत्तराधिकारी की सिफारिश करने का अनुरोध किया था। जस्टिस चंद्रचूड़ 9 नवंबर 2022 को पदभार संभालेंगे। वरिष्ठता सूची के अनुसार जस्टिस चंद्रचूड़ मौजूदा सीजेआई ललित के बाद सबसे वरिष्ठ हैं, इसलिए तय परंपरा के अनुसार उन्हीं के नाम की सिफारिश की गई।
Chief Justice of India UU Lalit recommends the name of Justice DY Chandrachud (in file pic) as his successor.
Justice Chandrachud to become the 50th CJI. Chief Justice UU Lalit is retiring on November 8 this year. pic.twitter.com/p0OymLfp0n
— ANI (@ANI) October 11, 2022
8 नवंबर को रिटायर होंगे सीजेआई ललित
सीजेआई ललित का कार्यकाल 8 नवंबर 2022 को समाप्त हो रहा है। वे मात्र 74 दिन इस पर पद रहेंगे। जस्टिस ललित 26 अगस्त 2022 को सीजेआई एनवी रमण का कार्यकाल पूरा होने के बाद देश के 49वें प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे। उनका कार्यकाल मात्र ढाई माह का है, जबकि उनके पूर्व प्रधान न्यायाधीशों का औसत कार्यकाल 1.5 साल का रहा है। जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2024 को रिटायर होंगे। यानी वे दो साल तक देश के प्रधान न्यायाधीश रहेंगे। उन्हें 2016 में सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
पिता वाईवी चंद्रचूड़ 16 वें प्रधान न्यायाधीश थे, वे सबसे लंबे समय तक सीजेआई रहे थे
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ वाईवी चंद्रचूड़ देश के 16वें चीफ जस्टिस थे। वाईवी चंद्रचूड़ 22 फरवरी 1978 से 11 जुलाई 1985 तक करीब सात साल रहा। यह किसी सीजेआई को अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल है। पिता के रिटायर होने के 37 साल बाद उनके बेटे जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सीजेआई बनने जा रहे हैं। यह सुप्रीम कोर्ट के भी इतिहास का पहला उदाहरण है कि पिता के बाद बेटा भी सीजेआई बनेगा।
विवाहेतर संबंधों पर पलट दिया पिता का ही फैसला
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के फैसले चर्चित रहे हैं। इनमें वर्ष 2018 में विवाहेतर संबंधों (व्याभिचार कानून) को खारिज करने वाला फैसला शामिल है। 1985 में तत्कालीन सीजेआई वाईवी चंद्रचूड़ की पीठ ने सौमित्र विष्णु मामले में भादंवि की धारा 497 को कायम रखते हुए कहा था कि संबंध बनाने के लिए फुसलाने वाला पुरुष होता है न कि महिला। वहीं, डीवाई चंद्रचूड ने 2018 के फैसले में 497 को खारिज करते हुए कहा था 'व्याभिचार कानून महिलाओं का पक्षधर लगता है लेकिन असल में यह महिला विरोधी है। शादीशुदा संबंध में पति-पत्नी दोनों की एक बराबर जिम्मेदारी है, फिर अकेली पत्नी पति से ज्यादा क्यों सहे? व्याभिचार पर दंडात्मक प्रावधान संविधान के तहत समानता के अधिकार का परोक्ष रूप से उल्लंघन है क्योंकि यह विवाहित पुरुष और विवाहित महिलाओं से अलग-अलग बर्ताव करता है।'