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राज्यसभा में पास हुआ एनआईए संशोधन विधेयक 2019, समाजवादी पार्टी ने किया समर्थन
Wed, 17 Jul 2019 06:03 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 17 Jul 2019 06:03 PM IST
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) संशोधन विधेयक, 2019, राज्यसभा में पास हो गया। समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा में एनआईए विधेयक का समर्थन किया। इससे पहले यह बिल लोकसभा में पास हो चुका है।
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कुछ सदस्यों द्वारा आतंकवादी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (पोटा) का जिक्र किए जाने के संदर्भ में गृह मंत्री ने कहा कि पोटा कानून को वोटबैंक बचाने के लिए भंग किया गया था। पोटा की मदद से देश को आतंकवाद से बचाया जाता था, इससे आतंकवादियों के अंदर भय पैदा हो गया था और देश की सीमाओं की रक्षा होती थी। इस कानून को पूर्ववर्ती संप्रग की सरकार ने साल 2004 में आते ही भंग कर दिया।
शाह ने कहा कि पोटा को भंग करना उचित नहीं था, यह हमारा आज भी मानना है। पूर्व के सुरक्षा बलों के अधिकारियों का भी यही मानना रहा है। पोटा को भंग किए जाने के बाद आतंकवाद इतना बढ़ा कि स्थिति काबू में नहीं रही और संप्रग सरकार को ही एनआईए को लाने का फैसला करना पड़ा।
शाह ने कहा कि यह कानून देश की इस एजेंसी को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की ताकत देगा। यह समझना होगा कि श्रीलंका में हमला हुआ, हमारे लोग मारे गए, बांग्लादेश में हमारे लोग मारे गए। लेकिन देश से बाहर जांच करने का अधिकार एजेंसी को नहीं है। ऐसे में यह संशोधन एजेंसी को ऐसा अधिकार प्रदान करेगा।
उन्होंने इस संदर्भ में मीडिया में विषयों को लीक किए जाने के विषय को भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह ध्यान में रखना चाहिए कि जब तक कोई व्यक्ति दोषी साबित नहीं होता है तब तक वह निर्दोष होता है। उन्होंने जांच और अभियोजन दोनों विषयों में फर्क किए जाने का भी उल्लेख किया।
तिवारी ने यह भी दावा किया कि एनआईए अधिनियम की संवैधानिक वैधता के विषय का अभी तक निपटारा नहीं किया गया है क्योंकि इसकी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं अभी अदालतों में लंबित है। उन्होंने कहा कि एनआईए कानून को कुछ विशेष विषयों को ध्यान में रखते हुए लाया गया था।
अब इस विशेष कानून को अन्य कानून की तरह नहीं बनाएं। एनआईए जैसी जांच एजेंसी को किसी अन्य पुलिस एजेंसी की तरह नहीं बनाएं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एनआईए, यूएपीए और आधार जैसे कानूनों में संशोधन करके सरकार भारत को 'पुलिस स्टेट' में बदलना चाहती है।
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National Investigation Agency (Amendment) Bill 2019 has been passed in Rajya Sabha pic.twitter.com/lZAWUVqeHG
— ANI (@ANI) July 17, 2019विज्ञापन
लोकसभा में बिल पर हुई थी तकरार
लोकसभा में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019 पर चर्चा के दौरान हस्तक्षेप करते हुए अमित शाह ने कहा कि कुछ लोगों ने धर्म का जिक्र किया और एनआईए कानून का दुरूपयोग किए जाने के मुद्दे को भी उठाया। शाह ने कहा कि हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि मोदी सरकार की एनआईए कानून का दुरूपयोग करने की न तो कोई इच्छा है और न ही कोई मंशा है और इस कानून का शुद्ध रूप से आतंकवाद को खत्म करने के लिय उपयोग किया जायेगा।
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कुछ सदस्यों द्वारा आतंकवादी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (पोटा) का जिक्र किए जाने के संदर्भ में गृह मंत्री ने कहा कि पोटा कानून को वोटबैंक बचाने के लिए भंग किया गया था। पोटा की मदद से देश को आतंकवाद से बचाया जाता था, इससे आतंकवादियों के अंदर भय पैदा हो गया था और देश की सीमाओं की रक्षा होती थी। इस कानून को पूर्ववर्ती संप्रग की सरकार ने साल 2004 में आते ही भंग कर दिया।
शाह ने कहा कि पोटा को भंग करना उचित नहीं था, यह हमारा आज भी मानना है। पूर्व के सुरक्षा बलों के अधिकारियों का भी यही मानना रहा है। पोटा को भंग किए जाने के बाद आतंकवाद इतना बढ़ा कि स्थिति काबू में नहीं रही और संप्रग सरकार को ही एनआईए को लाने का फैसला करना पड़ा।
शाह ने कहा कि यह कानून देश की इस एजेंसी को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की ताकत देगा। यह समझना होगा कि श्रीलंका में हमला हुआ, हमारे लोग मारे गए, बांग्लादेश में हमारे लोग मारे गए। लेकिन देश से बाहर जांच करने का अधिकार एजेंसी को नहीं है। ऐसे में यह संशोधन एजेंसी को ऐसा अधिकार प्रदान करेगा।
कांग्रेस ने पुलिस स्टेट में बदलने की साजिश बताया
लोकसभा में में विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने आरोप लगाया कि एनआईए, यूएपीए, आधार जैसे कानूनों में संशोधन करके सरकार भारत को 'पुलिस स्टेट' में बदलना चाहती है। निचले सदन में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019 पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि जांच एजेंसियों का 'राजनीतिक बदले' के लिए दुरुपयोग किया जाता है।उन्होंने इस संदर्भ में मीडिया में विषयों को लीक किए जाने के विषय को भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह ध्यान में रखना चाहिए कि जब तक कोई व्यक्ति दोषी साबित नहीं होता है तब तक वह निर्दोष होता है। उन्होंने जांच और अभियोजन दोनों विषयों में फर्क किए जाने का भी उल्लेख किया।
तिवारी ने यह भी दावा किया कि एनआईए अधिनियम की संवैधानिक वैधता के विषय का अभी तक निपटारा नहीं किया गया है क्योंकि इसकी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं अभी अदालतों में लंबित है। उन्होंने कहा कि एनआईए कानून को कुछ विशेष विषयों को ध्यान में रखते हुए लाया गया था।
अब इस विशेष कानून को अन्य कानून की तरह नहीं बनाएं। एनआईए जैसी जांच एजेंसी को किसी अन्य पुलिस एजेंसी की तरह नहीं बनाएं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एनआईए, यूएपीए और आधार जैसे कानूनों में संशोधन करके सरकार भारत को 'पुलिस स्टेट' में बदलना चाहती है।