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काम नहीं आई एएमयू वीसी की इफ्तार डिप्लोमेसी,याचिका वापस लेगी मोदी सरकार

Thu, 07 Jul 2016 11:57 PM IST
Updated Thu, 07 Jul 2016 11:57 PM IST
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modi government withdraw petition of UPA on AMU

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति जमीरउद्दीन शाह की इफ्तार पार्टी डिप्लोमेसी काम नहीं आई। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यूपीए सरकार द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट फैसले के बाद दायर हलफनामा वापस लेने का फैसला लिया है। इससे एएमयू को करारा झटका लगा है।

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नई दिल्ली के पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा 2 जुलाई को रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया था। इसमें मंच के मुख्य संरक्षक एवं आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार समेत कई लोग मौजूद थे।
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आरएसएस के रोजा इफ्तार में शामिल होने पर एएमयू वीसी काफी आलोचना झेल रहे है। इसके बाद उन्होंने मीडिया एवं अलीग बिरादरी को सफाई दी कि मुसलमानों ने पीएम मोदी को स्वीकार कर लिया है। केंद्र सरकार की अनदेखी मुसलमानों के लिए घातक होगी।
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उन्होंने यह भी दावा किया कि काफी सोच विचार के बाद आरएसएस के रोजा इफ्तार में गए थे। सर सैयद ने भी समय की नब्ज को पहचान कर भारत के मुसलमानों के विकास के लिए ब्रिटिश सरकार से मेलमिलाप कर एएमयू की स्थापना कराई थी।

कुलपति अभी आलोचनाओं से उबरे भी नहीं कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप से संबंधित मसले में हलफनामा जमा कर उनके इफ्तार डिप्लोमेसी को झटका दिया है। मीडिया रिपोर्ट में तो इसकी भी चर्चा है कि केंद्र ने यूपीए सरकार द्वारा दायर हलफनामा वापस लेने का फैसला लेने के साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एएमयू में 50 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण से संबंधित जितने भी लेटर जारी किए गए थे, उसे वापस ले लिया है।

इसके साथ ही हलफनामा में यह भी कहा गया है कि अल्पसंख्यक स्वरूप के सपोर्ट से संबंधित जितने भी लेटर जारी किए गए हैं, उसे वापस मान लिया जाए। इस संबंध में एएमयू जनसंपर्क विभाग के एमआईसी डॉ. राहत अबरार ने बताया कि यूपीए सरकार ने एएमयू के समर्थन में जो हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दायर किया था, उसे सरकार द्वारा वापस लेने के फैसले की सूचना मिल रही है। अभी मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और हम अपना पक्ष मजबूती से वहां रखेंगे।

राष्ट्रीय संग्रहालय से लेकर एएमयू तक खंगाले गए रिकार्ड

modi government withdraw petition of UPA on AMU

 एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर राष्ट्रीय संग्रहालय से लेकर एएमयू के मौलाना आजाद लाइब्रेरी एवं विभागों से भी रिकार्ड खंगाले गए। सूत्रों पर भरोसा करे तो मानव संसाधन मंत्रालय के अधिकारी के अतिरिक्त एएमयू में दलितों एवं पिछड़ों को आरक्षण दिलाने की मुहिम में लगे लोग कई महीने से इसके लिए प्रयास कर रहे थे। राष्ट्रीय संग्रहालय एवं एएमयू से रिकार्ड खंगाले गए।

अलीगढ़ सांसद सतीश गौतम एवं प्रवक्ता संदीप चाणक्य ने भी कुछ पुस्तकें उपलब्ध कराने का आग्रह एएमयू से किया था, जिसके बाद प्रशासन द्वारा उन्हें कुछ पुस्तकों के फोटो स्टेट कॉपी उपलब्ध कराए गए। माना जा रहा कि राष्ट्रीय संग्रहालय एवं एएमयू लाइब्रेरी से प्राप्त दस्तावेज से सरकार के पक्ष को काफी मजबूती मिली है।

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