महाबलीपुरम: भारत-चीन के बीच आज सीमा विवाद सहित कई मुद्दों पर हो सकती बात
- दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति, मोदी ने की अगवानी
- पांच घंटे दोनों नेताओं ने बिताया साथ
- डिनर के दौरान ढाई घंटे तक बातचीत
- आज सीमा विवाद सहित कई मुद्दों पर चर्चा संभव
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व्यापारिक मुद्दों पर फिर हो सकती है बात
कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के बाद चीन से संबंधों में उतार-चढ़ाव के बीच हो रही जिनपिंग की यह यात्रा काफी अहम है। भारत कश्मीर को लेकर कोई बात नहीं करना चाहता। चर्चा हुई तो भारत पाक के कब्जे वालेे कश्मीर पर ही बात करेगा। दोनों के बीच एक नवंबर को होने वाले क्षेत्रीय आर्थिक मुक्त व्यापार समझौते (आरसीईपी ), 5जी तकनीक पर बात हो सकती है। भारत हुआवे के लिए 5जी तकनीक के परीक्षण को तैयार हो सकता है। हालांकि इस मुलाकात के दौरान कोई करार नहीं होना है।
आतंक के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे भारत-चीन
इससे पहले एशिया की दो महाशक्तियों के शीर्ष नेताओं की तमिलनाडु के ऐतिहासिक शहर मामल्लापुरम (महाबलीपुरम) में शुक्रवार को महामुलाकात हुई। पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच पहले से तय अनौपचारिक मुलाकात में गर्मजोशी और आपसी विश्वास साफ दिखा।
डिनर के दौरान करीब ढाई घंटे की वन-टू-वन बातचीत में दोनों नेताओं ने बढ़ते आतंकवाद और कट्टरता को बड़ी चुनौती मानते हुए इसके खिलाफ साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई। इस दौरान दोनों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने तथा व्यापार सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
अब सबकी निगाह शनिवार सुबह होने वाली शिखर वार्ता पर है। जिसमें मुख्य फोकस सीमा विवाद सहित विवादित मुद्दों से आगे बढ़ने पर होगा।
मुलाकात की जानकारी देते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि चीनी राष्ट्रपति ने भारत यात्रा के पहले दिन पीएम मोदी के साथ करीब पांच घंटे का समय बिताया। ज्यादातर समय दोनों नेताओं ने अकेले में चर्चा की।
गोखले ने बताया कि दोनों के बीच आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर भी मंथन हुआ। इस बात पर भी विचार हुआ कि कैसे व्यापार को बढ़ाया जाए। चर्चा के दौरान मोदी ने व्यापार घाटे और असंतुलित व्यापार को सुधारने का भी मुद्दा उठाया।
इससे पहले मोदी ने जिनपिंग की अगवानी की और एक घंटे तक उन्हें प्राचीन विरासत दिखाई। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के बाद दोनों नेताओं ने साथ डिनर किया। इस दौरान उनके बीच विभिन्न मुद्दों पर करीब ढाई घंटे बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया, मोदी और जिनपिंग ने डिनर के बाद भारत-चीन की साझेदारी को मजबूत करने को लेकर विचारों का आदान-प्रदान जारी रखा।
जिनपिंग ने उठाया दक्षिण भारतीय व्यंजन का लुत्फ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दूसरे अनऔपचारिक सम्मेलन के दौरान वेशभूषा के साथ ही खाने में भी पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन छाये रहे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिनपिंग को पारंपरिक तमिल सामान भेंट किए। इसमें नाचियारकोइल अन्नम लैंप और तांजवुर पेंटिंग शामिल हैं।
दो दिवसीय भारत दौरे के पहले दिन के रात्रिभोज में सांभर, और मसूर की दाल से बने लजीज दक्षिण भारतीय पकवान शामिल थे। मेन्यू में शामिल व्यंजन में सबके आकर्षण का केंद्र ‘अराचू विट्टा सांभर’ रहा। इसको और लजीज बनाने के लिए मसूर की पीसी दाल, कुछ खास मसाले और नारियल का इस्तेमाल किया गया।
इसके अलावा इमली और टमाटर सेे तैयार ‘तक्कली रसम’ मटर से तैयार ‘कदाली कुरुमा’ के साथ ही मिष्ठान के तौर पर कवनरासी हलवा, अदा प्रधामन व मुक्कानी आइसक्रीम भी शामिल थे। उनके लिए चुनिंदा मांसाहार व्यंजन का भी प्रबंध किया गया था।
इसमें आंध्रप्रदेश का ममसम बिरयानी, मालाबार लोबस्टर, कोरी केम्पू, मट्टन उलरतियाडू, कारुवेपिल्लई मीन वारुवल, तनजावूर कोझी कड़ी, येराची घेट्टी कोझामबु आदि शामिल थे।
वेष्टि पहने मोदी ने किया जिनपिंग का स्वागत
मोदी ने तीन भाषा में लिखा, वेलकम
इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के भारत पहुंचने का स्वागत खास अंदाज में किया। उन्होंने इंग्लिश, मंडारिन और तमिल में ट्वीट किया, ‘भारत में आपका स्वागत है राष्ट्रपति शी जिनपिंग।’ चेन्नई पहुंचने पर मोदी ने फिर तीन भाषाओं में ट्वीट किया, ‘चेन्नई पहुंच गया। अपनी संस्कृति और मेहमाननवाजी के लिए मशहूर तमिलनाडु की महान भूमि पर पहुंचकर बहुत खुश हूं। यह भी बेहद खुशी की बात है कि तमिलनाडु चीन के राष्ट्रपति का स्वागत कर रहा है। उम्मीद करता हूं कि इन अनौपचारिक बैठक से भारत और चीन के संबंध और मजबूत होंगे।’इसलिए महाबलीपुरम को चुना
मोदी और जिनपिंग के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए तमिलनाडु के शहर महाबलीपुरम को कूटनीतिक तौर पर चुना गया। इस शहर का चीन के साथ काफी पुराना नाता रहा है। 18वीं सदी में यहां के तत्कालीन पल्लव राजा और चीन के शासक के सुरक्षा समझौता हुआ था। लिहाजा इस शहर को चुनने के पीछे की वजह चीन के साथ पुराने रिश्तों को फिर से दिखाना है।जिनपिंग को तोहफे में दी तंजावुर की पेंटिंग