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राफेल सौदा: मोदी सरकार ने अंतर-सरकारी समझौते में यूपीए की नीति का ही पालन किया

Mon, 11 Feb 2019 12:35 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Mon, 11 Feb 2019 12:35 PM IST
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Modi government followed UPA policy on inter governmental agreements in Rafale deal
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : PTI

राफेल डील को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा जा रहा है कि उन्होंने अंतर-सरकारी समझौते के दौरान मानक प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया और मानक अनुबंध दस्तावेज का इस्तेमाल नहीं किया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी किसी भी मौके पर राफेल को लेकर मोदी सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ते। कांग्रेस पार्टी ने संसद में भी इस मुद्दे के उठाया था। 


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लेकिन अब पता चला है कि ये नीति कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय से ही चली आ रही है। वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े सूत्रों ने सोमवार को कहा कि भारतीय वार्ताकार, जिसने अंतर-सरकारी समझौते के तहत 36 राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को अंतिम रूप दिया है, उन्होंने यूपीए सरकार की ही नीति का पालन किया था। 
 

साल 2013 में यूपीए सरकार एक नई नीति लेकर आई थी, जिसके तहत रक्षा मंत्रालय को निर्धारित नियमों का पलान न करने और जिन देशों से अच्छे संबंध हैं, उनके साथ दोनों पक्षों के बीच पारस्परिक रूप से सहमत प्रावधानों के अनुसार अतंर सरकारी समझौता साइन करने की अनुमति दी गई।

रक्षा खरीद प्रक्रिया के पैरा 71  के अनुसार, "ऐसे मौके हो सकते हैं जब मित्र विदेशी देशों से खरीददारी की जानी चाहिए, जो देश के लिए प्राप्त होने वाले भौगोलिक रणनीतिक फायदों के कारण जरूरी हो सकते हैं। ऐसी खरीद क्लासिकल मानक प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया और मानक अनुबंध दस्तावेज का पालन नहीं करते हुए दोनों देशों की सरकारों द्वारा पारस्परिक रूप से सहमत प्रावधानों पर आधारित होगी। सक्षम वित्तीय प्राधिकरण (सीएफए) से मंजूरी मिलने के बाद ऐसी खरीद एक अंतर सरकारी समझौते के आधार पर की जाएगी।"



सूत्रों के अनुसार राफेल सौदे में भारतीय वार्ताकार ने लड़ाकू विमानों के अनुबंध को अंतिम रूप देते हुए डीपीपी-2013 के इन प्रावधानों पर भरोसा किया था। ये डीपीपी-2013 साल 2013 में ही प्रभाव में आया था, उस वक्त यूपीए सरकार सत्ता में थी और एके एंटनी रक्षा मंत्री थे। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोदी सरकार को एंटी करप्शन क्लॉज सहित राफेल सौदे पर हस्ताक्षर करते समय रक्षा खरीद प्रक्रिया में मानक दंडों का इस्तेमाल न करने को लेकर निशाना साधा जा रहा है।

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