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कश्मीर के आतंकवाद की तरह अब नक्सलवाद पर होगा वार, सबसे बड़े ऑपरेशन में हिस्सा लेंगी 100 बटालियन

Thu, 24 Oct 2019 09:20 PM IST
आसिम खान जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: आसिम खान Updated Thu, 24 Oct 2019 09:20 PM IST
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Naxalism will be hit hard Like Jammu and Kashmir terrorism
प्रतीकात्मक तस्वीर

जिस तरह कश्मीर में आतंकियों और उनके मददगारों को ढूंढ-ढूंढ कर बाहर निकाला जा रहा है, अब उसी तर्ज पर नक्सलवाद का खात्मा किया जाएगा। चार-पांच राज्यों में नक्सलियों पर एक साथ वार होगा। उन्हें जंगल के अंतिम सिरे से भी खोज निकाला जाएगा। नक्सलवाद के खिलाफ शुरू हो रहे इस ऑपरेशन में विभिन्न अर्धसैनिक बलों की करीब सौ बटालियन हिस्सा लेंगी। 

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इनके अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय, आईबी और सीआरपीएफ की कोबरा इकाई भी विशेष ऑपरेशन का हिस्सा बनेगी। बुधवार को केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने जगदलपुर में आईबी चीफ अरविंद कुमार, स्थानीय पुलिस के अधिकारी और सीआरपीएफ सहित कई दूसरी एजेंसियों के साथ बैठक की है। बैठक के दौरान ऑपरेशन का खाका तैयार किया गया है। बहुत जल्द सीआरपीएफ की सात नई बटालियन छत्तीसगढ़ रवाना की जा रही हैं। 

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नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर के ही लेंगे दम 

बता दें कि नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में अभी 85 से अधिक बटालियन तैनात हैं। अधिकांश जगहों पर सीआरपीएफ ने मोर्चा संभाल रखा है। जंगल के आखिर तक अगर कोई फोर्स पहुंची है तो वह सीआरपीएफ है। इसके अलावा कांकेर और नारायणपुर में बीएसएफ व आईटीबीपी की कुछ बटालियन हैं। सुरक्षा बलों के एक अधिकारी का कहना है कि केंद्र सरकार अब एक ऐसी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। 

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जिस तरह से कश्मीर में आतंकवाद की कमर तोड़ी जा रही है, वैसे ही अब नक्सलवाद पर बड़ा वार होगा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी और प्रवर्तन निदेशालय भी अपने स्तर पर इस ऑपरेशन में मदद करेंगे। नक्सलवादियों को कहां से आर्थिक मदद मिलती है, हथियार कहां से आते हैं और उनके दूसरे स्त्रोत, इन सब पर एनआईए और ईडी नजर रख रही है। 

छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र आदि नक्सलवाद से प्रभावित राज्यों में यह ऑपरेशन विभिन्न चरणों में शुरू किया जाएगा। इसके लिए कई तरह के नए उपकरण जैसे दस किलो से अधिक वजन वाला ड्रोन, रात में काम करने वाले सर्विलांस कैमरे और खास किस्म के हथियार सुरक्षा बलों को मुहैया कराए जाएंगे। 

सुकमा, बीजापुर और भद्राचलम से होगी शुरुआत

सुरक्षा बलों की नई बटालियन को सुकमा, बीजापुर और भद्राचलम जैसे जिलों के बॉर्डर पर तैनात किया जाएगा। यहां पर नक्लवाद का खासा प्रभाव है। मौजूदा समय में सुरक्षा के लिहाज से इन जिलों के गैप को खत्म नहीं किया जा सका है। सात बटालियन आने के बाद यह गैप पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इसके बाद दूसरे इलाकों में नक्सलियों पर वार होगा। 

ऑपरेशन शुरू होने से पहले नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने की छूट रहेगी। बाद में किसी को कोई छूट नहीं मिलेगी। सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार अब नक्सलवाद के समूल खात्मे की दिशा में काम कर रही है। नक्सली न केवल सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हैं, बल्कि वे विकास कार्यों को भी बाधित कर रहे हैं। मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचा देते हैं। 

