{"_id":"583210304f1c1bb304b3a035","slug":"narendra-modi-on-demonetisation-in-agra-rally","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी पर जल्द ही कुछ रियायत दे सकती है सरकार, पीएम बोले - लचीला रुख अपनाएंगे","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
नोटबंदी पर जल्द ही कुछ रियायत दे सकती है सरकार, पीएम बोले - लचीला रुख अपनाएंगे
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 21 Nov 2016 06:15 AM IST
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फाइल फोटोः नरेंद्र मोदी
- फोटो : ANI
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एक हजार-पांच सौ के नोट बंद कर दिए जाने से जनता को हो रही परेशानियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच रही हैं। विपक्ष के हल्ले के साथ सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी का भी उन पर कुछ न कुछ असर होता नजर आ रहा है। यही वजह है कि उन्होंने आगरा रैली में जोर देकर रहा कि हम लकीर के फकीर नहीं है, लचीला रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने साफ संकेत दिए कि जल्द ही कुछ रियायत दी जा सकती है।
आठ नवंबर को प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संदेश में नोटबंदी का एलान किया था। तब शायद सरकार को भी अहसास नहीं था कि एक हजार, पांच सौ के नोट अचानक बंद कर दिए जाने से जनता को कितनी और कैसी-कैसी तकलीफ सहन करनी होंगी।
यही वजह है कि सरकार रोज नई व्यवस्था लेकर सामने आ रही है। पहले नोट बदलने के लिए 4000 रुपये की सीमा दी गई। फिर इसे बढ़ाकर 4500 रुपये किया गया। लेकिन बाद में घटाकर दो हजार कर दिया गया। इसके बाद पूरी तरह से बंद कर दिया गया। स्याही लगाने की व्यवस्था भी की गई।
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इसी तरह एटीएम से कैश निकालने पर भी सीमा बदल रही है। पहले दो हजार, फिर ढाई हजार। इसके बाद पेट्रोल पंप से भी नोट दिए जाने की व्यवस्था की गई। इसके बावजूद विरोध नहीं थम रहा। पब्लिक की परेशानियां कम नहीं हो रहीं। शादी वाले घरों को 2.5 लाख दिए जाने के लिए कहा जरूर, पर अमल नहीं हो पाया।
तकलीफों के साथ गुस्सा भी बढ़ रहा है। शायद यही वजह है कि पीएम ने लचीला रुख अपनाने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि सरकार लकीर की फकीर नहीं है। हर तीसरे दिन समीक्षा की जा रही है। उन्हें मालूम है कि लोगों को परेशानी हो रही है।
मजदूरों पर होगी मेहरबानी
असम के चाय बागानों के मजदूरों की साप्ताहिक मजदूरी का भुगतान किए जाने की व्यवस्था केंद्र सरकार कर चुकी है। इसके लिए मजदूरों की सत्यापित सूची ली गई थी। इसी के मद्देनजर आगरा के जूता कारखाना मालिकों ने मजदूरों के मेहनताने के साप्ताहिक भुगतान की छूट मांगी। उनकी मांग को सीएम अखिलेश यादव ने पीएम तक पहुंचाया। माना जा रहा है कि इस पर केंद्र सरकार जल्द ही निर्णय ले सकती है ताकि मजदूरों की परेशानी दूर हो।
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आठ नवंबर को प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संदेश में नोटबंदी का एलान किया था। तब शायद सरकार को भी अहसास नहीं था कि एक हजार, पांच सौ के नोट अचानक बंद कर दिए जाने से जनता को कितनी और कैसी-कैसी तकलीफ सहन करनी होंगी।
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यही वजह है कि सरकार रोज नई व्यवस्था लेकर सामने आ रही है। पहले नोट बदलने के लिए 4000 रुपये की सीमा दी गई। फिर इसे बढ़ाकर 4500 रुपये किया गया। लेकिन बाद में घटाकर दो हजार कर दिया गया। इसके बाद पूरी तरह से बंद कर दिया गया। स्याही लगाने की व्यवस्था भी की गई।
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इसी तरह एटीएम से कैश निकालने पर भी सीमा बदल रही है। पहले दो हजार, फिर ढाई हजार। इसके बाद पेट्रोल पंप से भी नोट दिए जाने की व्यवस्था की गई। इसके बावजूद विरोध नहीं थम रहा। पब्लिक की परेशानियां कम नहीं हो रहीं। शादी वाले घरों को 2.5 लाख दिए जाने के लिए कहा जरूर, पर अमल नहीं हो पाया।
तकलीफों के साथ गुस्सा भी बढ़ रहा है। शायद यही वजह है कि पीएम ने लचीला रुख अपनाने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि सरकार लकीर की फकीर नहीं है। हर तीसरे दिन समीक्षा की जा रही है। उन्हें मालूम है कि लोगों को परेशानी हो रही है।
मजदूरों पर होगी मेहरबानी
