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Morbi Bridge Collapse: हाईकोर्ट ने नगरपालिका को कड़ी फटकार लगाई, कहा- पीड़ितों को दिया जा रहा बहुत कम मुआवजा
Thu, 24 Nov 2022 10:59 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 24 Nov 2022 10:59 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने नागरिक निकाय और अजंता मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड कंपनी के बीच संवाद का हवाला देते हुए कहा कि नगरपालिका का ध्यान कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट को बनाए रखने पर था, न कि पुल की मरम्मत पर, जिसकी जर्जर स्थिति बताई गई थी।
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मोरबी पुल हादसा
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार को मोरबी नगरपालिका को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि उसने पुल की गंभीर स्थिति को लेकर चेतावनी को नजरअंदाज किया और टिकटों के जरिए मिलने वाले धन पर ही अपना ध्यान केंद्रित किया। मोरबी में मच्छु नदी पर बना बना पुलिस 30 अक्तूबर को ढह गया था। इस हादसे में 135 लोगों की मौत हो गई ती।
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हाईकोर्ट ने नागरिक निकाय और अजंता मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड कंपनी के बीच संवाद का हवाला देते हुए कहा कि नगरपालिका का ध्यान कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट को बनाए रखने पर था, न कि पुल की मरम्मत पर, जिसकी जर्जर स्थिति बताई गई थी। अजंता कंपनी को ब्रिटिश काल के पुल के रखरखाव व संचालन का ठेका दिया गया था।
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कोर्ट ने आगे कहा कि कोई विशिष्ट लिखित समझौता नहीं था। फिर भी कंपनी ने पुल का रखरखाव और संचालन जारी रखा, जिससे स्पष्ट होता है कि मोरबी नगरपालिका और कंपनी किस तरह से स्थिति से निपट रहे थे। चीफ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आशुतोष शास्त्री की बेंच ने मोरबी पुल हादसे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। बेंच ने कहा, पीड़ितों और गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को दिया जा रहा मुआवजा बहुत कम है।
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बेंच ने अपने आदेश में कंपनी द्वारा लिखे गए पत्र का जिक्र किया और कहा कि 29 दिसंबर 2021 को कंपनी ने नगर निकाय को लिखा था- सर, आप इस बात से अवगत हैं कि अस्थायी मरम्मत करने के बाद भी पुल की स्थिति गंभीर है। किसी भी समय कोई दुर्घटना हो सकती है। हमने इस संबंध में आपसे बार-बार अनुरोध किया है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।