अगर कोई उद्योग धंधा लगा है तो वहां से वसूली करते हैं। विकास कार्यों का टेंडर पास हो जाता है, लेकिन नक्सलियों के डर से सरकारी अधिकारी और कामगार मौके पर नहीं पहुंचते। इस वजह से सरकारी खजाने को भारी चपत लग जाती है। नक्सलियों की संपत्ति का भी पता लगाया जा रहा है।
 

अब देश में वामपंथी उग्रवाद की कोई जगह नहीं होगी: अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों बड़े साफ शब्दों में कह दिया था कि अब देश में वामपंथी उग्रवाद की कोई जगह नहीं होगी। इसे खत्म करने के लिए विशेष रणनीति बन रही है। इसके तहत मोदी सरकार कई राज्यों में फैले वामपंथी उग्रवाद को धन मुहैया कराने वालों पर करारी चोट करेगी। उन्हें धन कौन मुहैया करा रहा है, ये जानकारी सरकार के पास है। इसपर काम भी शुरू हो गया है। वामपंथी उग्रवाद पर मोदी सरकार ने जिस तरह नकेल कसी है, यह उसी का नतीजा है कि आज वामपंथी उग्रवाद की घटनाएं कम हो रही हैं। 

साल 2009 में ऐसी 2258 घटनाएं सामने आई थीं, जबकि 2018 में इनकी संख्या 833 है। केंद्रीय गृहमंत्री ने वामपंथी उग्रवाद पर केंद्र सरकार के मंत्रियों, प्रभावित राज्य के मुख्यमंत्रियों, मुख्य सचिवों तथा केंद्र व राज्यों के आला अधिकारियों के साथ एक बैठक के दौरान यह बात कही थी। अमित शाह ने कहा, वामपंथी उग्रवाद कुछ दशकों से देश के सामने एक बड़ी चुनौती के तौर पर उभरा है। इसे समाप्त करने के मकसद से उन्हे उपलब्ध होने वाले धन को रोकने के लिए सरकार विशेष प्रयास कर रही है। इस मुहिम के द्वारा उनके रहने, खाने-पीने, घूमने, हथियारों की खरीद और ट्रेनिंग आदि व्यवस्थाओं को रोका जा सकता है। 

यह तय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस नए भारत के निर्माण की बात करते हैं, उसमें वामपंथी उग्रवाद के लिए कोई जगह नहीं होगी। गृहमंत्री ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकारों के समन्वय से वामपंथी उग्रवाद को निर्मूल किया जा सकता है। बंदूक के बल पर विकास और लोकतंत्र को झुकाने में वामपंथी उग्रवाद को कभी सफलता नहीं मिलेगी। पिछले साल केवल 60 जिलों में वामपंथी उग्रवाद की घटना नोट की गई हैं। राज्य सरकार, राज्य के सुरक्षा बल तथा केंद्रीय बलों के संयुक्त प्रयासों से सफलता प्राप्त हुई है।  

नक्सल क्षेत्रों में विकास पर रहेगा खास जोर

वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए वर्ष 2015 में एक राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना बनाई गई थी। इसमें सुरक्षा से संबंधित उपायों के साथ-साथ विकास के कार्यों, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हकधारियों को सुनिश्चित करना इत्यादि शामिल है। इसके तहत स्थानीय नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। नक्सलवाद से प्रभावित जिलों में पुलिस बलों का आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है। 

उग्रवाद प्रभावित राज्यों में स्थानीय पुलिस की सतर्कता और दक्षता के बिना वामपंथी उग्रवाद समाप्त नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए जो विशिष्ट पहल की हैं, उसमें प्रमुख तौर पर सड़क एवं टेलीकॉम कनेक्टिविटी में सुधार, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास तथा शिक्षा शामिल है। एकलव्य मॉडल के अंतर्गत खोले जाने वाले स्कूलों की गति तेज करने, साथ ही सभी नागरिकों को पांच किलोमीटर के भीतर बैंकिंग सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की बात भी कही गई है। 

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