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बहादुरी को सलाम : जंगल में घिरे जवानों ने गोलियां खत्म होने तक दिया मुंहतोड़ जवाब

Mon, 05 Apr 2021 06:15 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली/रायपुर।
एजेंसी, नई दिल्ली/रायपुर। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 05 Apr 2021 06:15 AM IST
सार

  • एक स्थान पर सुरक्षाकर्मियों के सात शव मिले, ज्यादातर जवान गोली लगने से शहीद हुए
  • हमले के पीछे 40 लाख के इनामी माडवी हिडमा है जो घात लगाकर हमला करने में माहिर है।
  • हिडमा की टीम में महिलाओं समेत 180 से 250 नक्सली शामिल हैं।

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Naxalites attacked security personnel in Bijapur Chhattisgarh on Saturday
नक्सली हमले में शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि - फोटो : ANI

विस्तार

बीजापुर में नक्सलियों ने शनिवार को सुरक्षाकर्मियों पर जहां हमला किया, वह बेहद दुर्गम इलाका है। फिर भी जवानों ने नक्सलियों की लाइट मशीनगन और आईईडी हमले का आखिरी गोली तक डटकर मुकाबला किया। तीन ओर से घने जंगलों से घिरे होने के बावजूद सुरक्षा बल के जवानों और कोबरा कमांडो ने नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया।

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जवानों ने पेड़ों की ओट लेकर तब तक गोलीबारी जारी रखी, जब तक उनकी गोलियां खत्म नहीं हो गईं। उन्होंने सुनिश्चित किया कि नक्सली अपनी अनुकूल परिस्थिति के बावजूद उनके सामने ज्यादा देर तक नहीं टिक सकें।
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सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा बलों के जवानों ने बीजापुर-सुकमा जिले की सीमा के आसपास के इलाकों में नक्सलियों की मौजूदगी की गुप्त सूचना पर दोपहर बाद तलाशी अभियान शुरू किया था। बस्तर के जगदलपुर से राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के दो महानिरीक्षक (आईजी) रैंक के अधिकारी अभियान की निगरानी कर रहे थे।
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उन्हें जगरगुंडा-जोंगागुडा क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा जवाबी कार्रवाई का अभ्यास करने की सूचना मिली। उन्हें रोकने के लिए छह शिविरों के सुरक्षा बलों की टीम को तैनात किया गया था। शनिवार को जब जवान उस इलाके में थे, वहां घात लगाए नक्सलियों ने उन पर हमला कर दिया।

अधिकारियों के मुताबिक, एक स्थान पर सुरक्षाकर्मियों के सात शव मिले। ज्यादातर जवान गोली लगने से शहीद हुए, जबकि एक बेहोश हो गया और पानी की कमी के चलते उसकी मृत्यु हो गई। 

40 लाख का इनामी है 33 साल का हिडमा
हमले के पीछे 40 लाख के इनामी माडवी हिडमा उर्फ हिडमन्ना है। सुकमा के पूवार्ती गांव का रहने वाला करीब 33 वर्षीय हिडमा दक्षिणी बस्तर के सुकमा-बीजापुर क्षेत्र में सक्रिय पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी फर्स्ट बटालियन का प्रमुख है और घात लगाकर हमला करने में माहिर है।

हिडमा की टीम में महिलाओं समेत 180 से 250 नक्सली शामिल हैं। हिडमा को ही 11 मार्च को सुकमा में 25 सीआरपीएफ जवानों की हत्या और मई 2013 में जीराम घाटी में कांग्रेस काफिले पर हमला कर 32 लोगों को मारने का मास्टरमाइंड माना जाता है। साथ ही अप्रैल, 2010 में 76 सीआरपीएफ जवानों की शहादत वाले दंतेवाड़ा हमले के पीछे भी उसी की भूमिका मानी जाती है।

10 दिन में यह दूसरा बड़ा नक्सली हमला...
बीते 10 दिन में यह दूसरा बड़ा नक्सली हमला है। इससे पहले, 23 मार्च को नारायणपुर जिले में नक्सलियों ने आईईडी धमाका कर सुरक्षाकर्मियों को ले जा रही बस को उड़ा दिया था, जिसमें पांच डीआरजी जवान शहीद हुए थे, जबकि 14 घायल हुए थे।

