एनसीआरबी: मानव तस्करी कोरोना काल में भी नहीं घटी, कुल पीड़ितों में पचास फीसदी नाबालिग

एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 19 Sep 2021 12:21 AM IST

सार

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी एजेंसियों की तरफ से दर्ज अधिकतर मामले देह व्यापार के लिए यौन शोषण, जबरन मजदूरी और घरेलू गुलाम बनाए जाने से जुड़े हैं। मानव तस्करी के सबसे ज्यादा 184-184 मामले महाराष्ट्र व तेलंगाना में सामने आए, जबकि आंध्र प्रदेश में 171, केरल में 166, झारखंड में 140 और राजस्थान में ऐसे 128 केस दर्ज हुए।
मानव तस्करी (सांकेतिक तस्वीर)
मानव तस्करी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

कोरोना वायरस महामारी के चलते साल 2020 में भले ही आवाजाही से जुड़े प्रतिबंधों के चलते आम आदमी के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाना आसान नहीं रहा, लेकिन मानव तस्करों का धंधा इस दौरान भी फीका नहीं पड़ा। एनसीआरबी की तरफ से जारी साल 2020 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) ने मानव तस्करी से जुड़े 1,714 मामले दर्ज किए, जबकि साल 2019 में ऐसे 2,260 मामले और साल 2018 में 2,278 मामले सामने आए थे। 
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रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी एजेंसियों की तरफ से दर्ज अधिकतर मामले देह व्यापार के लिए यौन शोषण, जबरन मजदूरी और घरेलू गुलाम बनाए जाने से जुड़े हैं। मानव तस्करी के सबसे ज्यादा 184-184 मामले महाराष्ट्र व तेलंगाना में सामने आए, जबकि आंध्र प्रदेश में 171, केरल में 166, झारखंड में 140 और राजस्थान में ऐसे 128 केस दर्ज हुए।


रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 2020 में दर्ज मामलों में मानव तस्करी का शिकार हुए 4708 पीड़ितों में से 2222 नाबालिग थे यानी उनकी उम्र 18 साल से कम थी। देह व्यापार के लिए उत्पीड़न के 1466 मामले, जबरन मजदूरी के 1452 मामले और घरेलू गुलामी के 846 मामले दर्ज किए गए हैं। 

महज 10 फीसदी मामलों में दोष सिद्ध, सात राज्यों में किसी को सजा नहीं
डाटा के हिसाब से मानव तस्करी के महत 10.6 फीसदी मामलों में ही आरोपियों पर आरोप सिद्ध हो पाए हैं, जबकि सात राज्यों में किसी भी मामले में दोष सिद्ध नहीं हो पाया। आरोपियों को सजा दिलाने में सबसे आगे तमिलनाडु रहा, जहां 66 फीसदी मामलों में अभियोजन दोष सिद्ध करने में सफल रहा। इसके बाद दिल्ली में 40 फीसदी मामलों में सजा मिली है।  

16 राज्यों के सभी जिलों में नहीं एएचटीयू
मानव तस्करी को रोकने के लिए देश की सरकारें व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इससे लग सकता है कि अब तक देश के कुल 718 में से 696 जिलों में ही एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटों का गठन हो पाया है। देश के 28 राज्यों व 8 केंद्र शासित प्रदेशों में से 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के ही सभी जिलों में इन यूनिटों की स्थापना की गई है यानी 16 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश अब तक सभी जिलों में मानव तस्करी रोकने के लिए एक समर्पित दस्ता तैयार नहीं कर पाए हैं।

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