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Nagaland: नरेंद्र तोमर के सामने ही मंच पर नगालैंड के मंत्री ने केंद्रीय योजनाओं पर जताई चिंता, दिए ये सुझाव

Mon, 27 Jun 2022 11:23 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर अजाला, कोहिमा
न्यूज डेस्क, अमर अजाला, कोहिमा Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 27 Jun 2022 11:23 PM IST
सार

राज्य के कृषि मंत्री जी.कैटो ए ने कहा कि नीति निर्धारकों को पूर्वोत्तर में आने और  लोगों के साथ समय बिताने, स्थानों पर जाने और विशेष रूप से नीतियों की योजना बनाने के लिए परेशानी उठानी चाहिए, जो किसान समुदाय के लिए फायदेमंद होगी।

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Nagaland minister raises concerns over central schemes With narendra Tomar on stage
नगालैंड में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर - फोटो : MyGov Nagaland

विस्तार

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सोमवार को कहा कि केंद्र देश में संतुलित विकास के सपने को साकार करना चाहता है। नगालैंड के चुमौकेदलमा जिले में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का मानना है कि जब पूर्वोत्तर का विकास होता है तो देश का विकास होता है। 
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पूर्वोत्तर को नहीं किया जा सकता नजरअंदाज
उन्होंने आगे कहा, जब देश के समग्र विकास की बात आती है तो पूर्वोत्तर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। केंद्र यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि यह क्षेत्र अपने पैरों पर खड़ा हो और देश में सुधार लाने के लिए सहायता प्रदान करे। 
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मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री बार-बार इस क्षेत्र का दौरा करते हैं और उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों को भी नियमति रूप से यहां आने और समस्याओं को जल्दी से हल करने के लिए कठिनाइयों को समझने के लिए कहा है। 
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तोमर ने कहा, "पीएम मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर के विकास के लिए कई योजनाएं शुरू कीं ताकि वर्षों से चली आ रही उपेक्षा की भरपाई की जा सके।"

नगालैंड के कृषि मंत्री ने दी ये सलाह
नॉर्थ-ईस्ट एग्री एक्सपो कार्यक्रम में राज्य के कृषि मंत्री जी.कैटो ए ने कहा कि अधिकांश केंद्रीय नीतियों और योजनाओं को 'एक आकार सभी के लिए उपयुक्त' के रूप में डिजाइन किया गया है। 

उन्होंने कहा कि नीति निर्धारकों को पूर्वोत्तर में आने और अपने लोगों के साथ समय बिताने, स्थानों पर जाने और विशेष रूप से नीतियों की योजना बनाने के लिए परेशानी उठानी चाहिए, जो यहां के किसान समुदाय के लिए फायदेमंद होगी। 

उन्होंने कहा कि विभिन्न घटकों के लिए लागत मानदंडों को  संशोधित करने की जरूरत है और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग लागत मानदंडों को ध्यान में रखा जा सकता है। 

उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न योजनाओं के तहत केंद्र द्वारा किया गया प्रत्यक्ष भुगतान किसान हितैषी नहीं है क्योंकि राज्य के 74 ब्लॉकों में से 27 अभी भी बैंकों से जुड़े नहीं हैं। 


इसके अलावा, पीएफएमएस के तहत चार किस्तों में धनराशि जारी करना कार्यक्रम के कार्यान्वयन को प्रभावित करता है। 

नगालैंड की खेती के दो प्रमुख मौसम खरीब और रबी का जिक्र करते हुए उन्होंने केंद्र से वर्तमान प्रणाली की समीक्षा करने और दो किस्तों में धन जारी करने की पुरानाी प्रणाली पर वापस जाने का आग्रह किया जो व्यावहारिक कार्यान्वयन के लिए प्रभावी होगा। 
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