फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Murder Accused Ineligible for Inheritance Supreme Court Clarifies Law

हत्या के आरोपी को नहीं मिलेगी विरासत: सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कानून, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत वंचित

Sat, 09 May 2026 04:03 PM IST
Sandhya Kumari न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Sat, 09 May 2026 04:03 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हत्या करने या उकसाने के आरोपी को पीड़ित की संपत्ति में विरासत का अधिकार नहीं मिलेगा, भले मुकदमा लंबित हो। अदालत ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 और न्याय, निष्पक्षता व समानता के सिद्धांतों का हवाला दिया।

विज्ञापन
Murder Accused Ineligible for Inheritance Supreme Court Clarifies Law
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति की हत्या करने या उकसाने के आरोपी को पीड़ित की संपत्ति विरासत में नहीं मिल सकती। यह नियम तब भी लागू होगा जब हत्या का मुकदमा चल रहा हो।

विज्ञापन

जस्टिस जे बी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। पीठ ने स्पष्ट किया कि संपत्ति विरासत में पाने की यह अयोग्यता वसीयत के माध्यम से और बिना वसीयत दोनों तरह के उत्तराधिकार पर लागू होगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि हत्या के आरोपी व्यक्ति को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 के तहत संपत्ति के अधिकार से वंचित किया जाएगा। 

विज्ञापन

इसके साथ ही, न्याय, निष्पक्षता और समानता के सिद्धांतों के आधार पर भी उसे यह अधिकार नहीं मिलेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिक कार्यवाही में सख्त सबूत अनिवार्य नहीं है। यदि संभावनाओं का पलड़ा अपराध की ओर इशारा करता है, तो भी यह नियम लागू होगा। पीठ ने विशेष रूप से हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 का उल्लेख किया। यह धारा हत्या करने या उकसाने वाले व्यक्ति को मृतक की संपत्ति विरासत में लेने से अयोग्य ठहराती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हत्या के आरोपी को संपत्ति के अधिकार से वंचित करना हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 के अनुरूप है। यह धारा स्पष्ट रूप से हत्यारे या हत्या के लिए उकसाने वाले को मृतक की संपत्ति का वारिस बनने से रोकती है। अदालत ने न्याय और निष्पक्षता के व्यापक सिद्धांतों पर भी जोर दिया। इसका मतलब है कि भले ही आपराधिक मुकदमा चल रहा हो, नागरिक कार्यवाही में उत्तराधिकार का दावा नहीं किया जा सकता। यह फैसला कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आया, जिसने संपत्ति के उत्तराधिकार से संबंधित बेंगलुरु की एक सिविल अदालत के फैसले को रद्द कर दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed