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दुनिया के सातवें अजूबे की देख-रेख में लापरवाही, दरक रहे पत्थर
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 23 Jun 2016 04:31 AM IST
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ताजमहल के पत्थर दरक रहे हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल की देख-रेख में लापरवाही के कारण ही आए दिन पत्थर टूटकर गिर रहे हैं। सरकार के खजाने में ताजमहल की टिकटों की बिक्री से ही सालाना 100 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच रहे हैं, लेकिन संगमरमरी ताजमहल के संरक्षण पर महज 1.25 करोड़ रुपये ही सालाना खर्च किए जा रहे हैं। यही वजह है कि 364 साल पुरानी इमारत में संरक्षण पर खर्च न करने से ताज के पत्थर दरकने लगे हैं।
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हर साल 65 लाख सैलानियों को आकर्षित कर रहे ताजमहल से कमाई पर तो सरकार की नजर है, लेकिन इसकी देखरेख में जबरदस्त लापरवाही बरती जा रही है। ताजमहल पर मंगलवार को पत्थर टूटकर गिर गया तो इससे पहले पूर्वी गेट पर सरहिंदी बेगम बुर्ज का पत्थर निकल गया। यही नहीं, ताजमहल की मीनार पर लगा पिनेकल तक टूट चुका है।
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ताजमहल में दो दर्जन से ज्यादा पत्थर ऐसे हैं जो चटक चुके हैं और कभी भी गिर सकते हैं। संस्कृति मंत्रालय ताजमहल के संरक्षण और रखरखाव के नाम पर 16 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा करता है, लेकिन हकीकत में स्मारक की इमारत पर केवल एक से डेढ़ करोड़ रुपये ही सालाना खर्च किए जाते हैं। पर्यटन सुविधाओं और सुरक्षा पर हो रहे खर्च को भी मंत्रालय संरक्षण में जोड़कर हर साल बजट बढ़ाने का दावा कर अपनी कमजोरी छिपा रहा है।
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इस साल हुए संरक्षण के काम
काम बजट
ताज रॉयल गेट का संरक्षण 10.97 लाख
दक्षिणी दीवार का मेंटेनेंस 7.74 लाख
सहेली बुर्ज, फतेहपुरी मस्जिद 11.23 लाख
साउथ ईस्ट मीनार का संरक्षण 16.19 लाख
‘ताजमहल पर बंदर काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। ढीले पत्थरों को हिलाने और मीनारों पर उछलकूद, लटकने से नुकसान हो रहा है। स्मारक की लगातार जांच की जाती है, लेकिन बंदरों को पकड़ने के लिए पत्र लिखने के बाद भी नगर निगम ने कोई कदम नहीं उठाया’
डा. भुवन विक्रम, अधीक्षण पुरातत्वविद