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कार्यकारिणी में बोले PM मोदी, 'बीजेपी की फंडिंग के बारे में जनता को जानने का हक'
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 08 Jan 2017 10:00 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : Getty Images
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8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का फैसला लिया था। इसके बाद से कैश की कमी से परेशान लोग लगातार सवाल उठा रहे थे कि क्या प्रधानमंत्री राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे पर भी कोई ठोस कदम उठाएंगे?
अब शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में साफ संकेत दे दिए कि आय के स्त्रोतों का खुलासा करने में उनकी पार्टी पीछे नहीं हटेगी। इस दौरान उन्होंने दूसरी पार्टियों से भी अपनी आय के स्त्रोतों की जानकारी सार्वजनिक करने की अपील की।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा, 'लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि आखिर हमारी आय का स्रोत क्या है? कहां से हमें फंड मिलता है।'
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अब शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में साफ संकेत दे दिए कि आय के स्त्रोतों का खुलासा करने में उनकी पार्टी पीछे नहीं हटेगी। इस दौरान उन्होंने दूसरी पार्टियों से भी अपनी आय के स्त्रोतों की जानकारी सार्वजनिक करने की अपील की।
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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा, 'लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि आखिर हमारी आय का स्रोत क्या है? कहां से हमें फंड मिलता है।'
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बजट सत्र से पहले हो सकती है चर्चा
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री ने संकेत दिए कि बजट सत्र से पहले वह एक सर्वदलीय बैठक बुला सकते हैं। इसमें राजनीतिक दलों की फंडिंग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
उम्मीद की जा रही है कि 31 जनवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दौरान इस पर चर्चा हो सकती है या कोई महत्वपूर्ण बिल लाया जा सकता है।
बताते चलें कि राजनीतिक दलों को 20 हजार रुपए से कम के चंदे का हिसाब नहीं देना होता है। बीजेपी के चंदे का भी एक बड़े हिस्से का कोई हिसाब-किताब नहीं है। इसी वजह से पीएम मोदी के ब्लैक मनी के खिलाफ किसी भी अभियान की काट के तौर पर तमाम राजनीतिक दल बीजेपी की अज्ञात फंडिंग का हवाला देने लगते हैं।
उम्मीद की जा रही है कि 31 जनवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दौरान इस पर चर्चा हो सकती है या कोई महत्वपूर्ण बिल लाया जा सकता है।
बताते चलें कि राजनीतिक दलों को 20 हजार रुपए से कम के चंदे का हिसाब नहीं देना होता है। बीजेपी के चंदे का भी एक बड़े हिस्से का कोई हिसाब-किताब नहीं है। इसी वजह से पीएम मोदी के ब्लैक मनी के खिलाफ किसी भी अभियान की काट के तौर पर तमाम राजनीतिक दल बीजेपी की अज्ञात फंडिंग का हवाला देने लगते हैं।