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नारदा स्टिंग मामला: 2016 में बंगाल की राजनीति में मचाई थी हलचल

एजेंसी, कोलकाता Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 18 May 2021 02:33 AM IST

सार

  • तृणमूल सीबीआई जांच से बचने की कोशिश करती रही, कोलकाता हाईकोर्ट ने दिया था झटका
  • हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख उनके खिलाफ गया। हाईकोर्ट ने 2017 में मामले में सीबीआई जांच के आदेश दे दिए
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ममता बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी और मुकुल रॉय
ममता बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी और मुकुल रॉय - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले ने मार्च 2016 में पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया था। उस वक्त पिछले विधानसभा चुनावों के ठीक पहले नारद न्यूज के सीईओ मैथ्यू सैमुएल ने एक स्टिंग वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में वे एक कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर तृणमूल कांग्रेस के सात सांसदों, तीन मंत्रियों और कोलकाता नगर निगम के मेयर शोभन चटर्जी को काम कराने के एवज में मोटी रकम देते नजर आ रहे थे।
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तृणमूल सीबीआई जांच से बचने की कोशिश करती रही, कोलकाता हाईकोर्ट ने दिया था झटका
उस वक्त तृणमूल ने बहुत कोशिश की कि यह मामला सीबीआई तक नहीं पहुंचे और इसे भाजपा की साजिश माना जाए। हालांकि, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख उनके खिलाफ गया। हाईकोर्ट ने 2017 में मामले में सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। यह बात अलग है कि वीडियो में नजर आने वाले मुकुल रॉय, शुभेंदु अधिकारी समेत तृणमूल के कई नेता अब भाजपा में चले गए हैं। स्टिंग ऑपरेशन में तत्कालीन मंत्रियों फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी और मदन मित्रा पांच-पांच लाख रुपये लेते दिखे थे।


वहीं, कोलकाता के पूर्व मेयर शोभन चटर्जी ने गैरकानूनी तरीके से चार लाख रुपये लिए थे। इनके अलावा एक और आरोपी आईपीएस एसएमएच मिर्जा को भी पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते देखा गया था। अब सात मई, 2021 को राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मिली मंजूरी के बाद सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू की।

चुनाव में भाजपा ने बनाया था मुद्दा, पर नहीं चला
भाजपा ने इसे 2016 के विधानसभा चुनावों में बड़ा मुद्दा बनाया था, लेकिन इसका कोई असर चुनावों में नहीं पड़ा। इस बार के विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा ठंडे बस्ते में रहा। ममता बनर्जी ने फिर चुनाव जीतकर सत्ता बरकरार रखी। अब सीबीआई की कार्रवाई से यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। 



तब ममता सरकार ने मैथ्यू के खिलाफ दर्ज किया था आपराधिक मामला
उस वक्त ममता सरकार ने वीडियो को फर्जी और पूरे मामले को साजिश करार देते हुए मैथ्यू के खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज कर उनको पूछताछ के लिए समन भेजा था। हालांकि, बाद में कोलकाता हाईकोर्ट से मैथ्यू को राहत मिली और फॉरेंसिक जांच में वीडियो को सही पाया गया था।

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