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Bad Bank: बैंकों की बैलेंस शीट को साफ-सुथरी बनाएगा, जानिए कैसे करेगा काम यह संस्थान

Mon, 10 May 2021 02:19 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 10 May 2021 02:19 AM IST
सार

देश की बैंकों का एनपीए लगातार बढ़ रहा है। इससे निपटने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में बैड बैंक के गठन का एलान किया था। यह जून से काम करने  लगेगा।

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bank bank starts from next month:  will make the balance sheet of banks clean, know how this institution will work
बैड बैंक - फोटो : istock

विस्तार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बजट में की गई घोषणा के अनुरूप जून से देश के पहले बैड बैंक की शुरुआत हो सकती है। बैड बैंक ऐसे वित्तीय संस्थान को कहते हैं, जो कर्जदाताओं यानी बैंकों की खराब या फंसी परिसंपत्ति को लेकर उनकी मदद करता है। यह बैंकों के एनपीए की वसूली का समाधान निकालता है। आइये जानते हैं इसे अनूठे बैंक के बारे में : 

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यह रहेगा नाम
राष्ट्रीय परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल)। यह जून तक चालू होने की उम्मीद है, जो भारत में बैड बैंक के रूप में काम करेगी।

कौन बनाएगा यह बैंक
भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने कहा है कि आम बजट 2021-22 में इसकी घोषणा की गई है। आईबीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील मेहता ने  बताया कि इस नई बैंक का गठन सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों की मदद से किया जा रहा है। मेहता के अनुसार एनएआरसीएल का सबसे बड़ा फायदा बैंकों के एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्ति) का एकत्र करना होगा। 
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वित्त मंत्री ने बजट में क्या कहा था
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 के आम बजट में घोषणा की थी कि बैंकों के बहीखातों को तुरंत साफ करने की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि बैंकों की फंसे कर्ज की समस्याओं से निपटने के लिए एक परिसंपत्ति पुनर्निर्माण और प्रबंधन कंपनी स्थापित की जाएगी, वहीं नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की रूपरेखा को मजबूत किया जाएगा।
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क्या होता है एनपीए
रिजर्व बैंक के अनुसार जिस संपत्ति से बैंक की कोई कमाई नहीं होती है, उसे एनपीए या गैर निष्पादनकारी परिसंपत्ति कहा जाता है। यदि किसी लोन की किस्तें 180 दिन से अधिक समय तक नहीं आती हैं तो वह लोन एनपीए की श्रेणी में चला जाता है। 

12.5 फीसदी तक पहुंच सकता है एनपीए
अभी देश की बैंकों का एनपीए करीब 8.5 फीसदी है और रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि इस वर्ष के अंत तक यह 12.5 फीसदी तक पहुंच सकता है। 

क्या होगा बैड बैंक से लाभ
देश की बैंकों की बैलेंस शीट सुधर जाएगी और उन्हें नए कर्ज देने में सुविधा होगी।  सारे बैंकों का एनपीए इसमें समाहित हो जाएगा और वे फंसे कर्ज से मुक्त हो जाएंगे। इससे सरकार को भी फायदा होगा। यदि वह किसी सरकारी बैंक का निजीकरण करना चाहेगी तो उसमें आसानी होगी। वहीं बैड बैंक के जरिए एनपीए यानी डूबत कर्ज को वसूल किया जा सकेगा। 


1980 में अमेरिका से हुई इसकी शुरुआत
भारत में बैड बैंक अब शुरू हो रही, लेकिन अमेरिका में यह 1980 के दशक में चालू हो गई थी। भारी एनपीए के कारण वहां के कई बैंक डूबने की कगार पर पहुंच गए थे। तब इस बैंक का विचार आया। बाद में इस विचार को फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल जैसे देशों ने भी अपनाया। 

 

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