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'मन की बात' में सूखे पर चर्चा करेंगे पीएम मोदी

Sun, 24 Apr 2016 04:58 AM IST
एम संजय/ अमर उजाला, दिल्ली
एम संजय/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 24 Apr 2016 04:58 AM IST
सार

  • जलवायु परिवर्तन को लेकर पीएम चिंतित 
  • मन की बात के जरिए सूखे पर देश को बताएंगे अपनी वेदना

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Modi to discuss drought in 'Man Ki Baat'
नरेंद्र मोदी

विस्तार

जलवायु परिवर्तन से देश पर हो रहे कुप्रभावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद चिंतित हैं। रविवार को रेडियो पर प्रसारित होने वाले 'मन की बात' में वे सूखे पर चर्चा के जरिए अपनी वेदना देश के सामने प्रकट करेंगे।

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तो दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन पर बनी परिषद की उन्होंने बैठक बुलाई है। ताकि देश को जलवायु परिर्वतन के असर से बचाया जा सके। सूत्र बताते हैं कि पीएमओ ने जलवायु परिवर्तन पर बनी मंत्रियों और विशेषज्ञों की विशेष परिषद की बैठक 30 अप्रैल को साउथ ब्लॉक में बुलाई है। इसके अध्यक्ष खुद पीएम हैं।
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दरअसल देश में आए सूखे को लेकर पीएम मोदी बेहद चिंतित हैं। सूखे की समस्या भी जलवायु परिवर्तन के वजह से है। सूखे से निपटने के लिए सरकार ने अपनी ओर से तात्कालिक प्रयास तेज कर दिए हैं। लेकिन संकट के स्थाई समाधान को लेकर भी पीएमओ सक्रिय हैं। बताया जा रहा है कि संकट से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों के अलावा पीएम मोदी जनता से भागीदारी बढ़ाने का आह्वान करेंगे। जीवन के लिए जल की अहमियत बताते हुए वे आम जनता से पानी को बचाने का आग्रह करेंगे। तो किसानों से भी कहेंगे कि वे सिंचाई के ड्रिप सरीखे नए तरीकों को आजमाएं।
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इससे पहले बुधवार को कैबिनेट की बैठक में भी सरकार सूखे पर मंथन कर चुकी है। जिसमें पीएम मोदी ने अपने मंत्रियों को राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। पीएम के निर्देश का असर साफ दिखा।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अध्यक्षता में सरकार के उच्च स्तर के मंत्रियों ने शुक्रवार शाम को बैठक कर सूखे से उत्‍पन्न समस्या की समीक्षा के साथ राहत के उपायों पर चर्चा की। सरकार ने राहत के लिए राज्य सरकारों को राशि देनी शुरू कर दी है। कर्नाटक को राशि जारी करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा है कि सूखे की समस्या से निपटने के लिए राशि की कमी नहीं होगी।


दरअसल सरकार की मुश्किलें इसलिए बढ़ी हुई हैं कि देश का 25 प्रतिशत हिस्सा अभी सूखे की चपेट में है। सर्वोच्च न्यायालय में सरकार खुद ही स्वीकार कर चुकी है कि 33 करोड़ लोगों पर सूखे का असर पड़ा है। 

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