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नारी शक्ति: 'जयपुर मॉडल' को हर चुनावी राज्य में अपनाएगी भाजपा, महिलाओं को अपने साथ जोड़ने की ये है योजना

Tue, 26 Sep 2023 05:16 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 26 Sep 2023 05:16 PM IST
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सार
Nari Shakti: प्रधानमंत्री ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई काम किए थे। उन्होंने उन पंचायतों को विशेष प्रोत्साहन देने की योजना शुरू की थी, जहां प्रधान और सदस्यों के साथ-साथ पूरी व्यवस्था महिलाओं के हवाले हो...
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Nari Shakti: BJP will adopt Jaipur Model in upcoming every electoral state
Nari Shakti Vandan - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 सितंबर को राजस्थान के जयपुर में हुई रैली कई मायनों में एतिहासिक रही। इस रैली में शुरू से लेकर अंत तक हर बड़ी जिम्मेदारी महिलाओं ने ही संभाली। भीड़ जुटाने से लेकर पीएम के स्वागत, मंच संचालन, ट्रैफिक व्यवस्था संभालने से लेकर खान-पान तक हर व्यवस्था राजस्थान की बहनों के हवाले रही। भाजपा के लोगों का मानना है कि इससे राज्य की महिलाओं के अंदर विशेष उत्साह देखा गया और चुनाव में पार्टी के लिए यह बड़े वोट बैंक का काम कर सकता है। भाजपा अब ये जयपुर मॉडल सभी चुनावी राज्यों में अपनाएगी यानी कई रैलियों की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं के हवाले सौंपी जाएगी।

क्या होगा लाभ

दरअसल, हाल के कई चुनावों ने यह साबित कर दिया है कि महिलाएं एक बड़े वोट बैंक के रूप में वोट करती हैं। यदि मुद्दे उनसे जुड़े होते हैं, तो पुरुष मतदाताओं के मुकाबले वे धर्म, जाति या वर्गीय सोच से ऊपर उठकर दूसरी पार्टियों को समर्थन देती हैं। तीन तलाक विरोधी कानून लाने के बाद मुस्लिम पुरुषों में मोदी के प्रति नाराजगी देखी गई थी, लेकिन इस विरोध के बाद भी मुस्लिम महिलाओं के बीच मोदी को खूब वोट मिले थे। इसी प्रकार जब केंद्र सरकार ने महिलाओं के नाम पर प्रधानमंत्री आवास योजनाओं का लाभ पहुंचाया, उज्ज्वला योजना के जरिए महिलाओं का जीवन आसान किया, तब महिलाओं ने अपने जाति धर्म से अलग हटकर भाजपा का समर्थन किया।

मोदी ने इसी फॉर्मूले को पकड़ लिया है। वे महिलाओं के मुद्दे के सहारे कांग्रेस के ओबीसी फैक्टर की काट खोजना चाहते हैं। उनकी योजना है कि महिलाओं को जातीय सोच से अलग लाभ पहुंचाकर उनका समर्थन हासिल किया जाए। महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारी देकर उनके अंदर गौरव और आत्मसम्मान का भाव पैदा कर मोदी उन्हें साधना चाहते हैं। यही कारण है कि मोदी ने 25 सितंबर की भोपाल की रैली में महिलाओं को इस बात के लिए सावधान भी किया कि लोग (कांग्रेस) उन्हें जातिवाद के मुद्दे में उलझाकर उन्हें भटकाने की कोशिश भी कर सकते हैं।   

कांग्रेस की दूसरी सबसे बड़ी रणनीति लाभकारी योजनाओं के सहारे महिलाओं और अन्य वर्गों को आकर्षित करने की है। केंद्र सरकार स्वयं लाभकारी योजनाओं को चलाकर उनका वोट सफलतापूर्वक अपने साथ जोड़कर इसका चुनावी लाभ उठा चुकी है। संभवतः यह भी एक कारण है कि मोदी इस तरह महिलाओं को अपने साथ जोड़कर अपनी योजनाओं के प्रति उनमें ज्यादा भरोसा पैदा करना चाहते हैं। जब उन्होंने बार-बार यह बताने की कोशिश की कि यह 'मोदी की गारंटी' है, तब इसका सीधा अर्थ यही था कि वे महिलाओं को अपने मुद्दों और योजनाओं के प्रति ज्यादा भरोसा पैदा करना चाहते थे।   

गुजरात मॉडल को बेहतर रूप में सामने लाया

दरअसल, प्रधानमंत्री ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई काम किए थे। उन्होंने उन पंचायतों को विशेष प्रोत्साहन देने की योजना शुरू की थी, जहां प्रधान और सदस्यों के साथ-साथ पूरी व्यवस्था महिलाओं के हवाले हो। तत्कालीन मुख्यमंत्री की पहल के बाद कई पंचायतों में पुरुषों ने चुनाव लड़ने से अपना नाम वापस ले लिया था और कई स्थानों पर महिलाओं ने निर्विरोध चुनाव जीता था।

मोदी का यह प्रयोग इतना सफल रहा कि राज्य की महिलाएं उनकी सबसे बड़ी प्रशंसक बनकर उभरीं। आज भी गुजरात में भाजपा की जबरदस्त पकड़ के पीछे मोदी के इसी प्लान को जिम्मेदार माना जाता है। अब मोदी यही आइडिया इन चुनावी राज्यों में लागू करना चाहते हैं।  

वसुंधरा के नुकसान को भी कमजोर करने की योजना

चुनाव बिल्कुल करीब आ जाने के बाद भी वसुंधरा राजे सिंधिया की भाजपा से नाराजगी कम नहीं हुई है। कहा यहां तक जा रहा है कि वे भाजपा को चुनाव में नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। ऐसे में महिलाओं को ज्यादा प्रमुखता देकर भाजपा वसुंधरा फैक्टर से होने वाले संभावित नुकसान को भी कम से कम करना चाहती है।

आत्मसम्मान की प्रतीक बन गई जयपुर रैली

वरिष्ठ पत्रकार अरुण अवस्थी ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा ने रैली की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपकर बड़ा दांव खेला है। महिलाओं के बीय यह रैली एक आत्म सम्मान के प्रतीक के रूप में उभरी है। भाजपा यह सदंशे देने में सफल रही है कि वह महिलाओं को केवल वोट बैंक नहीं समझती है, बल्कि आगे बढ़कर वह उन्हें नेतृत्व देने की कोशिश कर रही है। वह चाहती है कि अब विकास योजनाओं की बागडोर महिलाएं संभालें। इससे महिलाओं के बीच बहुत अच्छा संदेश गया है। यह भाजपा को चुनाव में लाभ पहुंचा सकता है। संभवतः यही कारण हो सकता है कि भाजपा अब यही मॉडल दूसरे राज्यों में भी अपनाना चाहती हो।

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