असम के चाय बागानों के मजदूरों की साप्ताहिक मजदूरी का भुगतान किए जाने की व्यवस्था केंद्र सरकार कर चुकी है। इसके लिए मजदूरों की सत्यापित सूची ली गई थी। इसी के मद्देनजर आगरा के जूता कारखाना मालिकों ने मजदूरों के मेहनताने के साप्ताहिक भुगतान की छूट मांगी। उनकी मांग को सीएम अखिलेश यादव ने पीएम तक पहुंचाया। माना जा रहा है कि इस पर केंद्र सरकार जल्द ही निर्णय ले सकती है ताकि मजदूरों की परेशानी दूर हो।
अंबेडकर द्वार से जनता पहुंची मोदी ‘दरबार’
फाइल फोटो
- फोटो : ANI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिवर्तन महारैली के माध्यम से भाजपा ने दलितों को रिझाने की कोशिश की। पहली बार अंबेडकर द्वार बनाया गया। कई युवक डा. भीमराव अंबेडकर और मोदी की तस्वीर लगी तख्तियां लेकर रैली में घूम रहे थे।
आगरा को ‘दलितों की राजधानी’ कहा जाता है। साथ ही यह बसपा का गढ़ भी माना जाने लगा है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पूर्ण बहुमत प्राप्त किया। लेकिन आगरा में बसपा को नौ में से छह सीटों पर जीत मिली थी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अधिकतर चुनावी रैलियों की शुरुआत आगरा से ही की है। भाजपा ने परिवर्तन महारैली में ‘अंबेडकर द्वार’ बनाकर और डा. भीमराव अंबेडकर के चित्रों वाली तख्तियां रैली में घुमवाकर बसपा की चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
भाजपा ने योजनाबद्ध तरीके से बाबा साहब के नाम और चित्र को आयोजन में शामिल किया। कोठी मीना बाजार मैदान (रैली स्थल) से करीब 50 मीटर पहले एमजी रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर अंबेडकर द्वार बनाया गया था। महारैली में सर्वाधिक भीड़ इसी रास्ते पहुंची। इस पर प्रधानमंत्री और भाजपा नेताओं के साथ डा. अंबेडकर का चित्र भी छापा गया।
वहीं युवक डा. अंबेडकर और मोदी की तस्वीर लेकर रैली में शामिल नहीं होने आए थे। ये पहले तो तख्तियां लेकर प्रवेश द्वारों पर खड़े रहे। भीड़ आने के बाद उनके बीच में घूमना शुरू कर दिया।
विरोध मार्च से पहले 101 कांग्रेसी गिरफ्तार
नोटबंदी के फैसले के विरोध में काली पट्टी बांधकर रैली स्थल पर विरोध मार्च निकालने जा रहे कांग्रेसियों को पुलिस ने जयपुर हाउस स्थित जिला कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेसियों ने मोदी के खिलाफ नारेबाजी और पुलिस से धक्का मुक्की की। बाद में पुलिस 101 कांग्रेसियों को थाना सदर ले गई, जहां से शाम को रिहा कर दिया गया।
जयपुर हाउस स्थित जिला कार्यालय पर कांग्रेसियों का दोपहर 12 बजे से ही पहुंचना शुरू हो गया था। यहां सभा में जिलाध्यक्ष दुष्यंत शर्मा ने कहा कि नोटबंदी के फैसले से गरीब, किसान और मजदूर का बुरा हाल है। इसके बाद कांग्रेसियों ने पीएम मोदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आगरा को ‘दलितों की राजधानी’ कहा जाता है। साथ ही यह बसपा का गढ़ भी माना जाने लगा है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पूर्ण बहुमत प्राप्त किया। लेकिन आगरा में बसपा को नौ में से छह सीटों पर जीत मिली थी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अधिकतर चुनावी रैलियों की शुरुआत आगरा से ही की है। भाजपा ने परिवर्तन महारैली में ‘अंबेडकर द्वार’ बनाकर और डा. भीमराव अंबेडकर के चित्रों वाली तख्तियां रैली में घुमवाकर बसपा की चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
भाजपा ने योजनाबद्ध तरीके से बाबा साहब के नाम और चित्र को आयोजन में शामिल किया। कोठी मीना बाजार मैदान (रैली स्थल) से करीब 50 मीटर पहले एमजी रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर अंबेडकर द्वार बनाया गया था। महारैली में सर्वाधिक भीड़ इसी रास्ते पहुंची। इस पर प्रधानमंत्री और भाजपा नेताओं के साथ डा. अंबेडकर का चित्र भी छापा गया।
वहीं युवक डा. अंबेडकर और मोदी की तस्वीर लेकर रैली में शामिल नहीं होने आए थे। ये पहले तो तख्तियां लेकर प्रवेश द्वारों पर खड़े रहे। भीड़ आने के बाद उनके बीच में घूमना शुरू कर दिया।
विरोध मार्च से पहले 101 कांग्रेसी गिरफ्तार
नोटबंदी के फैसले के विरोध में काली पट्टी बांधकर रैली स्थल पर विरोध मार्च निकालने जा रहे कांग्रेसियों को पुलिस ने जयपुर हाउस स्थित जिला कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेसियों ने मोदी के खिलाफ नारेबाजी और पुलिस से धक्का मुक्की की। बाद में पुलिस 101 कांग्रेसियों को थाना सदर ले गई, जहां से शाम को रिहा कर दिया गया।
जयपुर हाउस स्थित जिला कार्यालय पर कांग्रेसियों का दोपहर 12 बजे से ही पहुंचना शुरू हो गया था। यहां सभा में जिलाध्यक्ष दुष्यंत शर्मा ने कहा कि नोटबंदी के फैसले से गरीब, किसान और मजदूर का बुरा हाल है। इसके बाद कांग्रेसियों ने पीएम मोदी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।