नीरव गिरफ्तार तो हुआ पर मिल सकती है माल्या जैसी जमानत, जानिए ब्रिटेन की प्रत्यर्पण प्रक्रिया
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पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में 13 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोपी भगोड़ा नीरव मोदी गिरफ्तार तो हो गया है लेकिन वह कब तक पुलिस की हिरासत में रहेगा इस पर संशय है। माना जा रहा है कि नीरव को भी विजय माल्या की तरह ही जमानत मिल सकती है।
नीरव मोदी को मंगलवार को लंदन में गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी भगोड़े हीरा कारोबारी को भारत लाने के प्रयासों के चलते हुई। नीरव की गिरफ्तारी लंदन की वेस्टमिंस्टर अदालत द्वारा अरेस्ट वारंट जारी करने के अगले ही दिन हो गई। अदालत ने यह फैसला मनी लांड्रिंग केस में नीरव के प्रत्यर्पण के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा किए गए अनुरोध पर लिया था।
मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने अपने बयान में कहा, 'नीरव मोदी को मंगलवार को भारतीय अधिकारियों की ओर से हॉलबॉर्न में गिरफ्तार किया गया था। उसे बुधवार को वेस्टमिंस्टर कोर्ट में पेश किया जाएगा।'
इसलिए है जमानत की उम्मीद
माना जा रहा है कि नीरव मोदी की गिरफ्तारी प्रत्यर्पण वारंट पर की गई है, जिसका विवरण वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने पेश होने पर स्पष्ट हो जाएगा। गिरफ्तारी के बाद नीरव मोदी को वेस्टमिंस्टर कोर्ट में जिला जज के सामने पेश किया जाएगा, जहां उस पर औपचारिक रूप से आरोप लगाए जाएंगे। इसके बाद उसे जमानत मिलने की उम्मीद है।
इसके बाद मामला यह मामला वैसा ही हो जाएगा जैसा शराब कारोबारी विजय माल्या की गिरफ्तारी में हुआ था। विजय माल्या को प्रत्यर्पण वारंट पर ही अप्रैल 2017 में धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह तब से जमानत पर है।
63 वर्षीय शराब कारोबारी ने तब से एक आवेदन किया है जिसमें ब्रिटेन के गृह सचिव साजिद जाविद द्वारा जारी किए प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील की थी। जाविद ने इस महीने की शुरुआत में नीरव मोदी के लिए भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को प्रमाणित किया था। इसके साथ ही अदालतों में कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई, जिसका परिणाम नीरव के खिलाफ वारंट जारी होने से हुई।
नीरव ने शुरू किया है नया कारोबार
माना जाता है कि नीरव मोदी पिछले साल लंदन आया था। भारतीय अधिकारियों ने फरवरी 2018 में उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया था, इसके बावजूद वह कम से कम चार बार इंग्लैंड से बाहर गया। समाचारों के अनुसार लंदन में रहने के दौरान कुछ समय वह ओल्ड बांड स्ट्रीट पर अपने जूलरी शोरूम 'नीरव मोदी' के ऊपर रहा था।
अब माना जा रहा है कि मोदी ने अपना नया व्यवसाय शुरू किया है, इसके तहत नीरव ने खुद को ब्रिटेन के कंपनी हाउस रजिस्टर में घड़ियों और ज्वैलरी के थोक व्यापारी और विशेष स्टोर में खुदरा व्यापारी के रूप में पंजीकृत है।
यह है ब्रिटेन में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया
प्रत्यर्पण के लिए यूनाइटेड किंगडम के बाहर के वह देश जिनका यूके के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण का प्रबंध है, राज्य सचिव और अदालत निर्णय लेते हैं। ब्रिटेन कानूनों के मुताबिक प्रत्यर्पण की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। जानिए कैसे पूरी होती है प्रक्रिया...
