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Mobri Bridge Collapse: मोरबी नपा को फिर हाईकोर्ट ने फटकारा, आज ही पेश करें स्टेटस रिपोर्ट वर्ना...

Wed, 16 Nov 2022 02:05 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 16 Nov 2022 02:05 PM IST
सार

मोरबी पुल हादसे में 140 से ज्यादा लोग मारे गए थे। गुजरात हाईकोर्ट ने नपा को दो नोटिस दिए जाने के बाद भी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने में देरी पर आज फिर चेतावनी दी। नगर पालिका के वकील से कहा कि आप मामले को हल्के में ले रहे हैं। 

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Morbi civic body reprimanded by High Court again, know all about
मोरबी हादसा - फोटो : ANI

विस्तार

गुजरात हाईकोर्ट ने मोरबी 30 अक्तूबर को हुए पुल हादसे को लेकर आज फिर कड़ा रुख अपनाया। हाईकोर्ट ने मोरबी नगर पालिका के अफसरों को फटकारते हुए आज शाम तक स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया। ऐसा नहीं करने पर नगर पालिका पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने की चेतावनी दी है। 

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मोरबी पुल हादसे में 140 से ज्यादा लोग मारे गए थे। गुजरात हाईकोर्ट ने नपा को दो नोटिस दिए जाने के बाद भी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने में देरी पर आज फिर चेतावनी दी। उच्च न्यायालय ने कहा नगर पालिका के वकील से कहा कि आप मामले को हल्के में ले रहे हैं। आज शाम तक जवाब दाखिल करें या 1 लाख रुपये जुर्माना अदा करने को तैयार रहें। 
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चुनाव ड्यूटी पर हैं अफसर, इसलिए देरी : नपा
हाईकोर्ट में मौजूद मोरबी नगरपालिका के वकील ने कहा कि नगरपालिका के प्रभारी और डिप्टी कलेक्टर चुनाव ड्यूटी पर हैं। नोटिस डिप्टी कलेक्टर को भेजा जाना चाहिए था, लेकिन यह 9 नवंबर को स्थानीय नगर पालिका को दिया गया। इस कारण हाईकोर्ट में जवाब पेश करने में देरी हुई। 
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स्टेटस रिपोर्ट से पता चलेगा, कैसे गिरा पुल?
माना जा रहा है कि मोरबी नगर पालिका द्वारा पेश की जाने वाले स्टेटस रिपोर्ट से पता चलेगा कि आखिर यह पुल कैसे गिरा? हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेकर राज्य सरकार के छह विभागों से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष जे शास्त्री इस केस की सुनवाई कर रहे हैं।

मंगलवार को हाईकोर्ट ने 150 साल पुराने मोरबी पुल के रखरखाव के लिए जिस तरीके से ठेका दिया गया, उस पर सवाल उठाते हुए नगर पालिका से जवाब मांगा था। पुल की  मरम्मत के ठेके की प्रक्रिया पर भी आपत्ति की थी। 

मुख्य सचिव से पूछा- टेंडर क्यों नहीं निकाला
मुख्य न्यायाधीश कुमार ने गुजरात के मुख्य सचिव से पूछा था कि सरकारी पुल की मरम्मत के लिए टेंडर क्यों नहीं निकाला गया? टेंडर की बोलियां क्यों नहीं बुलाई गईं? इतने महत्वपूर्ण कार्य का अनुबंध मात्र डेढ़ पेज में कैसे सिमट गया? क्या मेंटेनेंस कंपनी को राज्य सरकार ने कोई ढील दे रखी थी? 

बता दें, गुजरात पुलिस ने मोरबी पुल हादसे को लेकर पुल का प्रबंधन करने वाले ओरेवा समूह के चार लोगों सहित नौ लोगों को हादसे के दूसरे दिन यानी 31 अक्तूबर को गिरफ्तार कर लिया था। पुल का संचालन करने वाली कंपनियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है।


इससे पहले 7 नवंबर को हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में केस दायर किया था। हाईकोर्ट ने तब मुख्य सचिव और गृह सचिव को प्रतिवादी बनाते हुए सोमवार तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। 

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