क्यों गंवानी पड़ी जवानों को जान, रणनीतिक चूक या लापरवाही

प्लानिंग की नाकामी
शहादत को कार्ययोजना के स्तर पर नाकामी माना जा रहा है। 400 नक्सलियों ने 700 जवानों की घेराबंदी करके उन पर तीन घंटे गोलियां बरसाईं। रेस्क्यू टीम 24 घंटे बाद भी जवानों के शव लेने नहीं पहुंच सकी। स्थिति तब है, जब 20 दिन से ड्रोन से ली गई तस्वीरों में इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना मिली थी।

अफसरों की मौजूदगी से नक्सली हुए अलर्ट
केंद्र के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार व सीआरपीएफ के पूर्व महानिदेशक विजय कुमार के अलावा आईजी आपरेशन व अन्य अधिकारी पिछले 20 दिन से बीजापुर, रायपुर व जगदलपुर क्षेत्र में हैं। इनकी मौजूदगी ने नक्सलियों को अलर्ट किया।  

रणनीति न बदलना
गोरिल्ला लड़ाई के जानकार मानते हैं कि एक ही रणनीति लंबे समय तक नहीं अपनाई जानी चाहिए। नक्सली उस रणनीति की काट ढूंढ लेते हैं।  

तकनीक पर ज्यादा निर्भरता
नक्सलियों के मूवमेंट की जानकारी के लिए तकनीक ही मुख्य माध्यम रह गई है। नक्सली आपरेशन से जुड़े लोग मानते हैं सिर्फ इसी के आधार पर ऑपरेशन की योजना नहीं बनाई जा सकती।

खुफिया तंत्र पड़ा कमजोर
अधिकारी आत्मसमर्पण कराकर वाहवाही लूटने पर ज्यादा ध्यान देते रहे हैं। ऐसे में खुफिया तंत्र से मिलने वाली सूचनाएं कम हो जाती है।

शहीदों को सलाम, बलिदान नहीं भुलाया जा सकता
शोक संतप्त परिवारों के प्रति मैं संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। देश बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। - रामनाथ कोविंद, राष्ट्रपति
वे पूरे साहस के साथ लड़े और उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। - राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार लड़ाई में बलों को हरसंभव सहायता देती रहेगी।- सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष

शहीद जवान

  • डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड: उपनिरीक्षक दीपक भारद्वाज, मुख्य आरक्षी रमेश कुमार जुरी, नारायण सोढी, जवान रमेश कोरसा, सुभाष नाइक, सहायक सिपाही किशोर आंद्रिक, संकुराम सोढी, भोसाराम करतामी
  • एसटीएफ: श्रवण कश्यप, सुख सिंह फारस, रामदास कोर्रम, जगतराम कंवर, रमाशंकर पैकरा, शंकरनाथ
  • कोबरा बटालियन: निरीक्षक दिलीपकुमार दास, मुख्य आरक्षी राजकुमार यादव, जवान शंभू राय, धर्मदेव कुमार, एसएम कृष्णा, आर जगदीश, बबलू राभा
  • बस्तरिया बटालियन: जवान समैया मारावी

हाल के बड़े हमले

  • 09 अप्रैल 2019 : दंतेवाड़ा में भाजपा विधायक भीमा मंडावी की कार पर हमला। विधायक और उनके चार सुरक्षाकर्मियों की जान गई।
  • 24 अप्रैल 2017 : सुकमा के दुर्गपाल में सीआरपीएफ के  25 जवान शहीद हुए थे।
  • 25 मई 2013 : बस्तर में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल सहित 30 की जान गई थी।

फ्रांस ने कहा, हम भारत के साथ...भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लीनेन ने ट्विटर पर अपने संदेश में कहा, शहीद जवानों के परिवार के दुख में शरीक हूं। उन्होंने लिखा कि फ्रांस आतंकवाद के खिलाफ हर लड़ाई में भारत के साथ खड़ा है।

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