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अपनी ही कौम के अफसरों के खिलाफ पेश की जंग छेड़ने की 'नजीर' 

Tue, 14 Feb 2017 06:16 PM IST
अमित कुमार निरंजन/ अमर उजाला, दिल्ली
अमित कुमार निरंजन/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 14 Feb 2017 06:16 PM IST
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Nazir files RTI against same caste people of Kashmir
Nazir

उसने न कौम को आड़े आने दिया और न ही इलाकाई संबंधों को। यहां तक कि भ्रष्ट अफसरों ने दहशतगर्दी का आरोप तक लगाकर इस कश्मीरी युवक को दबाने की कोशिश की। अपनी ही कौम के लोगों ने धमकाया-बरगलाया लेकिन यह आठवीं पास युवक नजीर अहमद लोन नहीं रुका।

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कश्मीर घाटी के गांव से आरटीआई लगाई और खोलता चला गया अपनी ही कौम के अफसरों की पोल। इसी वजह से जम्मू व कश्मीर प्रदेश का यह युवक आरटीआई नजीर के नाम से पहचाना जाता है। शॉल बेचकर अपने परिवार की गुजर-बसर करने वाले नजीर बताते हैं कि बाहर के दुश्मनों से लड़ना कई बार आसान होता है लेकिन अपने ही लोगों से लड़ना बहुत कठिन होता है।
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नजीर का गांव खां शिगलीपुरा (जिला-बड़गाम) श्रीनगर से करीब 40 किमी दूर है। फरवरी से अक्टूबर तक (आठ माह) नजीर गांव में रहकर परिवार संग शॉल पर कढ़ाई करते हैं और नवंबर से फरवरी (चार माह) तक दिल्ली में शॉल बेचते हैं। इन चार माह में 18 से 20 हजार रुपए कमाकर गर्मी शुरू होने के पहले वह अपने गांव लौट जाते हैं। इन्हीं पैसों से इनके बाकी के आठ महीने आराम से गुजर जाते हैं। 

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2010 से ही कर रहे आरटीआई आवेदन

Nazir files RTI against same caste people of Kashmir
RTI

आरटीआई के इस्तेमाल के बारे में नजीर ने बताया कि मैंने 2010 से ही आरटीआई आवेदन लगाना शुरू कर दिया था। गांव में सड़क से लेकर पेंशन जैसे कई मामलों में घपले हो रहे थे। लेकिन उन्हें कैसे सामने लाया जाए इसका रास्ता नजीर को शुरू में नहीं सूझा।

नजीर ने बताया कि इस बारे में इलाके के एक डॉक्टर ने आरटीआई कानून के बारे में बताया। नजीर के मुताबिक एक बार उन्होंने आरटीआई से पेंशन मामले का घोटाला उजागर किया तो कुछ अफसरों ने नजीर पर दहशतगर्द होने का आरोप लगाया। नजीर ने बताया कि ये सभी अफसर मेरे ही कौम से ताल्लुक रखते थे। इसकी शिकायत मैंने मंत्रालय स्तर तक की। इसके बाद इन पर सख्त कार्रवाई की गई।

दहशतगर्द का आरोप लगने पर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी, पूछने पर नजीर ने बताया कि इस आरोप ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था। लेकिन साथियों ने मुझ पर भरोसा बनाए रखा। बात जब समाज और देश की हो तो बाकी बातें ज्यादा हावी नहीं हो पाती हैं।

नजीर ने बताया कि मेरे गांव की आबादी अभी सात हजार है। इनमें से हर तीसरा व्यक्ति अपना काम फंसने पर किसी न किसी विभाग में आरटीआई लगाता रहता है। दरअसल मैंने दोस्तों को आरटीआई के बारे बताना शुरू किया तो वे भी इसका इस्तेमाल करने लगे। उनकी मदद से मैंने कई कार्यक्रम कर लोगों को आरटीआई के बारे में बताया। 

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