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Hindi News ›   India News ›   Myth Breaks: 'Veg' Gujarat has 40% non-vegetarians

शाकाहारी राज्य नहीं रहा गुजरात, 40 फीसदी खाते हैं मांस

Fri, 10 Jun 2016 01:54 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 10 Jun 2016 01:54 PM IST
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Myth Breaks: 'Veg' Gujarat has 40% non-vegetarians
सर्वे ने तोड़ा गुजरात से जुड़ा भ्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात को लेकर कई लोगों की धारणाएं है कि वह देश के उन राज्यों में शुमार है जहां के अधिकतर लोग शाकाहारी हैं। लेकिन नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) के सर्वे की माने तो शायद हकीकत कुछ और ही है। 

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टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एसआरएस के सर्वे जो आंकड़े सामने आए हैं उसमें गुजरात में मांसाहारियों की संख्या चालीस फीसदी के आस-आस है जो किसी उसके पड़ोसी राज्यों की तुलना में कहीं ज्यादा है। यह सर्वे 2014 को आधार वर्ष बनाकर किया गया था जिसे अभी प्रकाशित किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक गुजरात अपने पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को मांसाहार के मामले में पीछे छोड़ चुका है। 
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सर्वे के मुताबिक भारत की कुल आबादी के 71 फीसदी लोग मांसाहार करते हैं और महज 28.85 फीसदी ही ऐसे लोग हैं जो शाकाहारी हैं। देश में सबसे ज्यादा तेलंगाना में मांसाहार किया जाता है। यहां मासांहार करने वालों का आंकड़ा 98.7 फीसदी के करीब है। इसके बाद पश्चिम बंगाल (98.55%), उड़ीसा (97.35%) और केरला (97%) का नंबर आता है। 

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गुजरात में ही पहली बार खुला पिजा हट का वेज रेस्ट्रां

Myth Breaks: 'Veg' Gujarat has 40% non-vegetarians
पुरुषों और महिलाओं की संख्या लगभग समान

गुजरात में मांसाहार करने वालों पुरुष और महिलाओं का अनुपाल लगभग समान ही है। यहां 39.90 फीसदी पुरुष और 38.20 फीसदी महिलाओं ने मासांहार करने की बात को माना है।

गुजरात को लेकर लोगों की अबतक यह धारणा रही है कि वह सबसे ज्यादा शाकाहारी खाया जाने वाला राज्य है। यही कारण था कि पिज्जा हट ने पहली बार गुजरात में शाकाहारी रेस्टोरेंट की शुरुआत की थी। इसके बाद सबवे, केएफसी और मैकडोनाल्ड न केवल शाकाहारी खाद्य पदार्थ बल्कि जैन फूड की भी पेशकश कर रहे हैं।

इन आंकड़ों पर सामाजशास्त्री घनश्याम शाह ने बताया, 'वास्तविकता तो यह है कि गुजरात जो कि करीब 1,600 के समुद्री क्षेत्र तक फैला हुआ है की अधिकतर आबादी मांसाहारी है। इसमें 15 फीसदी जनजातियां, 7 फीसदी दलित, 50 फीसदी पिछड़ी जातियां और 12 फीसदी अल्पसंख्यक हैं जिसमें मुस्लिम, ईसाई और पारसी धर्म के मानने वाले शामिल हैं। '

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