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यात्रीगण ध्यान दें, ट्रेन में चोरी हो गए सामान की जिम्मेदारी रेलवे की नहीं

Fri, 22 Sep 2017 06:56 PM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली 
एजेंसी/ नई दिल्ली  Updated Fri, 22 Sep 2017 06:56 PM IST
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 NCDRC refuses compensation to stolen luggage unless booked

रेल में यात्रा के दौरान एक महिला को सूटकेस चोरी हो जाने के मामले में देश के सर्वोच्च उपभोक्ता आयोग ने कोई राहत देने से इनकार कर दिया। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने कहा कि जब तक सामान बुक नहीं कराया जाता और उसकी रसीद जारी नहीं की जाती तब तक रेलवे को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। 

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जिला उपभोक्ता फोरम ने महिला यात्री के चोरी हुए सामान के मुआवजे के रूप में रेलवे को 1.30 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया था। इसके बाद छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने भी इस आदेश को बरकरार रखा थे लेकिन, एनसीडीआरसी ने इन आदेशों को खारिज कर दिया है।
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आयोग के अध्यक्ष सदस्य बीसी गुप्ता वाली बैंच ने रेलवे की उस दलील को स्वीकार कर लिया कि रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 100 के मुताबिक रेलवे को किसी भी सामान के नुकसान, विध्वंस या क्षति के लिए तभी जिम्मेदार ठहराया जा सकता जबकि उसे उसके किसी कर्मचारी ने बुक किया हो व उसकी रसीद जारी की हो।

दरअसल, पश्चिम बंगाल की रहने वाली ममता अग्रवाल नामक महिला 5 सितंबर 2011 को लोकमान्य तिलक शालीमार एक्सप्रेस में यात्रा कर रही थीं। ममता की शिकायत के मुताबिक, जब ट्रेन राउरकेला के नजदीक पहुंची तो कुछ असामाजिक तत्वों ने उनका सूटकेस चोरी कर लिया। सूटकेस में बच्चों के कपड़ों के अलावा सोने की तीन चेन, हीरे की दो अंगुठियां, एक साधारण अंगूठी समेत तीन लाख रुपये का कीमती सामान और 15 हजार रुपये नकद थे।

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