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प्राकृतिक संरक्षित क्षेत्रों को लेकर एनजीटी ने बनाई नई समिति
Sat, 23 Nov 2019 03:46 AM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sat, 23 Nov 2019 03:46 AM IST
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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने शुक्रवार को प्राकृतिक संरक्षित क्षेत्रों (एनसीजेड) पर एक नई समिति का गठन किया। यह समिति इस सवाल पर विचार करेगी कि क्या एनसीजेड के संरक्षण के लिए उप क्षेत्रीय योजनाएं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड द्वारा तैयार क्षेत्रीय योजना के अनुरूप थीं या नहीं।
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एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि समिति में पर्यावरण और वन मंत्रालय, नेशनल रिमोट सेसिंग सेंटर, भारतीय वन सर्वेक्षण के प्रतिनिधियों के साथ ही हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के वन संरक्षण विभाग के प्रधान मुख्य संरक्षक और राजस्व सचिव भी होंगे।
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पीठ ने कहा कि एहतियातन, हम निर्देश देते हैं कि एनसीआरपीबी द्वारा एनसीजेड के हिस्से के तौर पर चिह्नित किसी भी भूमि को 20 मार्च 2020 तक एनसीआरपीबी की अनुमति के बिना किसी अन्य मकसद के लिए डायवर्ट नहीं की जा सकती है। पर्यावरण और वन मंत्रालय नोडल एजेंसी होगी।
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यह काम 1999 के डाटा बेस के संदर्भ में आयोजित किया जा रहा है। रिपोर्ट तीन महीने के अंदर ई-मेल से दाखिल करनी होगी। पीठ में जस्टिस एसपी वांगड़ी और जस्टिस के रामाकृष्णन भी शामिल हैं। राज्यों और एनसीआरपीबी के बीच उत्पन्न परस्पर विरोधाभास के चलते नई समिति का गठन करना पड़ा है।