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250 विद्रोहियों से टक्कर लेने वाले शहीद की मां क्यों वापस लौटाना चाहती हैं मेडल, बहादुरी के लिए मिला था शौर्य चक्र

Fri, 23 Oct 2020 02:33 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 23 Oct 2020 02:33 PM IST
सार

बीएसएफ के सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना को अदम्य साहस और बहादुरी के लिए भारत सरकार ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। यह सम्मान, शहीद के पिता फ्लाइट लेफ्टिनेंट रामस्वरूप सक्सेना ने तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद के हाथों प्राप्त किया था। शहीद के परिवार को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित सम्मान राशि आज तक नहीं मिली...

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Mother of late vivek saxena assistant commandant bsf wants to return the medal, Shaurya Chakra was awarded for indomitable bravery
बीएसएफ (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बीएसएफ के सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना, जो 8 जनवरी 2003 को चंदेल 'मणिपुर' में करीब ढाई सौ विद्रोहियों से टक्कर लेते हुए शहीद हो गए थे, उन्हें अदम्य साहस और बहादुरी के लिए भारत सरकार ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। यह सम्मान, शहीद के पिता फ्लाइट लेफ्टिनेंट रामस्वरूप सक्सेना ने तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद के हाथों प्राप्त किया था। शहीद के परिवार को उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा घोषित सम्मान राशि आज तक नहीं मिली।
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कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे अपने पत्र में कहा है कि यूपी सरकार ने इस मामले में शहीद अफसर के परिवार का अपमान किया है। यूपी सरकार 17 साल से इस मामले में टालमटोल कर रही है। शहीद की मां कहती हैं कि इन पदकों को रखा देख मुझे बेटे की याद आती रहेगी, लेकिन मैं सेवा के दौरान मिले मेडल एवं शौर्य चक्र सरकार को वापस लौटाना चाहती हूं।

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एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में भी इस बात का जिक्र किया है कि शहीद का परिवार 1967 से लखनऊ में स्थाई तौर पर रह रहा है। शहीद विवेक सक्सेना का जन्म और शिक्षा-दीक्षा लखनऊ में हुई थी। शहीद का अंतिम संस्कार भी लखनऊ में हुआ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित सम्मान राशि, जो शहीद परिवार को मिलनी थी, वह फाइल पिछले 17 साल से अधर में लटकी हुई है।
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शहीद के पिता अपने हाथों में फाइलें लेकर कार्यालयों, ब्यूरोक्रेट्स और मंत्रालयों के चक्कर लगाते रहे। शासन प्रशासन द्वारा उन्हें एक ही रटा रटाया जवाब दिया जाता कि आप उत्तर प्रदेश निवासी नहीं है। सम्मान राशि के न मिलने व सरकारी तंत्र की उपेक्षा के चलते शहीद के पिता फ्लाइट लेफ्टिनेंट रामस्वरूप सक्सेना भी इस दुनिया से चल बसे। शहीद के पिता ने 1965 ओर 71 की लड़ाइयों में भाग लिया था।

शहीद की मां बोली, मैं हिम्मत हार गई हूं  

अब शहीद की मां सावित्री सक्सेना भी कार्यालयों के चक्कर लगाकर थक गई हैं। वे कहती हैं कि मैं अब हिम्मत हार गई हूं। मेरे बेटे को सरकार ने पदक तो दिया, लेकिन साथ ही परिवार को कार्यालयों के चक्कर काटने पर भी मजबूर कर दिया। अब मैं उसके सेवाकाल के सभी पदक सरकार को वापस लौटाना चाहती हूं। एसोसिएशन के महासचिव का कहना है कि शहीद की मां भीख नहीं, बल्कि बेटे ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था, वह उसकी सम्मान राशि की मांग कर रही हैं। वह सम्मान राशि, जिसकी घोषणा यूपी सरकार ने की थी।



अगर मेडल वापस होते हैं तो राष्ट्र के लिए यह एक शर्मशार करने वाली घटना होगी। पत्र में कहा गया है कि भारत की तीनों सेनाओं और केंद्रीय सुरक्षा बलों के सर्वोच्च सेनापति होने के नाते, एसोसिएशन की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि जहां हमारे शहीद परिवारों के साथ नाइंसाफी हो तो ऐसे मामले आपके संज्ञान में लाए जाएं। उम्मीद है कि देश के महामहिम की ओर से शहीद असिस्टेंट कमांडेंट विवेक सक्सेना की मां को न्याय मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित सम्मान राशि शहीद की मां को दिलाने के लिए दिशा निर्देश जारी किए जाएं।

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