1. प्रत्यर्पण का अनुरोध
पहले कदम में दिस देश को प्रत्यर्पण कराना होता है वह राज्य सचिव से प्रत्यर्पण अनुरोध करता है। नीरव मोदी के मामले में भारत ने यूके अधिकारियों को दो अनुरोध भेजे थे। इनमें एक सीबीआई ने तो दूसरा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भेजा था।
विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने पिछले साल 29 दिसंबर को राज्य सभा में कहा था, 'अगस्त 2018 में नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण के लिए सरकार ने यूके के अधिकारियों को दो अनुरोध भेजे, एक सीबीआई की ओर से और दूसरा प्रवर्तन निदेशालय की ओर से।'
2. राज्य सचिव लेते हैं निर्णय
इसके बाद यूके के राज्य सचिव इसका निर्णय लेते हैं कि इस अनुरोध को स्वीकार करना है या नहीं। नीरव मोदी के मामले में राज्य सचिव साजिद जाविद हैं। पिछले सप्ताह ईडी ने कहा था कि यूके के गृह सचिव ने बैंक धोखाधड़ी के आरोपी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के अनुरोध को कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए अदालत में भेज दिया है।
3. जारी किया जाता है वारंट
इसके बाद न्यायाधीश यह निर्णय लेते हैं कि आरोपी के खिलाफ वारंट जारी करना है या नहीं। यदि कोर्ट को यह लगता है कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं तो आरेस्ट वारंट जारी कर दिया जाता है। नीरव मोदी के खिलाफ लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिसके बाद मंगलवार को नीरव मोदी को गिरफ्तार किया गया।
4. आरोपी की गिरफ्तारी
आरोपी को गिरफ्तार कर पेश किया जाता है। यहां जज प्रत्यर्पण की सुनवाई के लिए तारीख तय करते हैं। पुलिस ने बताया कि नीरव मोदी को बुधवार को लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट के सम्मुख पेश किया जाएगा।
5. प्रारंभिक सुनवाई
ब्रिटिश सरकार की वेबसाइट के मुताबिक जज को इस बात से सहमत होना चाहिए कि अपराध प्रत्यर्पण के दायरे में आता हो, प्रत्यर्पण में कोई रुकावट न हो, प्रथम दृष्टया दोषी होने का सुबूत दिखता हो और प्रत्यर्पण की वजह से मानवीय अधिकारों का हनन न हो रहा हो।
अगर जज को लगता हो कि सभी प्रक्रियाओं का पालन सही तरीके से हुआ है और प्रत्यर्पण में कोई रुकावट नहीं है तो जज केस राज्य सचिव को भेज देते हैं, जहां प्रत्यर्पण को लेकर निर्णय लिया जाता है।
इस प्रक्रिया में महीनों लग सकते हैं। उदाहरण के तौर पर शराब कारोबारी विजय माल्या को अप्रैल 2017 में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन, अदालत ने प्रत्यर्पण का आदेश दिसंबर 2018 में जारी किया था।
6. जज के फैसले के खिलाफ अपील
मामले को राज्य सचिव को भेजने या न भेजने के जज के निर्णय के खिलाफ अपील की जा सकती है। अनुरोध करने वाला व्यक्ति इसकी अनुमति मांग सकता है। अनुमति के लिए जज के फैसले के 14 दिन के अंदन उच्च न्यायालय में आवेदन करना होता है। हालांकि, उच्च न्यायालय अपील को तब तक नहीं सुनेगा जब तक कि राज्य सचिव अनुरोधित व्यक्ति के प्रत्यर्पण का आदेश नहीं देता है।
7. चार सप्ताह तक कर सकते हैं फैसले के खिलाफ आवेदन
राज्य सचिव प्रत्यर्पण का आदेश तभी तक जारी कर सकता है जब तक अधिनियम 2003 में कुछ वैधानिक प्रावधानों के तहत व्यक्ति के आत्मसमर्पण को प्रतिबंधित नहीं किया जाता। अनुरोध करने वाला व्यक्ति किसी भी तरह का अभ्यावेदन कर सकता है कि राज्य सचिव के पास मामला भेजे जाने के चार सप्ताह के अंदर उसे प्रत्यर्पित क्यों न कर दिया जाए। चार सप्ताह पूरे होने के बाद किसी तरह के अभ्यावेदन पर विचार नहीं किया जाता है।
8. राज्य सचिव के निर्णय के खिलाफ अपील
यह अपील उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद ही की जा सकती है। अनुमति के लिए राज्य सचिव द्वारा प्रत्यर्णपण आदेश जारी करने के 14 दिन के अंदर नोटिस दिया जाना चाहिए। राज्य सचिव को मामला भेजने के जज के फैसले के खिलाफ अनुरोध करने वाले व्यक्ति द्वारा की गई किसी भी अपील को उसी समय सुना जाता है जब राज्य सचिव के आदेश के खिलाफ अपील की जाती है।
9. उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ अपील
उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में भी अपील की जा सकती है। उच्च न्यायालय द्वारा निर्णय देने के 14 दिन के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी होती है। इसकी अनुमति उच्च न्यायालय या खुद सर्वोच्च न्यायालय दे सकता है।
उच्चतम न्यायालय में अपील तभी की जा सकती है जब उच्च न्यायालय ने प्रमाणित किया हो कि इस मामले में सामान्य सार्वजनिक महत्व के कानून का कोई एक बिंदु शामिल है।
10. प्रत्यर्पण
यदि मामले में कोई अपील नहीं है तो राज्य सचिव द्वारा निर्णय देने के 28 दिन के भीतर आरोपी व्यक्ति का प्रत्यर्पण कर दिया जाना चाहिए।