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MHA: 24 घंटे सतर्क रहता है 'मल्टी एजेंसी सेंटर', रॉ-सेना-सीएपीएफ सहित ये एजेंसियां साझा करती हैं इनपुट

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 16 May 2025 05:23 PM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मैक की कार्यप्रणाली को तेज एवं प्रभावी बनाने के लिए प्रयास करते रहे हैं। उनके दिशा निर्देशों पर ही 'मल्टी एजेंसी सेंटर' का दायरा बढ़ाया गया है। मैक के अंतर्गत साइबर सुरक्षा, नार्को टेरर और उभरते कट्टरपंथी हॉटस्पॉट पर नजर रखने के लिए एसओपी बनाए गए थे। इस केंद्र की मदद से कई अपराधों को होने से पहले ही रोकने में सफलता मिली है।

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Multi Agency Center remains alert 24 hours, 26 agencies including RAW-Army-CAPF share inputs
मल्टी एजेंसी सेंटर का हुआ विस्तार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नॉर्थ ब्लॉक में नए मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी) का उदघाटन किया है। इस मौके पर गृह मंत्री ने कहा कि 'ऑपरेशन सिन्दूर' पीएम मोदी की दृढ़ राजनितिक इच्छाशक्ति, आसूचना एजेंसियों की सटीक सूचना और हमारी तीनों सेनाओं की अचूक मारक क्षमता का अद्वितीय प्रतीक है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत खुफिया सूचना जुटाने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के 'बाज', यानी मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी) पर गृह मंत्री अमित शाह का खास फोकस है। ये खुफिया 'मल्टी एजेंसी सेंटर' 24 घंटे बाज की तरह सतर्क रहता है। सेना-सीएपीएफ, एनआईए, ईडी और सीबीआई सहित लगभग 26 केंद्रीय एजेंसियां 'मल्टी एजेंसी सेंटर' में अपने सीक्रेट इनपुट साझा करती हैं।  

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मैक की कार्यप्रणाली को तेज एवं प्रभावी बनाने के लिए प्रयास करते रहे हैं। उनके दिशा निर्देशों पर ही 'मल्टी एजेंसी सेंटर' का दायरा बढ़ाया गया है। मैक के अंतर्गत साइबर सुरक्षा, नार्को टेरर और उभरते कट्टरपंथी हॉटस्पॉट पर नजर रखने के लिए एसओपी बनाए गए थे। इस केंद्र की मदद से कई अपराधों को होने से पहले ही रोकने में सफलता मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्यों के पुलिस संगठन एवं खुफिया सूचनाएं एकत्रित करने वाली इकाइयों से भी आग्रह किया था कि वे 'मैक' के साथ अधिक से अधिक सूचनाएं साझा करें। इसके बाद ही मैक में खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अगर किसी भी केंद्रीय या राज्य की एजेंसी के पास कोई छोटा मोटा इनपुट है तो वह भी 'मैक' में साझा किया जाता है। 
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केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा था, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण के साथ एक एकीकृत एक्शनेबल सिस्टम बनाना होगा। आतंकवाद के वित्तपोषण, क्रिप्टो जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों के पुलिस थानों से लेकर पुलिस महानिदेशक के कार्यालय तक समन्वित अप्रोच अपनानी होगी। उन्होंने 'नीड टू नो' से ड्यूटी टू शेयर की ओर बढ़ने का आह्वान किया था। अब मैक में इन सभी बातों पर काम शुरु हो गया है। 
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देश में उभरते सुरक्षा खतरे के परिदृश्य के बीच आतंकवादी नेटवर्क और उनके सहायक पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिल रहा है। शाह के अनुसार, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सातों दिन और 24 घंटे सतर्क रहना बहुत जरूरी है। इसके लिए मैक की भूमिका बढ़ जाती है। मैक में शामिल सभी एजेंसियों और उनकी सूचना के आधार पर अंतिम कार्रवाई करने वालों के बीच रियल टाइम सूचनाओं का आदान-प्रदान लगातार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। 

मैक के ढांचे को अपनी पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए बड़े तकनीकी और परिचालन सुधारों से गुजारा गया है। पहले मैक में कई केंद्रीय और राज्यों की एजेंसियां, खुले तौर से सूचनाओं का आदान प्रदान नहीं कर पाती थी। वजह, उन्हें लगता था कि मैक में अगर सूचना पुख्ता नहीं निकली या डेस्क पर उसे गिरा दिया गया तो बदनामी होगी। कई बार ऐसा हुआ भी था कि किसी केंद्रीय बल या एजेंसी से कोई सूचना मिली, लेकिन उस बाबत संबंधित अधिकारी पर इतने सवालों की बौछार कर दी गई कि सूचना देने वाले ही मौन रह गए। इससे मैक में सूचना भेजने वालों को यह लगने लगा कि सूचना पुख्ता नहीं हुई तो उन्हें शर्मिंदा होना पड़ सकता है। नतीजा, कई बार छोटी सूचनाएं, मैक के डेस्क से गायब होने लगी। कई ऐसे मौके भी आए, जिसमें सूचना के स्त्रोत को लेकर काफी सवाल जवाब हुए। अब मैक की प्रक्रिया को काफी सरल बनाया गया है। भले ही सूचना पुख्ता न हो, लेकिन वह अस्तित्व में है तो भी उस पर मैक में चर्चा की जाती है। 

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मैक में केंद्र की 26 से ज्यादा सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों की खुफिया विंग शामिल होती हैं। इन एजेंसियों की मदद से पर्दे के पीछे बैठकर आतंकी गतिविधियों एवं दूसरे अपराधों को विभिन्न तरीके से प्रोत्साहन देने वालों को पकड़ा जाता है। कश्मीर, माओवादी इलाके और उत्तर पूर्व के राज्यों में सक्रिय उग्रवादी समूहों को पूरी तरह खत्म करने के लिए जो समयबद्ध मुहिम शुरु की गई है, उसमें मैक की अहम भूमिका है। आर्मी, नेवी, एनआईए, सीबीआई, आईबी, रॉ, सीएपीएफ, डीआरआई व ईडी सहित 26 केंद्रीय एजेंसियां, केंद्रीय गृह मंत्रालय के मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) के जरिए अपनी खास रणनीति को अंजाम देती हैं। बॉर्डर क्राइम और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए 'व्हाइट कॉलर यानी सफेदपोश अपराधी, जो पर्दे के पीछे बैठकर उन्हें वित्तीय, हथियार एवं अन्य तरीके से मदद पहुंचाने का काम करते हैं, उन्हें बाहर निकालने में भी मैक की खास भूमिका है। जांच भले ही कोई एजेंसी करें, लेकिन वह सूचना अविलंब मैक तक पहुंचाई जाती है। 

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आतंकियों के मददगारों का पता चलते ही एनआईए, ईडी और आईटी जैसी एजेंसियां उनके ठिकानों पर छापा मार सकती हैं। उनके पास आर्थिक स्रोत क्या है, उसका पता लग जाता है। इसमें यह भी देखा जाता है कि हवाला के जरिए तो पैसा नहीं आया है। शैल कंपनियां भी संगठित अपराध में बड़ी मददगार साबित होती हैं। इनकी जड़ों पर वार करना जरुरी है। इसके लिए मैक के माध्यम से राज्य एवं केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शाह की अप्रोच पर अब मल्टी एजेंसी सेंटर में भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसे एक ऐसा एकीकृत मंच बनाने पर जोर दिया गया है, जो निर्णायक और त्वरित कार्रवाई के लिए सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों, नशीली दवाओं के खिलाफ एजेंसियों, साइबर सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को एक साथ लाए। 

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