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देश में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटी, पहले 126 थे अब रह गए 44 क्षेत्र

Mon, 16 Apr 2018 12:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 16 Apr 2018 12:48 PM IST
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 Naxal influence cut down as govt removes 44 districts from 126 affected list
छत्तीसगढ़ के सुकमा से भले ही हर हफ्ते नक्सली हमलों की खबरें आती हों लेकिन गृहमंत्रालय का कहना है कि  देश में नक्सली गतिविधियों में कमी आई है।  नक्सलियों के इलाका भी धीरे-धीरे ही सही घट रहा है।
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पिछले दिनों गृहमंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के नक्सल प्रभावित  126 जिलों में से 44 जिले नक्सल मुक्त हो गए हैं। सरकार ने इन क्षेत्रों को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया है। यह बात अलग है कि आठ नए जिले नक्सल की चपेट में भी आए हैं। यही नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि  सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिले 35 से घटकर 30 रह गई है।
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जबकि बिहार और झारखंड के पांच जिले अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों  से मुक्त घोषित कर दिए गए हैं।नक्सल मुक्त जिलों में झारखंड का दुमका, पूर्वी सिंहभूम, रामगढ़ और बिहार का नवादा और मुज्जफरपुर, तेलंगाना का भद्रादरी जो पहले खमम का ही अंग था।
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गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले चार वर्षों में नक्सली हिंसा कम हुई है। केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा ने बताया कि नक्सली हिंसा में आई कमी का सारा श्रेय सुरक्षा और विकास से जुड़े विभिन्न  उपायों की बहुमुखी रणनीति को जाता है।

10 राज्यों में 106 जिलों को नक्सल प्रभावित की श्रेणी में रखा है

 Naxal influence cut down as govt removes 44 districts from 126 affected list

उन्होंने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच देश के 44 जिलों में नक्सली या तो है नहीं या फिर उसकी मौजूदगी न के बराबर हो गई है। नक्सली हिंसा अब उन 30 जिलों तक सिमट गई है इनमें वो जिले भी शामिल हैं जो कभी इससे बुरी तरह प्रभावित थे। गृह मंत्रालय ने 10 राज्यों में 106 जिलों को नक्सल प्रभावित की श्रेणी में रखा है। उन्होंने बताया कि 11 राज्यों में 90 जिले तो ऐसे हैं जिसमे पिछले एक साल में 58 से कम बार हिंसा हुई है। 


 जिन जिलों में नक्सली हमले कम हुए हैं वहां सरकार ने सुरक्षा संबंधी खर्च ( एसआरई ) में काफी बदलाव किए हैं। इसका उद्देश्य सुरक्षा संबंधी खर्च जैसे ढुलाई, वाहनों को भाड़े पर लेना, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को वजीफा देना, बलों के लिए आधारभूत ढांचे का निर्माण आदि के लिए भुगतान करना है। इस पूरे खर्चे को श्रेणीबद्ध करने से सुरक्षा और विकास संबंधी संसाधनों की तैनाती पर ध्यान केंद्रित करने का आधार मिला जिससे की इस पूरी हिंसा में कमी आई है। बीते कुछ वर्षों में कुछ जिलों को छोटे जिलों में बांट दिया गया है। इसके बाद से ही 106 एसआरई जिलों का भौगोलिक इलाका 126 जिलों में फैला है। 

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित जिलों के निरीक्षण के लिए पिछले कुछ दिनों से  राज्यों के साथ व्यापक स्तर पर बातचीत की ताकि बदलती जमीनी सच्चाई के मुताबिक बलों और संसाधनों की तैनाती की जा सके। 

इस तरह सुरक्षा सूची से 44 जिलों को बाहर किया गया और आठ नए जिले जोड़े गए हैं वहीं इस मामले में एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा संबंधी खर्चों के लिए चुने गए जिलों की कुल संख्या 90 हैं। 

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