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पांच किमी दूर ड्रोन का सफाया: भारत ने तैयार किया 30 किलोवाट का खतरनाक लेजर हथियार, जानें कब शुरू होगा निर्माण
Wed, 23 Sep 2026 05:56 AM IST
प्रशांत तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Wed, 23 Sep 2026 05:56 AM IST
सार
डीआरडीओ ने 30 किलोवाट क्षमता वाले काउंटर-ड्रोन लेजर हथियार का विकास और निर्माण पूरा कर लिया है। ट्रक-माउंटेड यह सिस्टम करीब 5 किलोमीटर तक ड्रोन स्वार्म, फिक्स्ड-विंग यूएवी और सर्विलांस सेंसर को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। लेजर प्रकाश की गति से हमला करता है और लगातार बिजली मिलने पर बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है। अगले छह महीने में इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी है।
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काउंटर-ड्रोन लेजर वेपन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
मानवरहित हवाई वाहनों यानी ड्रोन से बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 30 किलोवाट क्षमता वाले अपने सबसे शक्तिशाली काउंटर-ड्रोन लेजर वेपन के निर्माण और विकास का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब अगले छह महीने के भीतर इस स्वदेशी लेजर हथियार प्रणाली के बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी की जा रही है।
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ड्रोन के झुंड को एक साथ बना सकता है निशाना
यह ट्रक पर लगाया जाने वाला लेजर सिस्टम है, जो करीब 5 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद दुश्मन के ड्रोन स्वार्म यानी ड्रोन के झुंड को निशाना बना सकता है। इसके अलावा फिक्स्ड-विंग यूएवी और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सर्विलांस सेंसर भी इसकी जद में आ सकते हैं। यानी आसमान में एक साथ कई छोटे ड्रोन भारतीय ठिकानों की तरफ बढ़ें, तो यह सिस्टम उन्हें रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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मिसाइल नहीं, सीधे रोशनी की रफ्तार से हमला
इस लेजर हथियार की सबसे खास बात इसका हमला करने का तरीका है। पारंपरिक मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने में कुछ समय लगता है, लेकिन लेजर बीम प्रकाश की गति से लक्ष्य की तरफ जाती है। ऐसे में निशाना बनने वाले ड्रोन को प्रतिक्रिया देने या रास्ता बदलकर बच निकलने का बेहद कम मौका मिलता है।
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बिजली मिलती रहे तो लगातार कर सकता है फायर
लेजर हथियार की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसे हर हमले के बाद नई मिसाइल की तरह अलग से गोला-बारूद नहीं चाहिए। जब तक सिस्टम को जरूरी बिजली मिलती रहती है, यह लगातार लक्ष्य पर हमला कर सकता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में आने वाले ड्रोन के खिलाफ ऐसी तकनीक को खास तौर पर उपयोगी माना जाता है।
सस्ते ड्रोन के खिलाफ महंगी मिसाइल का खर्च बड़ी चुनौती
इस तकनीक की जरूरत को हालिया संघर्षों के संदर्भ में भी समझा जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर और कुछ हालिया संघर्षों में सस्ते ड्रोन का इस्तेमाल भारतीय हवाई रक्षा ठिकानों की निगरानी और उनकी स्थिति का पता लगाने के लिए किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में कम कीमत वाले ड्रोन को नष्ट करने के लिए करोड़ों रुपये की महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल करना हर बार आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं हो सकता।
इसलिए लेजर हथियार पर बढ़ा जोर
यही वह जगह है जहां काउंटर-ड्रोन लेजर सिस्टम की अहमियत बढ़ जाती है। एक तरफ यह तेजी से लक्ष्य पर हमला कर सकता है, वहीं दूसरी तरफ ड्रोन के खिलाफ हर बार महंगी मिसाइल खर्च करने की जरूरत को कम करने की क्षमता रखता है। खासकर तब, जब सामने एक-दो नहीं बल्कि बड़ी संख्या में ड्रोन का झुंड हो।
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छह महीने में बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी
डीआरडीओ के इस स्वदेशी 30 किलोवाट लेजर हथियार के विकास और निर्माण का काम पूरा होने के बाद अब अगले चरण में इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी है। यदि तय योजना के मुताबिक काम आगे बढ़ता है तो अगले छह महीने के भीतर इसके उत्पादन की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इससे भारतीय रक्षा बलों के पास ड्रोन खतरों से निपटने के लिए एक और स्वदेशी विकल्प उपलब्ध हो सकेगा।